अब कुतुब मीनार की मस्जिद पर विवाद, इमाम का दावा- 'ASI ने बंद करवाई नमाज'

कुतुब मीनार की मस्जिद में नमाज पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने रोक लगा दी है. यहां पहले भी रोक लगाई गई थी. लेकिन 2016 में यहां फिर से नमाज पढ़ी जाने लगी थी.

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कुतुब मीनार (फाइल फोटो) कुतुब मीनार (फाइल फोटो)

अरविंद ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 24 मई 2022,
  • अपडेटेड 10:52 AM IST
  • यह मस्जिद मुगलों के वक्त की बताई जाती है
  • इमाम ने कहा कि 13 मई से वहां नमाज पर रोक है

कुतुब मीनार के मसले पर आज कोर्ट में सुनवाई होनी है. इससे पहले कुतुब मीनार की मस्जिद के इमाम शेर मोहम्मद ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि ASI ने कुतुब मीनार में नमाज पढ़ना बंद करवा दिया है. इमाम ने कहा कि 13 मई जुम्मा (शुक्रवार) से कुतुब मीनार में नमाज पढ़ना बंद करवा दिया गया है.

इमाम ने कहा कि 13 मई को एक गार्ड आया था, उसने बोला की ASI की टीम आई है जिसने मुझे बुलाया है. फिर ASI वालों ने मुझसे कहा कि आज से यहां नमाज नहीं पढ़ी जाएगी. हमने कहा की हम सिर्फ 4 लोग हैं हमें पढ़ने दें, बाकी बाहरी लोग नहीं आयेंगे, लेकिन उन्होंने कहा कि आज से यहां नमाज नहीं होगी. वजह पूछे जाने पर वे बोले कि ऊपर से ऑर्डर आया है.

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2016 में दोबारा शुरू हुई थी नमाज

बता दें कि कुतुब मीनार के मुख्य गेट के दाएं तरफ बनी एक मुगलकालीन छोटी मस्जिद में नमाज होती थी. कहा जा रहा है कि अब इस नमाज पर भारतीय पुरातत्व विभाग ने प्रतिबंध लगा दिया है.

एएसआई के पूर्व अधिकारियों की मानें तो 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान नमाज पर प्रतिबंध लगाया गया था क्योंकि नमाजियों के पास आर्कलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का नमाज पढ़ने से संबंधित कोई अनुमति पत्र नहीं था.

साल 2016 में इस छोटी मस्जिद में एक बार फिर नमाज शुरू हो गई थी. शुरुआत में इस छोटी मस्जिद में तकरीबन 4 से 5 लोग नमाज पढ़ते थे लेकिन धीरे-धीरे नमाजियों की संख्या 40 से 50 तक पहुंच गई थी.

यह मस्जिद जब कुतुब मीनार का निर्माण हुआ उसी समय की बताई जाती है. उस समय यह मस्जिद नहीं बल्कि मुगल शासकों के सेवादारों की सराय थी और इस सराय में मुगल शासकों के सेवादार विश्राम किया करते थे लेकिन बाद में इस सराय को मस्जिद में कन्वर्ट कर दिया गया.

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Qutub Minar- Quwwatul Islam mosque केस पर आज सुनवाई भी होनी है. साकेत कोर्ट एक याचिका पर आज सुनवाई करेगा. इसमें कुतुब कॉम्पलेक्स में कभी मौजूद रहे 27 मंदिरों को फिर से बनाने की याचिका दायर की गई है.

 

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