नासिक TCS केस में निदा खान समेत चार आरोपियों के खिलाफ1500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल, SIT ने पेश किए अहम सबूत

नासिक TCS केस में SIT ने चार आरोपियों के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है. मामला मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाली महिला से छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, धर्मांतरण प्रयास और धार्मिक भावनाएं आहत करने से जुड़ा है. पुलिस ने 9 मामलों की जांच के बाद कई डिजिटल और दस्तावेजी सबूत पेश किए हैं.

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TCS केस में चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल. (Photo: ITG) TCS केस में चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नासिक,
  • 22 मई 2026,
  • अपडेटेड 9:05 PM IST

महाराष्ट्र के नासिक में TCS केस मामले में SIT ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों के खिलाफ 1500 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है. यह मामला एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत महिला की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पुलिस के अनुसार इस पूरे मामले में अब तक कुल 9 केस दर्ज किए गए हैं. ये मामले देवलाली कैंप पुलिस स्टेशन और मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज हुए हैं. शिकायत में छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण की कोशिश और धार्मिक भावनाएं आहत करने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.

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इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नासिक पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक के आदेश पर SIT का गठन किया गया था. SIT ने लंबी जांच के बाद चार मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इनमें दानिश इजाज शेख, तौसीफ बिलाल अत्तार, निदा इजाज खान और मतीन माजिद पटेल के नाम शामिल हैं.

पुलिस ने बताया कि यह मामला एक आपराधिक साजिश के तहत अंजाम दिया गया था. जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने मिलकर पीड़िता को निशाना बनाया और कई स्तरों पर उसे प्रताड़ित किया. इस केस में पुलिस ने 17 गवाहों के बयान दर्ज किए हैं. ये बयान प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष BNSS की धारा 183 के तहत दर्ज किए गए हैं. इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट भी जांच का अहम हिस्सा बनी है, जिसमें पीड़िता और आरोपियों की मेडिकल जांच शामिल है.

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SIT जांच में सामने आए छेड़छाड़ और धर्मांतरण के गंभीर आरोप
 

पुलिस को जांच के दौरान धर्मांतरण से जुड़े सबूत भी मिले हैं. आरोप है कि पीड़िता को जबरन धर्म बदलने के लिए दबाव डाला गया और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई गई. इसके साथ ही तकनीकी और डिजिटल सबूत भी पुलिस के हाथ लगे हैं. इसमें व्हाट्सएप चैट्स के स्क्रीनशॉट, ईमेल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल ट्रेल शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि ये सबूत आरोपियों की भूमिका को मजबूत करते हैं.

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने पीड़िता के नाम और पहचान बदलने के लिए उसके मूल दस्तावेज अपने पास रख लिए थे. पुलिस ने ये दस्तावेज जब्त कर लिए हैं. इसके अलावा बैंक लेनदेन, जाति प्रमाण पत्र, वाहन से जुड़े दस्तावेज और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य भी जांच में शामिल किए गए हैं.

पुलिस ने बताया कि यह अपराध एक संगठित तरीके से किया गया था और इसमें आर्थिक धोखाधड़ी और पहचान बदलने जैसे पहलू भी शामिल हैं. मामले की जांच अभी जारी है और पुलिस ने संकेत दिया है कि आगे और सबूत मिलने पर पूरक चार्जशीट भी दाखिल की जाएगी.

नासिक पुलिस ने 17 गवाहों के बयान किए दर्ज

इसके साथ ही मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज 8 अन्य मामलों की भी जांच चल रही है. पुलिस ने कहा है कि इन मामलों को भी समय सीमा के भीतर अदालत में पेश किया जाएगा. अदालत ने इस पूरे मामले में आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं. फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की सुनवाई विशेष अदालत में चल रही है. इस केस ने नासिक में बड़ा सामाजिक और कानूनी विवाद खड़ा कर दिया है. पुलिस की SIT जांच और चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामला अदालत में आगे बढ़ चुका है, जहां आने वाले समय में सुनवाई के दौरान और तथ्य सामने आ सकते हैं.

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