क्या आपको यह अंदाजा भी है कि जिस शैंपू से रोज आप अपने बाल धोते हैं, जिस साबुन से आप नहाते हैं, या जो क्रीम और फेसवॉश आप अपने चेहरे पर लगाते हैं, वे नकली या एक्सपायरी डेट के हो सकते हैं? आजतक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की पड़ताल 'ऑपरेशन ब्यूटीफुल' में ऐसे नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जहां शैंपू, फेस वॉश, काजल, परफ्यूम, क्रीम और अन्य ब्रांडेड उत्पाद बेहद कम कीमतों पर बेचे जा रहे हैं.
इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉट्स पर '100 रुपये का माल सिर्फ 10 रुपये में' या 'एमआरपी पर 80 से 90% तक की छूट' के जो दावे किए जाते हैं, उनके पीछे एक बहुत बड़ा अंडरग्राउंड सिंडिकेट काम कर रहा है. आजतक की टीम ने जब खुद ग्राहक बनकर दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में रेकी की, तो इस काले धंधे की परतें खुलती चली गईं. टीम ने प्रोडक्ट्स खरीदे, लैब टेस्ट के लिए सुराग जुटाए और वो सबूत कैमरे में कैद किए जो सोई हुई व्यवस्था को झकझोर कर रख देंगे.
रोहिणी की दुकान से खुलने लगे राज
पड़ताल के दौरान टीम दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-8 स्थित एक दुकान तक पहुंची, जहां कथित तौर पर भारी छूट पर ब्रांडेड प्रोडक्ट्स बेचे जा रहे थे. यह दुकान खुलेआम ब्रांडेड प्रोडक्ट्स पर बहुत ज़्यादा डिस्काउंट का विज्ञापन कर रही थी. स्टाफ का कहना था कि वे थोक लॉट और वेयरहाउस क्लीयरेंस के जरिए बड़ी मात्रा में ब्रांडेड प्रोडक्ट्स मंगा सकते हैं.
कई प्रोडक्ट्स की कीमत आम रिटेल कीमतों से काफ़ी कम थी. डिस्काउंट इतने ज़्यादा थे कि उनसे सोर्सिंग, सप्लाई चेन और इन्वेंट्री मूवमेंट को लेकर सवाल उठने लगे. बाहर से देखने पर सब कुछ नॉर्मल था, जैसा कि हर शातिर खेल में होता है. लेकिन जैसे ही हमने बातचीत का जाल बिछाया, इस अंडरग्राउंड सिंडिकेट की पहली कलाई खुलना शुरू हो गई. यहां बल्क ऑर्डर पर 250 रुपये MRP वाला प्रोडक्ट दुकान पर मौजूद महिला सेल्सपर्सन हमें मात्र 60 रुपये में देने को तैयार हो गई.
पूर्वी आजाद नगर में भी ऐसा ही खेल
रोहिणी के बाद हमारी जांच शाहदरा के पूर्वी आजाद नगर स्थित एक बेसमेंट आउटलेट तक पहुंची. बाहर से देखने पर यह दुकान किसी सामान्य प्रतिष्ठान जैसी ही नजर आती है. न तो कोई बड़ा साइनबोर्ड था और न ही ऐसी पहचान, जिससे इसकी मौजूदगी आसानी से पता चल सके. हालांकि, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर इंस्टाग्राम रील्स और वीडियो के जरिए इसका बड़े पैमाने पर प्रचार किया जा रहा था.
यहां आजतक की टीम ने पहले शिवम नाम के एक कर्मचारी और बाद में खुद को दुकान का मालिक बताने वाले दीपक मलिक से बातचीत की. बातचीत के दौरान दोनों ने दावा किया कि कई ब्रांडेड प्रोडक्ट्स उनकी छपी हुई एमआरपी की तुलना में 80 से 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर बेचे जा रहे हैं.
इसी दौरान उत्पादों की ओर इशारा करते हुए शिवम ने दावा किया कि निविया का एक स्टॉक एक्सपायर्ड है और उसे केवल वीडियो बनाने के लिए रखा जाता है. बाद में उसने कुछ अन्य उत्पादों को भी एक्सपायर्ड बताया और तारीख बदलने से जुड़े दावे किए. हालांकि आज तक इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है.
कुछ दिनों बाद शिवम हमारी टीम को एक गोदाम में ले गया, जहां बड़ी मात्रा में स्टॉक रखा हुआ था. स्टॉक दिखाते हुए उसने कुछ उत्पादों के बारे में दावा किया कि उन्हें बेचने से पहले उनकी तारीख बदलनी पड़ती है. उससे बातचीत के अंश...
रिपोर्टर: लेकिन ये तो एक्सपायर्ड होंगे?
शिवम: हां, इसलिए तारीख बदलनी पड़ती है.
रिपोर्टर: ऐसा और भी स्टॉक है आपके पास?
शिवम: हां, बहुत से हैं.
वहीं, दीपक मलिक ने डुप्लीकेट प्रोडक्ट्स के बारे में पूछे जाने पर दावा किया कि कई ब्रांडों के कॉपी प्रोडक्ट्स उपलब्ध हैं. बातचीत के दौरान उन्होंने O3+ ब्रांड की एक किट दिखाई और उसे कॉपी प्रोडक्ट बताया. उससे बातचीत के अंश...
रिपोर्टर: आप किस तरह के डुप्लीकेट उत्पाद उपलब्ध करा सकते हैं?
दीपक: सब कुछ.
दीपक: कॉपी वाला ₹320 में मिलेगा.
इसके बाद आज तक ने उस उत्पाद की तस्वीरें O3+ कंपनी के साथ साझा कीं. कंपनी ने जवाब में कहा कि जांच के दौरान दिखाया गया उत्पाद O3+ का असली उत्पाद नहीं था.
शाहदरा में भी चल रहा खुला खेल
जांच के अगले चरण में हमारी टीम शाहदरा पहुंची, जहां उनकी मुलाकात विशाल उर्फ बच्चू से हुई. विशाल ने दावा किया कि वह पिछले लगभग 25 वर्षों से कॉस्मेटिक्स और एफएमसीजी कारोबार से जुड़ा हुआ है. बातचीत के दौरान उसने माउथवॉश, सैनिटरी प्रोडक्ट, कॉस्मेटिक्स, फेस वॉश और लोशन समेत कई उत्पाद दिखाए. बातचीत में कई बार रीप्रिंटिंग, पैकेजिंग में बदलाव और उत्पाद संबंधी जानकारी बदलने से जुड़े दावे किए गए.
माउथवॉश का एक उत्पाद दिखाते हुए विशाल से बातचीत के अंश
रिपोर्टर: जब आप कहते हैं कि इस पर काम हुआ है, तो उसका क्या मतलब है?
विशाल: इसकी रीप्रिंटिंग हुई है.
रिपोर्टर: इसकी कीमत कितनी पड़ेगी?
विशाल: काम होने के बाद ₹32 प्रति पीस.
इसके बाद उसने एक औषधीय उत्पाद दिखाते हुए दावा किया...
विशाल: यह ₹10 का है. इस पर काम होगा.
रिपोर्टर: यानी यह एक्सपायर्ड है?
विशाल: इसके 30 से 40 कार्टन मेरे पास हैं.
कई अन्य प्रोडक्ट्स भी बाजार मूल्य के मुकाबले बेहद कम कीमत पर उपलब्ध बताए गए. पैकेजिंग और उत्पाद संबंधी जानकारी पर चर्चा के दौरान विशाल ने दावा किया-
रिपोर्टर: मैं आपको बैच नंबर बता सकता हूं.
विशाल: जो बैच नंबर चाहिए, वह डलवा सकते हैं.
हालांकि आजतक इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर पाया है.
रोहिणी, पूर्वी आजाद नगर और शाहदरा में जांच के दौरान कई समान दावे और पैटर्न सामने आए. भारी छूट पर उपलब्ध बड़ी मात्रा में स्टॉक, एक्सपायर्ड उत्पादों से जुड़े दावे, रीप्रिंटिंग और रीपैकेजिंग से जुड़े दावे, बाजार मूल्य के मुकाबले बेहद कम कीमत पर उत्पाद और खरीदार की जरूरत के मुताबिक सामान तैयार करने के आश्वासन. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि की प्रक्रिया जारी है.
हालांकि, आजतक द्वारा रिकॉर्ड की गई बातचीत कई महत्वपूर्ण जनहित के सवाल खड़े करती है कि क्या एक्सपायर्ड उत्पाद दोबारा खुदरा बाजार में पहुंच रहे हैं? क्या उत्पादों की रीपैकेजिंग या रीलेबलिंग कर उन्हें बेचा जा रहा है? क्या स्थापित ब्रांडों के नाम पर नकली उत्पाद बेचे जा रहे हैं? आखिर 80-90 प्रतिशत की छूट पर उत्पादों की सप्लाई और वितरण कैसे हो रहा है? क्या उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त है?
आज तक ने उत्पादों की तस्वीरें, बैच संबंधी जानकारी और अन्य विवरण कई कंपनियों के साथ सत्यापन के लिए साझा किए हैं. कई कंपनियों ने आंतरिक जांच शुरू कर दी है. कुछ ने परीक्षण के लिए उत्पादों के नमूने मांगे हैं. O3+ पहले ही आज तक को बता चुकी है कि जांच में दिखाया गया एक उत्पाद उसका असली उत्पाद नहीं था. अन्य कंपनियों और संबंधित अधिकारियों के जवाब का इंतजार है. जवाब मिलने पर उन्हें भी रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा.
नितिन जैन