महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले में एक कथित हत्या का मामला उस समय पूरी तरह उलझ गया, जब जिस युवती को मृत मानकर उसके पिता और भाई को गिरफ्तार किया गया था, वह खुद पुलिस के सामने जिंदा पहुंच गई. इस घटनाक्रम ने पुलिस जांच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब जंगल में मिली अज्ञात महिला की लाश की पहचान सबसे बड़ी चुनौती बन गई है.
जंगल में मिली थी महिला की अधजली लाश
दरअसल, कुछ दिन पहले बुलढाणा जिले के एक जंगल में एक महिला का आधा जला हुआ शव दो हिस्सों में बरामद हुआ था. शुरुआती जांच में पुलिस को संदेह हुआ कि शव शिवानी नामक युवती का है. इसी आधार पर जलगांव जामोद पुलिस ने शिवानी के पिता बापुराम नत्थू कलमेकर और उसके भाई के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया था.
मामले में तब बड़ा मोड़ आया, जब शिवानी स्वयं पुलिस के सामने उपस्थित हो गई. उसने साफ कहा कि वह जीवित है और उसके पिता तथा भाई को तुरंत रिहा किया जाए. युवती को जिंदा देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए. इसके बाद अदालत में पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई, जिसके आधार पर न्यायिक हिरासत में भेजे गए पिता और पुत्र को रिहा कर दिया गया.
भाई और पिता ने क्यों कबूली मर्डर की बात?
रिहाई के बाद मीडिया से बातचीत में शिवानी के पिता बापुराम कलमेकर ने कहा कि उन्होंने गुस्से में आकर हत्या का आरोप अपने ऊपर ले लिया था. उनका कहना था कि उनकी बेटी बार-बार घर छोड़कर चली जाती थी, जिससे वे बेहद परेशान थे. इसी नाराजगी में उन्होंने पुलिस के सामने ऐसा बयान दे दिया, जबकि वास्तविकता कुछ और थी.
बापुराम ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस ने उनसे किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की थी. उन्होंने स्वयं आवेश में आकर गंभीर आरोप स्वीकार किए थे. हालांकि, शिवानी के जीवित मिलने के बाद पूरा मामला नई दिशा में पहुंच गया है.
बेटी जिंदा है तो लाश किसकी थी?
इस बीच, जिस महिला का शव जंगल से बरामद हुआ था, उसकी पहचान अब तक नहीं हो सकी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए बुलढाणा के पुलिस अधीक्षक नीलेश तांबे ने जांच से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों को मुख्यालय से अटैच कर दिया है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जंगल में मिली महिला कौन थी और उसकी हत्या किसने की. इस रहस्य से पर्दा उठना अभी बाकी है, जबकि पुलिस अब अज्ञात महिला की पहचान और उसके हत्यारों की तलाश में जुटी हुई है.
ज़का खान