गुजरात से एक ऐसी खबर आई हे जिससे गुजरात के आरोग्य सेवा पर सवाल खड़े हुए हैं. बनासकांठा के दांता सरकारी अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ़ की बड़ी लापरवाही का मामला देखने को मिला है. यहां ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए आई एक महिला मरीज को एक्सपायर हो चुकी ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी गई, जिससे उसके शरीर में रिएक्शन और सूजन हो गई. शाम को प्राइवेट हॉस्पिटल बंद होने की वजह से परिवार वालों ने महिला को दांता सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था. परिवार वालों का आरोप है कि उस समय हॉस्पिटल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और नर्सिंग स्टाफ अपने मोबाइल फोन में बिजी था. महिला को ग्लूकोज़ की बोतल देने के बाद जब परिवार वालों ने बोतल देखी तो वह एक्सपायर हो चुकी थी.
साथ ही आरोप है कि नर्स आधे घंटे तक गायब रही. परिवार वालों के मुताबिक, एक्सपायर बोतल चढ़ाने के बाद नर्स करीब 30 मिनट तक गायब रही. मरीज की तबीयत बिगड़ने पर परिवार वाले गुस्से में आ गए और सवाल उठाया कि अगर इस लापरवाही की वजह से मरीज़ की मौत हो जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?
हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने मानी गलती
इस पूरे मामले में दांता CHC सेंटर के सुपरिटेंडेंट डॉ. के. के. सिंह ने माना है कि हॉस्पिटल से गलती हुई है. उन्होंने कहा कि मरीज को सिर्फ 100 ml की ग्लूकोज की बोतल दी गई थी, जिससे कोई सीरियस साइड इफेक्ट नहीं हुआ और मरीज की हालत अभी स्टेबल है.
हर महीने चेकिंग के बावजूद गलती
सुपरिटेंडेंट ने आगे कहा कि वैसे तो हॉस्पिटल में हर महीने की 1 तारीख को एक्सपायरी डेट की दवाइयों और बोतलों की चेकिंग होती है, लेकिन यह एक बोतल चेकिंग से छूट गई. नाइट ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्स के खिलाफ शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा. साथ ही हॉस्पिटल टाइम में मोबाइल इस्तेमाल करने वाली नर्स के खिलाफ भी सख्त एक्शन लिया जाएगा. हॉस्पिटल स्टाफ के साथ एक अर्जेंट मीटिंग की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए ज़रूरी इंस्ट्रक्शन दिए जाएंगे.
Input: शक्तिसिंह परमार जगतसिंह
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