दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, दो फेलोशिप योजनाओं को दी मंजूरी, हर महीने मिलेंगे 25 से 50 हजार

दिल्ली कैबिनेट ने आर्काइव और पुरातत्व क्षेत्र में दो रिसर्च फेलोशिप योजनाओं को मंजूरी दी है, जिनका उद्देश्य राजधानी की ऐतिहासिक विरासत के वैज्ञानिक अध्ययन, दस्तावेजीकरण और संरक्षण को बढ़ावा देना है. ये योजनाएं शोधकर्ताओं, इतिहासकारों और संरक्षण विशेषज्ञों को दिल्ली के इतिहास और पुरातत्व की गहन समझ विकसित करने का अवसर प्रदान करेंगी.

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दिल्ली सरकार ने आर्काइवल और आर्कियोलॉजी फेलोशिप को दी मंजूरी. (Photo: X/@CMODelhi) दिल्ली सरकार ने आर्काइवल और आर्कियोलॉजी फेलोशिप को दी मंजूरी. (Photo: X/@CMODelhi)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:52 AM IST

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली कैबिनेट ने राजधानी की ऐतिहासिक विरासत के वैज्ञानिक अध्ययन, दस्तावेजीकरण और डिजिटाइजेशन में मदद के लिए आर्काइव और आर्कियोलॉजी क्षेत्र में दो रिसर्च फेलोशिप योजनाओं को मंजूरी दी है. सरकार ने कहा कि इस कदम का मकसद खास अध्ययन को बढ़ावा देना और इतिहास, पुरातत्व और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में विशेषज्ञों का एक मजबूत समूह तैयार करना है.

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, 'दिल्ली न सिर्फ राष्ट्रीय राजधानी है, बल्कि इतिहास, संस्कृति और सभ्यता की एक जीवित विरासत भी है.' उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध, व्यवस्थित दस्तावेजीकरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए व्यापक पहुंच के जरिए इस विरासत को बचाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है.

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भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षण जरूरी: CM

उन्होंने कहा कि ये फेलोशिप शोधकर्ताओं, आर्काइविस्ट, संरक्षण विशेषज्ञों, इतिहासकारों, भाषाविदों और विरासत विशेषज्ञों को दिल्ली के इतिहास और आर्काइव विज्ञान के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करने के लिए एक मंच प्रदान करेगी. इस योजना के तहत शामिल क्षेत्रों में रिकॉर्ड प्रबंधन, आर्काइव सामग्री का संरक्षण, डिजिटाइज़ेशन, जानकारी का प्रसार, डेटा प्रबंधन, माइक्रोफिल्मिंग, रीप्रोग्राफी, शोध प्रकाशन और ओरिएंटल भाषाओं (खासकर उर्दू और फ़ारसी) से संबंधित अध्ययन शामिल हैं.

चुने जाएंगे 27 फोलो

आधिकारिक बयान के अनुसार, 'आर्काइवल रिसर्च फेलोशिप' का मुख्य फोकस उच्च गुणवत्ता वाले अभिलेखीय अनुसंधान, ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जनता के लिए सुलभ बनाने पर रहेगा. इसके तहत हर साल 15 फेलो एक साल के लिए चुने जाएंगे. इस योजना के अंतर्गत रिकॉर्ड प्रबंधन, डेटा प्रबंधन, माइक्रोफिल्मींग, रीप्रोग्राफी और पूर्वी भाषाओं, विशेष रूप से उर्दू और फारसी से संबंधित अध्ययनों को पूरी तरह शामिल किया गया है.

वहीं, पुरातत्व में रिसर्च फेलोशिप का मकसद दिल्ली के पुरातात्विक स्थलों और स्मारकों के शोध, संरक्षण और बेहतरी को बढ़ावा देना है, जिसमें कम ज्ञात ऐतिहासिक संरचनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. ये योजना दिल्ली के इतिहास, पुरातत्व, वास्तुकला और संरक्षण से संबंधित अध्ययनों को बढ़ावा देगी, साथ ही विरासत संरक्षण और पर्यटन में भी योगदान देगी.

पुरातत्व फेलोशिप के तहत हर साल एक साल के कार्यकाल के लिए कुल 12 फेलो चुने जाएंगे और उन्हें 25,000 रुपये से 50,000 रुपये तक की मासिक फेलोशिप मिलेगी.

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स्मारकों को मिलेगी नई पहचान

गुप्ता ने कहा कि ये दोनों फेलोशिप योजनाएं आर्काइव, पुरातत्व और विरासत संरक्षण में कुशल पेशेवर तैयार करने, शैक्षणिक शोध को नई दिशा देने और दिल्ली की दस्तावेजी और पुरातात्विक विरासत को बचाने में मदद करेंगी.

उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों योजनाओं के लिए पात्रता, आवेदन प्रक्रिया, चयन प्रक्रिया और अन्य नियम व शर्तों के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश संबंधित विभागों द्वारा अलग से अधिसूचित किए जाएंगे. इन दिशानिर्देशों के जारी होने के तुरंत बाद इन दोनों फेलोशिप को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया जाएगा.

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