महाराष्ट्र में पुलिस और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने सिंथेटिक दूध के एक बड़े अंतरजिला रैकेट का भंडाफोड़ किया है. संयुक्त कार्रवाई में 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 2 करोड़ रुपये से ज्यादा का सामान जब्त किया गया है. जांच में सामने आया है कि आरोपी हर 1 हजार लीटर असली दूध में करीब 500 लीटर रसायनों से तैयार सिंथेटिक दूध मिलाकर बाजार में सप्लाई कर रहे थे.
अधिकारियों के अनुसार, पुणे ग्रामीण पुलिस और FDA ने पुणे जिले के मंचर में छापेमारी की, जिसे इस पूरे रैकेट का मुख्य केंद्र माना जा रहा है. इसके अलावा अकलूज, अहिल्यानगर, सिल्लोड और सांगली में भी एक साथ कार्रवाई की गई.
शैंपू और केमिकल से तैयार होता था सिंथेटिक दूध
जांच में पता चला कि सिंथेटिक दूध तैयार करने के लिए स्किम्ड मिल्क पाउडर, परमिट पाउडर, इमल्सीफायर, शैंपू, पाम ऑयल, डिटर्जेंट और अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जा रहा था. अधिकारियों का आरोप है कि इन पदार्थों से तैयार दूध को असली दूध में मिलाकर बाजार में बेचा जाता था.
यह संयुक्त अभियान पुणे ग्रामीण पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल और FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे के मार्गदर्शन में चलाया गया. कार्रवाई में पुणे ग्रामीण लोकल क्राइम ब्रांच के 30 सदस्य और FDA के 20 से अधिक अधिकारी शामिल रहे.
एक महीने तक निगरानी के बाद हुई कार्रवाई
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि 11 जून को इस रैकेट की सूचना मिलने के बाद करीब एक महीने तक खुफिया जानकारी जुटाई गई और दो दिनों तक लगातार कार्रवाई कर पूरे नेटवर्क का खुलासा किया गया. उन्होंने बताया कि इस मामले में महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक सदानंद दाते के साथ भी चर्चा की गई थी.
FDA का आरोप है कि मुख्य आरोपी सुशांत हिंगे और उसके सलाहकार संदीप लोढ़ा किसानों को ज्यादा मात्रा और बेहतर गुणवत्ता का लालच देकर असली दूध में सिंथेटिक दूध मिलाने के लिए तैयार करते थे. इसके बाद मिलावटी दूध को दूध संग्रह केंद्रों, चिलिंग प्लांट और पैकेजिंग यूनिट के जरिए बाजार तक पहुंचाया जाता था.
सात जिलों तक फैला था नेटवर्क
जांच के दौरान पता चला कि यह नेटवर्क पुणे, सोलापुर, जालना, अहिल्यानगर, ठाणे, जलगांव और धाराशिव जिलों तक फैल चुका था. अधिकारियों ने दूध संग्रह केंद्रों, डेयरी संचालकों और किसानों से भी पूछताछ शुरू की है. कुछ मामलों में किसानों के खुद सिंथेटिक दूध बनाने और किराना व्यापारियों द्वारा इसमें इस्तेमाल होने वाले रसायन उपलब्ध कराने की बात भी सामने आई है.
FDA ने बताया कि कार्रवाई के दौरान नवकार डिस्ट्रीब्यूटर से 1,385 किलोग्राम मिल्क पाउडर जब्त किया गया. कुल नौ स्थानों पर छापेमारी कर 39 नमूने लिए गए और 1.47 करोड़ रुपये का सामान जब्त किया गया. इसके अलावा 20 हजार लीटर से अधिक संदिग्ध मिलावटी दूध को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया.
कई डेयरियों पर कार्रवाई, पांच लाइसेंस निलंबित
इस मामले में जय श्रीराम कलेक्शन सेंटर के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई है और मंचर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है. FDA ने संगठित अपराध, जहरीले रसायनों के इस्तेमाल और असुरक्षित खाद्य उत्पाद बनाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की है.
FDA ने पांच लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं और चार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को काम बंद करने का आदेश दिया है. नवकार डिस्ट्रीब्यूटर, हेमंत कॉर्पोरेशन, पीरसाई मिल्क, भैरवनाथ, जय श्रीराम डेयरी, मातोश्री डेयरी, गुरुदत्त चिलिंग सेंटर, सह्याद्री डेयरी और आनंदयोगी मिल्क कलेक्शन सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की गई है.
दो बड़े गिरोहों की जांच जारी
FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि पुणे, नासिक और छत्रपति संभाजीनगर राजस्व मंडलों में मिल्क पाउडर बनाने वाली इकाइयों की भी बड़े स्तर पर जांच शुरू कर दी गई है. जांच एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि महाराष्ट्र में सिंथेटिक दूध तैयार करने वाले दो बड़े संगठित गिरोह सक्रिय हैं. दोनों नेटवर्क के खिलाफ खुफिया जानकारी जुटाने और आगे की जांच जारी है.
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