अजित पवार प्लेन क्रैश: FIR से इनकार पर बवाल, रोहित पवार ने उठाए पुलिस पर सवाल

विधायक रोहित पवार ने अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के मामले में FIR दर्ज न होने पर नाराजगी जताई है. उन्होंने विमान कंपनी और DGCA पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए साजिश की आशंका जताई है. पुलिस और CID का कहना है कि जांच जारी है, इसलिए अलग से केस दर्ज नहीं किया जा सकता.

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अजित पवार प्लेन क्रैश केस में को लेकर रोहित पवार ने पुलिस और सीआईडी अधिकारियों से मुलाकात की. (Photo-ITG) अजित पवार प्लेन क्रैश केस में को लेकर रोहित पवार ने पुलिस और सीआईडी अधिकारियों से मुलाकात की. (Photo-ITG)

ओमकार

  • पुणे,
  • 02 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 2:14 PM IST

महाराष्ट्र की राजनीति में 'पावर गेम' अब अजित पवार की विमान दुर्घटना में हुई मौत की जांच को लेकर गरमा गया है. एनसीपी (SP) विधायक रोहित पवार ने इस मामले में 'आपराधिक लापरवाही' का आरोप लगाते हुए विमान कंपनी VSR और DGCA के अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है. 

हालांकि, पुलिस द्वारा शिकायत दर्ज करने से इनकार किए जाने के बाद रोहित पवार ने आरोप लगाया है कि इस मामले को दबाने के पीछे कुछ 'ताकतवर हाथों' का हाथ हो सकता है.  इससे पहले, सुनेत्रा पवार ने मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर जांच CBI को सौंपने की मांग की थी, जबकि रोहित पवार ने दावा किया था कि केंद्र सरकार से जुड़े कुछ लोगों का इस कथित साज़िश में हाथ हो सकता है.

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रोहित पवार पहले मुंबई के मरीन ड्राइव पुलिस स्टेशन पहुंचे, जहां उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई. इसके बाद वे बारामती तालुका पुलिस स्टेशन गए और पुणे ग्रामीण के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के साथ दो घंटे तक चर्चा की. 

यह भी पढ़ें: महाराष्ट्र: बारामती थाने के बाहर धरने पर बैठे भतीजे रोहित, अजित पवार विमान क्रैश की जांच की मांग

पुलिस का तर्क है कि चूंकि महाराष्ट्र सीआईडी (CID) पहले से ही इस मामले की जांच कर रही है, इसलिए एक अलग FIR दर्ज करना समानांतर जांच शुरू करने जैसा होगा. इसके बाद रोहित पवार पुणे स्थित सीआईडी मुख्यालय पहुंचे और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ 90 मिनट तक बैठक की.

साजिश और 'ताकतवर लोगों' का जिक्र
मीडिया से बात करते हुए रोहित पवार ने कहा, 'गंभीर मामला होने के बावजूद पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कर रही है. विमान कंपनी और नियामक अधिकारियों की भूमिका की जांच जरूरी है. जब पुलिस मना करती है, तो संदेह पैदा होता है कि पर्दे के पीछे कुछ प्रभावशाली लोग शामिल हैं. सच सामने आना ही चाहिए.' 

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दूसरी ओर, सीआईडी अधिकारियों का कहना है कि 28 जनवरी को बारामती में हुए हादसे की जांच धारा 194 के तहत तेजी से चल रही है. जांच में इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई 'सबोटॉज' (तोड़फोड़), आपराधिक लापरवाही या बड़ी साजिश थी. 

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अधिकारियों ने बताया कि कई एजेंसियों की रिपोर्ट का इंतजार है और केस को सीबीआई (CBI) को सौंपने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है. फिलहाल, इस हाई-प्रोफाइल मामले ने महाराष्ट्र की सियासत में हलचल पैदा कर दी है.

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