ट्रंप के टैरिफ और मिडिल ईस्ट के युद्ध का झारखंड की टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर गहरा असर पड़ा है. यहां कपड़ा उद्योग के 2400 रोजगार पर ग्रहण लग गया है. संस्था दो महीनों से वेतन नहीं दे रही है और इसी से नाराज कर्मचारी नोएडा प्रोटेस्ट की तर्ज पर सड़कों पर आंदोलन करने के लिए उतर आए हैं.
दरअसल रांची के खेलगांव स्थित ओरिएंट क्राफ्ट फैशन इंडस्ट्रीज लिमिटेड में कर्मचारियों को पिछले दो महीने से वेतन नहीं मिलने का दावा है. ऐसे में नाराज महिला कर्मचारियों का गुस्सा मंगलवार को फूट पड़ा. बड़ी संख्या में महिला कर्मियों ने काम करने से इनकार करते हुए प्लांट गेट के सामने जोरदार प्रदर्शन किया.
खेलगांव थाना प्रभारी अभिषेक राय ने बताया कि प्लांट गेट पर महिलाओं के प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया. स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में कर लिया गया और ट्रैफिक पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा.
इस फैक्ट्री में कुल 2400 कर्मचारी हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत महिलाएं हैं. महिला कर्मी वेतन भुगतान से पहले काम शुरू करने को तैयार नहीं हैं. एहतियात के तौर पर प्लांट परिसर के आसपास पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है, ताकि किसी भी हिंसत घटना को रोका जा सके.
टैरिफ की मार झेल रही कंपनी!
मुख्यमंत्री रघुवर दास की पहल पर रांची के खेलगांव में ओरिएंट क्राफ्ट को स्थापित किया गया था. इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाओं को रोजगार मिला. कोरोना काल के दौरान ऑर्डर नहीं मिलने से कंपनी के उत्पादन पर असर पड़ा था. पिछले दिनों अमेरिका के टैरिफ बढ़ाए जाने की वजह से निर्यात में भारी गिरावट आई और प्रोडक्शन पर असर पड़ा. इस प्लांट में अमेरिका के लिए द क्रू, पोलो और डिक्स के रेडीमेड गारमेंट भी तैयार किए जाते हैं.
ओरिएंट क्राफ्ट के DGM HR रवि भूषण का कहना है कि अमेरिका पहले 13%टैरिफ लेता था. लेकिन अब वो 50% बढ़कर 63% पर जा पहुंचा है. एक्सपोर्ट का 80% हिस्सा अमेरिका जाता है, ऐसे में व्यापार और व्यवसाय पर बुरा असर पड़ा है. कंपनी फिर भी सर्वाइवल के कोशिश में है.
यह भी पढ़ें: हरियाणा में जब सैलरी बढ़ गई तो फरीदाबाद में नोएडा जैसा प्रोटेस्ट क्यों? सामने आई वजह
उन्होंने बताया कि पहले राज्य सरकार भी टेक्सटाइल पॉलिसी के तहत हर कर्मचारी पर 6000 रुपए अपनी तरफ से देती थी, जिससे काफी सहूलियत थी. लेकिन अब टेक्सटाइल पॉलिसी के दो साल पहले लैप्स कर जाने से वो 6000 रुपए जो कर्मचारियों के लिए आता था, वो कंट्रीब्यूशन भी बंद है.
कंपनी ने कर्मचारियों को जारी किया नोटिस
मिडिल ईस्ट में युद्ध की वजह से एक्सपोर्ट पर असर पड़ा है और कंपनी कई मोर्चों पर घिर गई है. इधर हंगामे के बाद प्लांट पहुंचे लेबर सुपरिटेंडेंट इतवारी महतो और उदय ने बताया कि आखिर किस हालात में महिला कर्मचारियों को सड़कों पर उतरना पड़ा. इसे लेकर कंपनी को नोटिस जारी किया गया है और बुधवार को वार्ता भी होगी.
आंदोलन कर रही गायत्री ने बताया कि घर के हालात को सुधारने और परिवार को सपोर्ट करने के लिए वो घर से नौकरी करने आई. धनबाद में ससुराल है और हजारीबाग में मायका. स्किल ट्रेनिंग के बाद उन्हें 13000 हजार का वेतन मिलता है. उनका काम एंब्रॉयडरी का है, लेकिन वेतन नहीं मिलने से खाना तक का मुश्किल हो चुका है. साथ ही मकान का किराया भी नहीं जुट रहा है.
महंगाई से तंग कर्मचारी
गायत्री ने बताया कि कंपनी उनसे पीस रेट के हिसाब से काम ले रही है. यानी जितने कपड़े एक्सपोर्ट के लिए वो बना पाएंगी, उतना ही पैसा मिलेगा. ऐसे में न्यूनतम मजदूरी से भी वो कम हो जाएगा. गैस के दाम और आसमान छूती महंगाई में आखिर वो कैसे जी पाएंगी और परिवार का पालन कर पाएंगी.
सभी ने इससे मिलती-जुलती कहानी ही बयां की. किसी का घर लोहरदगा में है तो कोई पलामू से काम करने आया है. अप्रैल का वेतन मिला भी तो 15 दिनों का, पीस रेट के हिसाब से किसी को 2500 रुपये तो किसी को सिर्फ 4000 हजार रुपए मिले. आखिर ऐसे में वो खाए क्या और जीएं कैसे ये चिंता उन्हें सता रही है.
यह भी पढ़ें: TCS विवाद के बीच लखनऊ में प्रदर्शन, सड़कों पर उतरा बजरंग दल, लगाए ‘हिंदू एकता जिंदाबाद’ के नारे
यहां बड़े-बड़े ब्रांड जैसे पोलो, जॉकी, मार्क्स एंड स्पेंसर , अमेरिकन ईगल , नेक्स्ट और कई ब्रांड के ऑर्डर कंपनी को मिलते थे, जिसमें काफी कमी आई है. कंपनी के अंदर सब कुछ ऑटोमेटेड तरीके से होता है. स्टेट ऑफ द आर्ट मशीन लगी हुई जिससे पूरा ऑर्डर एक्सपोर्ट के लिए केटर और सर्वे होता है.
सत्यजीत कुमार