लेटलतीफी पर गडकरी बोले- ट्रांसजेंडर को बच्चा हो जाएगा लेकिन ये परियोजना पूरी नहीं होगी

नितिन गडकरी ने इस परियोजना के चौथे चरण के पूरा होने पर खुशी जाहिर की. परियोजना के पांचवें चरण का काम भी जल्द पूरा होने की आशा है. यह लिफ्ट सिंचाई परियोजना, सांगली जिले के शुष्क इलाकों में सिंचाई सुविधाएं देने के लिए कृष्णा नदी घाटी से पानी लेकर पूरी की जानी है.

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पंकज खेळकर

  • नई दिल्ली,
  • 24 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 7:43 AM IST

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक बार फिर से ऐसा बयान दिया है जो उन्हें विवादों में ला सकता है. केन्द्रीय मंत्री ने एक कार्यक्रम के दौरान एक सिंचाई प्रोजेक्ट को पूरा करने में हुई लेट-लतीफी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर एक ट्रांसजेंडर की शादी होती है तो उसे बच्चा भी हो जाएगा लेकिन महाराष्ट्र के सांगली जिले की सिंचाई योजना कभी पूरी नहीं हो पाएगी.

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वह सांगली में तेंभू 'लिफ्ट' सिंचाई परियोजना के चौथे चरण के पूरा होना पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. पश्चिम महाराष्ट्र में सांगली में एक रैली को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा, "तेंभू लिफ्ट सिंचाई योजना की आर्थिक व्यवहार्यता इतनी मुश्किल है कि एक बार मैंने एक व्यक्ति से इसे लेकर अपने विचारों का साझा किया था, मैंने कहा था कि यहां तक कि एक ट्रांसजेंडर को बच्चा हो सकता है लेकिन यह सिंचाई योजना कभी पूरी नहीं हो सकेगी."

नेता का यह बयान ऐसे समय में आया है जब उन्होंने मीडिया के एक हिस्से पर उनकी टिप्पणी को "तोड़मरोड़" कर पेश करने का आरोप लगाया है. गडकरी ने शनिवार को पुणे में कथित तौर पर कहा था कि "नेतृत्व को हार की जिम्मेदारी" लेनी चाहिए.

ने इस परियोजना के चौथे चरण के पूरा होने पर खुशी जाहिर की. परियोजना के पांचवें चरण का काम भी जल्द पूरा होने की आशा है. यह लिफ्ट सिंचाई परियोजना, सांगली जिले के शुष्क इलाकों में सिंचाई सुविधाएं देने के लिए कृष्णा नदी घाटी से पानी लेकर पूरी की जानी है. इस कार्यक्रम के दौरान सीएम देवेंद्र फडणवीस, जलसंपदा मंत्री गिरीश महाजन, राजस्व मंत्री चंद्रकांत पाटिल समेत कई दूसरे मंत्री मौजूद थे.

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तेंभू जल परियोजना के पूरे हो जाने से सांगली और सोलापुर  जिलों की 4 लाख एकड जमीन को पानी मिल सकेगा. इस परियोजना के लिए पहले भी भाजपा और शिवसेना की सरकार ने पैसा दिया था. महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट के लिए 4088 करोड रुपये मंजूर किए हैं. इतनी बड़ी लागत से बन रही इस परियोजना का मजाक उड़ाया जाता था और कहा जाता था कि ये योजना कभी पूरी नहीं होगी.

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