मलबे में तब्दील हॉस्टल, काले पेड़... अहमदाबाद प्लेन क्रैश का एक साल, आज भी कुछ नहीं बदला!

अहमदाबाद प्लेन क्रैश को आज गुरुवार को एक साल पूरा हो गया है. क्रैश साइट पर आज भी सन्नाटा पसरा है. एक साल पहले जो स्थिति थी, उसमें कोई बदलाव नहीं आया है. पढ़ें क्रैश साइट से आजतक की 'आंखों देखी'.

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प्लेन क्रैश साइट पर पीड़ितों ने अपनों को श्रद्धांजलि दी (Photo- ITG) प्लेन क्रैश साइट पर पीड़ितों ने अपनों को श्रद्धांजलि दी (Photo- ITG)

ब्रिजेश दोशी

  • अहमदाबाद,
  • 12 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:04 PM IST

12 जून, 2025 को दोपहर 1:39 बजे, अहमदाबाद से लंदन जा रहा एयर इंडिया का विमान अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. एयरपोर्ट से उडान भरने के बाद तुरंत ही सिविल हॉस्पिटल की होस्टल बिल्डिंग पर यह प्लेन जा गिरा था. इस भीषण दुर्घटना में देश और विदेश के 200 से अधिक यात्रियों की जान चली गई. साथ ही होस्टल में मौजूद लोग भी जान गंवा बैठे थे. 

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आज गुरुवार को एक साल पूरा होने पर मृतकों के परिवार अपनों को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं. विमान दुर्घटनास्थल पर मृतकों के परिवारों ने एक साल पहले हुई इस भीषण दुर्घटना में खोए अपने परिजनों को याद किया. दुर्घटनास्थल पर आज भी इस घटना के अवशेष देखे जा सकते हैं.

आजतक की टीम जब विमान दुर्घटनास्थल पर पहुंची तो वहां पर बैरिकेडिंग की गई है. लोगों को और मीडिया को क्रैश साइट पर जाने के अनुमति नहीं है. सिविल हॉस्पिटल का हॉस्टल अतुल्यम-4 जर्जर अवस्था में अभी भी वैसै का वैसा ही है. दुर्घटनास्थल पर कदम रखते ही सुरक्षा गार्ड दिखते हैं, जो ध्यान रखते हैं कि क्रैश साइट पर अनाधिकृत व्यक्ति प्रवेश न कर पाए. वह तीन शिफ्टों में काम कर रहे हैं और उनकी जिम्मेदारी है कि कोई भी व्यक्ति यहां पर अंदर न जाए. 

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हॉस्टल के तीन अलग-अलग ब्लॉक पूरी तरह काले पड़ चूके हैं क्योंकि प्लेन का मलबा उनके उपर गिरा था, जो अभी भी टूटी-फूटी हालत में हैं. खुली या टूटी हुईं खिड़कियां और दरवाजे भी उसी हालत में हैं, जहां से हादसे के वक्त छात्र कूदकर भागे थे. हॉस्टल कैंपस में झाड़ियां उग चुकी हैं. वहीं पर कुछ पेड़ भी दिखाई दिए, जो हादसे की भयावहता की गवाही देते हैं. उस समय ये पेड़ पूरी तरह जल गए थे, केवल उनके तने ही बचे थे. लेकिन बारिश के बाद उनमें नए पत्ते निकल आए हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि इस दुखद घटना ने न केवल मनुष्यों को, बल्कि जानवरों, पक्षियों और पेड़ों सहित प्रकृति को भी गहरा आघात पहुंचाया है. हादसे के वक्त वहां मौजूद पशु-पक्षी भी इंसानों के साथ जलकर खाक हो गए थे.

मृतकों के परिजनों द्वारा दुर्घटनास्थल पर अपनों को श्रद्धांजलि देने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया गया. शाहिबाग घोड़ा कैंप रोड पर मेंटल विंग के पास एक पेड़ के नीचे चाय की केतली पकड़े बैठी सीताबेन पटनी के 15 वर्षीय बेटे आकाश पटनी की इस घटना में झुलसकर मौत हो गई. उनकी मां और परिवार दुर्घटनास्थल पर उन्हें याद कर शोक मनाने पहुंचे. परिवार ने अपना 15 साल का बेटा गंवाया, जो अपनी चाय बेचने वाली मां को दोपहर का खाना देने आया था और हादसे में जिंदा जल गया. उसकी मां भी 35 प्रतिशत बर्न इंजरी के साथ आज भी जी रही हैं. 

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सुबह से ही अलग-अलग लोग क्रैश साइट पर आकर मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करके गए. इनमें ब्रिटिश हाईकमिशनर लिंडी केमरोन भी शामिल थीं, जिन्होंने साइट पर पहुंचकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी. अन्य पीड़ित परिवारों ने भी साइट पर पहुंचकर अपनों के खोने के दर्द के साथ श्रद्धांजलि दी. ये सभी लोग अब हादसे की रिपोर्ट आने का इंतजार करते हुए न्याय की मांग कर रहे हैं.

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