मराठा आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल की तबीयत अचानक बिगड़ गई है. कड़ी धूप में अनशन पर बैठने की वजह से उन्हें छत्रपति संभाजी नगर के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया. दरअसल, पाटिल का आरोप है कि सरकार मराठा समाज से किए गए वादे पूरे करने में लगातार टालमटोल कर रही है, इसी के खिलाफ उन्होंने यह मोर्चा खोला था.
मनोज जरांगे ने हाल ही में अपनी मांगों को लेकर अनशन शुरू किया था. हालांकि, यह आंदोलन करीब 15 घंटे के भीतर खत्म हो गया. इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत खराब होने लगी. अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच की, जिसमें डिहाइड्रेशन की पुष्टि हुई. उनकी सेहत की जानकारी देते हुए डॉक्टर विनोद चावरे ने बताया कि तेज धूप में लगातार अनशन पर बैठने की वजह से मनोज जरांगे को सीवियर डिहाइड्रेशन हो गया था. उन्हें उल्टियां हो रही थीं और चक्कर भी आ रहे थे. इसी वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है.
15 घंटे में कैसे खत्म हुआ आंदोलन?
अस्पताल में पाटिल की सेहत का हाल जानने भाजपा नेता प्रसाद लाड पहुंचे. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बड़ा खुलासा किया कि पहले कई महीनों तक चलने वाला यह आंदोलन इस बार महज 15 घंटे में कैसे खत्म हो गया. लाड के मुताबिक, पहले सरकार तथा आंदोलनकारियों के बीच बातचीत का थोड़ा गैप था. मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री के निर्देश पर उन्होंने पाटिल के साथ अहम बैठक की, जिससे आपसी संवाद का यह अंतर खत्म हो गया. जब समाज की जायज मांगें मान ली गईं, तो पाटिल ने भी बिना किसी जिद के अपना अनशन खत्म कर दिया.
चुनाव आचार संहिता के दौरान सरकारी आदेश (GR) में बदलाव करने के सवाल पर भाजपा नेता ने स्थिति साफ की. उन्होंने कहा कि साल 2025 का मूल सरकारी आदेश पहले ही जारी हो चुका है. अब सिर्फ उसमें सुधार या नया सर्कुलर आना बाकी है, जिस पर चुनावी पाबंदियों का नियम लागू नहीं होता. फिर भी एहतियात के तौर पर सोमवार को चुनाव आयोग से मिलकर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
राज्य में लागू चुनाव आचार संहिता और सरकारी आदेश में बदलाव को लेकर भी भाजपा नेता ने स्थिति साफ की. उन्होंने भरोसा दिया कि साल 2025 का मूल आदेश पहले ही आ चुका है, इसलिए तकनीकी सुधारों पर कोई रोक नहीं लगती, फिर भी सोमवार को चुनाव आयुक्त से इस पर अंतिम सलाह ली जाएगी. इसके अलावा, उन्होंने नाराज ओबीसी नेताओं को समझाते हुए कहा कि सरकार पाटिल को कोई नया हक नहीं दे रही, बल्कि विधानसभा के पटल पर पहले से तय पुराना वादा ही पूरा कर रही है.
इसरारउद्दीन चिश्ती