‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ में एक और खुलासा, सिस्टर ने कबूला- तीन बच्चे पैसे लेकर बेचे

रांची के एसएसपी अनीश गुप्ता ने बताया कि इस मामले में गिरफ्तार सिस्टर कंसोलिया ने पुलिस के सामने अपना अपराध कबूला है और साफ कहा है कि उसने पैसे लेकर तीन बच्चों को खरीददारों को बेचा था जिनकी पुलिस बरामदगी कर चुकी है.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

राहुल विश्वकर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2018,
  • अपडेटेड 12:06 AM IST

रांची में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ से जुड़े एक होम से बच्चों की बिक्री के मामले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. अब मिशनरी ऑफ चैरिटीज की गिरफ्तार सिस्टर कंसोलिया ने स्वीकार किया है कि उसने चैरिटीज के बालाश्रय से तीन बच्चों को पैसे लेकर बेचा और एक बच्चे को बिना पैसे लिए ही किसी को दे दिया.

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक रांची के एसएसपी अनीश गुप्ता ने बताया कि इस मामले में गिरफ्तार सिस्टर कंसोलिया ने पुलिस के सामने अपना अपराध कबूला है और साफ कहा है कि उसने पैसे लेकर तीन बच्चों को खरीददारों को बेचा था जिनकी पुलिस बरामदगी कर चुकी है.

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उसने बताया कि एक बच्चे को उसने बिना पैसे लिये ही किसी को दिया था. पुलिस चौथे बच्चे का पता लगाने में जुटी है. इस बीच पुलिस की पूछताछ का एक वीडियो भी मीडिया के सामने सोशल मीडिया के माध्यम से आया है जिसमें सिस्टर अपना अपराध कबूल कर रही है. इसके विपरीत मिशनरी के बिशप इस मामले में सिस्टर का हाथ होने से इनकार कर रहे थे.

इससे पूर्व रांची के नगर पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने बताया कि मिशनरी से बेचे गये चौथे बच्चे का अब तक पता नहीं चल सका है लिहाजा उसका पता लगाने और इस पूरे कांड में शामिल रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने सिस्टर कंसोलिया और इंदवार को कल शाम रिमांड पर लिया.

इन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ करने का आवेदन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट स्वयंभू की अदालत में दिया गया था जो उन्होंने स्वीकार कर लिया. कुमार ने बताया कि दोनों को पुलिस ने वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर कल शाम रिमांड पर लिया था. पुलिस इस मामले में बेचे गये तीन बच्चों को पहले ही बरामद कर चुकी है.

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इससे पूर्व गुरुवार को इंडियन बिशप्स कांफ्रेंस के महासचिव बिशप थियोडोर मैस्करेनहास ने यहां दावा किया था कि मदर टेरेसा की बच्चों की खरीद-फरोख्त से जुड़े हाल में उजागर हुए रैकेट में बिल्कुल भी शामिल नहीं है और यदि कोई एक सिस्टर इस मामले में दोषी भी है तो उसकी गलती के लिए पूरी मिशनरी को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए.

बिशप मैस्करेनहास ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा था, ‘‘मिशनरीज आफ चैरिटीज बच्चों के बेचने के मामले में बिलकुल भी शामिल नहीं है. वैसे तो इस मामले में गिरफ्तार सिस्टर कंसीलिया ने भी अपने वकील को बताया था कि वह बच्चों को बेचने में कहीं से भी शामिल नहीं है. उससे पुलिस ने दबाव में यह बयान लिया है कि उसने बच्चों को बेचा था.’’

बिशप के दावों का खंडन करते हुए रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनीश गुप्ता ने पहले ही कहा था, ‘‘ इंडियन बिशप्स कांफ्रेंस के महासचिव बिशप थियोडोर मैस्करेनहास द्वारा दिया गया बयान पूरी तरह से गलत और बेबुनियाद है. पुलिस ने बच्चों को बेचे जाने के मामले में मिशनरी आफ चैरिटीज की सिस्टर कंसीलिया को गिरफ्तार करने के बाद उसके बयान और उससे मिली सूचनाओं के आधार पर ही चार बच्चों में से तीन को विभिन्न स्थानों से छापे मारकर हासिल किया है और बचाया है. ऐसे में यह बात कैसे सही हो सकती है कि सिस्टर से पुलिस दबाव में बयान लिया गया है?’’

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