गुजरात सरकार का सामान्य श्रेणी पर दांव, शुरू की वित्तीय सहायता योजनाएं

पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की 25 अगस्त से प्रस्तावित भूख हड़ताल से पहले गुजरात सरकार ने सवर्णों आर्थिक लाभ मुहैया कराने का फैसला किया है.

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विजय रुपाणी विजय रुपाणी

वरुण शैलेश

  • अहमदाबाद,
  • 11 अगस्त 2018,
  • अपडेटेड 5:19 AM IST

गुजरात सरकार ने सवर्ण समाज पर दांव लगाया है. राज्य की विजय रुपाणी की सरकार ने आरक्षण का लाभ नहीं पाने वाले सामान्य श्रेणी के आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के छात्रों एवं युवा उद्यमियों के लिए शुक्रवार को विभिन्न योजनाओं की घोषणा की. बता दें कि पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल की 25 अगस्त से प्रस्तावित भूख हड़ताल से पहले राज्य सरकार ने यह घोषणा की है.

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'आर्थिक रूप से पिछड़ी' श्रेणी में उन लोगों को माना जाएगा जिनके परिवार की आय तीन लाख रुपए प्रतिवर्ष से ज्यादा नहीं हो. भाजपा सरकार द्वारा गठित गुजरात अनारक्षित शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास निगम की ओर से यह योजनाएं तैयार की गई हैं. उप-मुख्यमंत्री नितिन पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने इन योजनाओं को मंजूरी दी है.

योजनाओं के मुताबिक, स्व-वित्तपोषित मेडिकल, इंजीनियरिंग, फार्मेसी, नर्सिंग, वास्तुकला एवं अन्य तकनीकी पाठ्यक्रमों में दाखिला चाह रहे छात्रों को अनारक्षित शैक्षणिक एवं आर्थिक विकास निगम चार फीसदी की ब्याज दर पर 10 लाख रुपये तक का कर्ज देगा.

इन कर्जों के लिए आवेदन करने वाले छात्र से होने चाहिए और उनके परिवार की आय सालाना तीन लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.

अनारक्षित शैक्षणिक एवं विदेशों में उच्च शिक्षा हासिल करना चाह रहे छात्रों को चार फीसदी ब्याज दर पर 15 लाख रुपए तक का शैक्षणिक कर्ज मुहैया कराएगा। इसके लिए परिवार की सालाना आय 4.5 लाख रुपए से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा भी युवाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं. पटेल ने कहा कि इन योजनाओं से समाज के बड़े वर्ग को लाभ मिलेगा.

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