झारखंडः बिहार के कद्दावर नेताओं के बूते चुनावी रण में उतरेंगी बड़ी पार्टियां

झारखंड में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होना है. राज्य में चुनावी रण जीतने के लिए सभी प्रमुख दलों को बिहार के उनके कद्दावर नेताओं का ही आसरा है.

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नीतीश कुमार-तेजस्वी यादव (फाइल फोटो) नीतीश कुमार-तेजस्वी यादव (फाइल फोटो)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अगस्त 2019,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

झारखंड में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होना है. राज्य में चुनावी रण जीतने के लिए सभी प्रमुख दलों को बिहार के उनके कद्दावर नेताओं का ही आसरा है. इसमें प्रदेश की सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी शामिल है, जो बिहार में राजग गठबंधन में शामिल है. झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं.

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और सत्ताधारी जद (यू) के झारखंड इकाई के नेताओं को आगामी चुनाव में अपने बिहार के आकाओं के सहारे की जरूरत होगी. लिहाजा, उन्हें उनकी ही रणनीति पर भरोसा है. बिहार के ये तीनों दल बिहार के अनुभवी नेताओं को झारखंड राज्य प्रभारी नियुक्त कर इसके स्पष्ट संदेश दे दिए हैं.

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जद (यू) अकेले दम पर लड़ेगी चुनाव

बिहार में भाजपा के साथ मिलकर सरकार चला रही जद (यू) पहले ही झारखंड में अकेले दम पर सभी विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है. झारखंड में पार्टी को मजबूत करने के लिए बिहार सरकार में मंत्री रामसेवक सिंह को वहां का प्रभारी नियुक्त किया है.

रामसेवक सिंह ने आईएएनएस को बुधवार को बताया कि इस साल झारखंड में होने वाले चुनाव में जद (यू) पूरी ताकत से उतरेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी झारखंड में सदस्यता अभियान जोरशोर से चला रही है. अभी तक 50 हजार से अधिक सदस्य बन चुके हैं.

उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी 25 अगस्त को झारखंड का दौरा कर रांची में अपने कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे और उनमें जोश भरेंगे. उनका दावा है कि उन्होंने सभी जिलों का दौराकर लोगों से मुलाकात की और चुनाव की रूपरेखा पर विचार किया है.

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बीजेपी का मूलमंत्र 'इस बार 65 पार'

बिहार में अपनी सहयोगी पार्टी जद (यू) की तरह भाजपा ने भी बिहार के प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभाल चुके और वर्तमान सरकार में पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव को झारखंड का चुनाव सह-प्रभारी बनाकर पार्टी को फिर से झारखंड में सत्तारूढ़ करने की जिम्मेदारी सौंपी है.

नंदकिशोर यादव ने हाल ही में झारखंड में कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर 'इस बार 65 पार' का मूलमंत्र दिया है. नंदकिशोर झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत तय मानकर चल रहे हैं. उन्होंने कहा, 'इस बार हमें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारे खिलाफ कौन लड़ रहा है. विधानसभा चुनाव में जीत के लिए केंद्र व राज्य सरकार के कामकाज और कार्यकर्ताओं की ताकत ही पर्याप्त है.'

उन्होंने विश्वास जताया कि झारखंड में भाजपा आसानी से 65 प्लस का लक्ष्य हासिल करेगी. उन्होंने कहा कि ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) गठबंधन का हिस्सा रहेगा, लोकसभा चुनाव में भी आजसू हमारे साथ था.

झारखंड में राजद की अपनी पहचान

बिहार की मुख्य विपक्षी पार्टी राजद भले ही इस साल हुए लोकसभा चुनाव में झारखंड में खाता नहीं खोल सकी है, लेकिन साल के अंत में होने वाले झारखंड विधानसभा चुनाव में दमखम से चुनाव लड़ने की घोषणा की है.

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राजद ने पूर्व केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव को राज्य प्रभारी नियुक्त किया है. झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष अभय कुमार सिंह कहते हैं कि राजद महागठबंधन के साथ झारखंड विधानसभा चुनाव में उतरेगी और पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि बिहार से सटे झारखंड के सभी क्षेत्रों में राजद की अपनी पहचान रही है. उन्होंने कहा कि कई विधानसभा क्षेत्रों में राजद अन्य सभी दलों से मजबूत स्थिति में है.

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