कोरोना: कैट का ऑनलाइन सर्वे, लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू के खिलाफ व्यापारी

दिल्ली के व्यापारियों ने बताया कि नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन से हालात में सुधार होते नहीं दिख रहा है. लगातार कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, और अर्धव्यवस्था दिनों दिन खराब हो रही है.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2021,
  • अपडेटेड 6:06 PM IST
  • 79.6 फीसद लोगों ने कहा कि वो अभी तक पिछले लॉकडाउन के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाए हैं
  • 83.4 फीसदी कारोबारियों ने माना कि दुकानें बंद करना कोरोना का समाधान नहीं है

देशभर में कोरोना की दूसरी लहर के चलते व्यापारियों को एक बार फिर लॉकडाउन का डर सताने लगा है. लॉकडाउन को लेकर देश में व्यापारी के संगठन कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स की ओर से एक ऑनलाइन सर्वे कराया गया. सर्वे में कारोबारी लॉकडाउन खिलाफ हैं. व्यापारियों का कहना है कि वो कोरोना को खत्म करने के लिए सरकार के नियमों और कानूनों के खिलाफ नहीं है, लेकिन कोरोना की लहर को कम करने के लिए सरकार को व्यापारियों के साथ मिलकर वेब व्यापार के समय को ऊपर नीचे करके कोरोना के संक्रमण को रोका जा सकता है.

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व्यापारियों की तरफ से किए गए इस ऑनलाइन सर्वे में कोरोना से निपटने के लिए कारोबारियों ने बाजार और सरकारी दफ्तरों से जुड़ी एक योजना भी बताई. व्यापारियों ने बताया कि नाइट कर्फ्यू और लॉकडाउन से हालात में सुधार होते नहीं दिख रहा है. लगातार कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, और अर्धव्यवस्था दिनों दिन खराब हो रही है.  

व्यापारियों का कहना है कि कोरोना के संक्रमण को रोकने का  कदम ऐसा होना चाहिए जिससे कोरोना से भी लड़ा जा सके और कारोबार-अर्थव्यवस्था भी चलती रहे.

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने ऑनलाइन सर्वे के बारे में जानकारी देते  हुए बताया कि 'कैट द्वारा कराये गए इस ऑनलाइन सर्वे में दिल्ली एवं देश के अलग राज्यों में 8277 लोगों ने भाग लिया और अपनी राय व्यक्त की है. ऑनलाइन सर्वे में कोविड एवं इससे रोकथाम को लेकर कुल 8 सवाल पूछे गए थे.

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ऑनलाइन सर्वे में 836 कारोबारियों ने माना है कि लॉकडाउन से व्यापारिक गतिविधियां विपरीत रूप से प्रभावी होंगी. वहीं एक अन्य सवाल के उत्तर में 77.8 फीसदी लोगों ने कहा कि बाज़ारों और सरकारी समेत अन्य कार्यालयों के समय में परिवर्तन से कोरोना संक्रमण को काफी हद तक रोका जा सकता है. सर्वे में 94.1 फीसद लोगों ने स्वीकार किया कि यदि कोरोना सेफ्टी प्रोटोकॉल सख्ती से अपनाये जाएं तो कोविड पर नियंत्रण भी हो सकता है और व्यापार भी जारी रखा जा सकता है. 

वहीं ऑनलाइन सर्वे में शामिल हुए 83.4 फीसदी कारोबारियों ने माना कि दुकानें बंद करना कोरोना का समाधान नहीं है. कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल की माने तो नाइट कर्फ्यू लगने से टाइम कम होता है और ऐसे में बाजारों में लोगों की भीड़ और तेजी से दुकानदारों की भीड़ बढ़ती है. जिससे कोरोना के मामलों में और इजाफा होता है. सरकार को हर व्यापार और ऑफिस सरकारी दफ्तरों के टाइमिंग को अलग-अलग बदलना चाहिए ताकि कोरोना संक्रमण को रोका जा सके.

2020 में मार्च के बाद जब लॉकडाउन लगाया गया था, उससे व्यापारी वर्ग को बड़ा नुकसान हुआ था. कारोबारियों की लेबर पलायन कर चुकी थी और कारोबार बंद थे ऐसे में इस ऑनलाइन सर्वे में 79.6 फीसद लोगों ने यह भी कहा कि वो अभी तक पिछले लॉकडाउन के नुकसान की भरपाई नहीं कर पाए हैं. ऐसे में लॉकडाउन लगना व्यापारियों की कमर तोड़ने की बराबर है. 

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सर्वे में 96.7 फीसदी कारोबारियों ने यह भी माना कि प्रशासन का सहयोग भी हमें करना चाहिए ताकि संक्रमण को रोका जा सके. इसके साथ ही कारोबारियों ने यह भी माना कि उनके यहां काम करने वाली लेबर को भी जल्द से जल्द कोरोना वैक्सीन का टीका लगाया जाए.

बात दें कि 5 अप्रैल से कोरोना के मामलों में महाराष्ट्र से लेकर देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना की रफ्तार दोगुनी तेजी से हो रही है. 5 अप्रैल तक देश की राजधानी दिल्ली में जहां 5 हजार मामले थे तो वहीं 11 अप्रैल तक यह मामले 10 हजार के आंकड़ा पार कर गए.

 

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