मध्य प्रदेश: स्टेशन का नाम उर्दू में लिखा होने पर विवाद, रेलवे ने पोत दिया पीला रंग

इंदौर-उज्जैन के बीच रेल लाइन चौड़ीकरण के बाद चिंतामन रेलवे स्टेशन को नए सिरे से तैयार किया गया है. रेलवे स्टेशन के नाम का जो बोर्ड है उसमें हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू में स्टेशन का नाम लिखा गया था. उर्दू में लिखे नाम पर आवाहन अखाड़े के महामंडलेश्वर आचार्य शेखर द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी.

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इसी बोर्ड में लिखे उर्दू नाम पर हुआ है विवाद इसी बोर्ड में लिखे उर्दू नाम पर हुआ है विवाद

रवीश पाल सिंह

  • उज्जैन,
  • 05 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 8:11 PM IST
  • एमपी के चिंतामन रेलवे स्टेशन पर हुआ है विवाद
  • हिंदी, अंग्रेजी के साथ ही उर्दू में लिखा था नाम
  • उज्जैन के धार्मिक नगरी होने के कारण उर्दू नाम पर विवाद
  • रेलवे ने कहा गलती से लिखा था नाम, कर दिया सुधार

मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में बना नया चिंतामन रेलवे स्टेशन उदघाटन से पहले ही सुर्खियों में है. चिंतामन गणेश मंदिर के सामने बने स्टेशन की पट्टिका पर उर्दू में स्टेशन का नाम लिखा होने पर विवाद खड़ा हो गया. मामले पर विवाद बढ़ने लगा तो रातों-रात उर्दू में लिखे नाम पर पीला रंग पोत दिया गया. 

दरअसल, इंदौर उज्जैन के बीच रेल लाइन चौड़ीकरण के बाद चिंतामन रेलवे स्टेशन को नए सिरे से तैयार किया गया है. रेलवे स्टेशन के नाम का जो बोर्ड है उसमें हिंदी, अंग्रेज़ी और उर्दू में स्टेशन का नाम लिखा गया था. उर्दू में लिखे नाम पर आवाहन अखाड़े के महामंडलेश्वर आचार्य शेखर द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी और उर्दू नाम हटाने की मांग की थी. आचार्य शेखर के अनुसार उज्जैन महाकाल की नगरी है और यह भगवान कृष्ण की शिक्षा स्थली है. यहां भगवान ने अध्ययन किया है और समस्त देवी देवता भी यहां अध्ययन करने आते हैं. यह बहुत ही पवित्र और धार्मिक नगरी है क्योंकि यहां पर संस्कृत भाषा और विद्वान लोग रहते हैं तो इस स्थिति में कहीं उर्दू शब्द का इस्तेमाल करना उचित नहीं है. 

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उर्दू वाला हिस्सा रेलवे ने पीले रंग से पोत दिया

आचार्य शेखर ने कहा था कि 'उज्जैन में संस्कृत और हिंदी भाषी लोग रहते हैं तो यहां संस्कृत और हिंदी में नाम लिखिए ताकि यहां की पवित्रता बनी रहे. चिंतामन गणेश मंदिर के नाम से एक प्लेटफार्म बना है उसका नाम उर्दू में लिखा गया तो हम लोग कोई पाकिस्तान या बांग्लादेश में थोड़ी रहते हैं जो उर्दू को सहन करेंगे. ये कोई मौलानाओं का देश नहीं है, यह हिंदुओं का देश है, यह साधु संतों का देश है. हम इसे भारत माता कहते हैं. उर्दू और फारसी मुगलों की भाषा है इसलिए मध्य प्रदेश में हम उर्दू नहीं चलने देंगे.''

गलती से उर्दू में लिख दिया था नाम- रेलवे

इस बारे में आजतक से बात करते हुए रतलाम मंडल के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी जितेंद्र कुमार जयंत ने बताया कि 'पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल पर उज्जैन के पास जो चिंतामन स्टेशन है, उस स्टेशन पर गलती से नाम उर्दू में लिख गया था. क्योंकि भारतीय रेलवे पर अधिसूची है जिस पर स्टेशनों का नाम किस तरह से लिखा जाए वह उसमें मेंशन है, उसके मुताबिक चिंतामन का नाम केवल हिंदी और इंग्लिश में ही लिखा जाना था. लेकिन ये नाम गलती से उर्दू में लिख गया था तो रेल प्रशासन ने उसे हटा दिया है और जो रूल के मुताबिक है आज की डेट में स्टेशन का नाम वही कर दिया गया है'. 

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