निर्भया केस में नए डेथ वारंट की मांग पर पटियाला हाउस कोर्ट में आज सुनवाई

निर्भया के दोषियों की फांसी में देरी से निर्भया के परिजन दुखी है. परिजनों ने नया डेथ वारंट जारी करने की अर्जी पर दाखिल की है. इस पर पटियाला हाउस कोर्ट में आज सुनवाई होगी.

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वकीलों के साथ निर्भया की मां (फाइल फोटो) वकीलों के साथ निर्भया की मां (फाइल फोटो)

पूनम शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 12 फरवरी 2020,
  • अपडेटेड 7:48 AM IST

  • दोषी विनय शर्मा आज SC में दाखिल करेगा याचिका
  • पवन ने अभी तक नहीं दायर की है क्यूरेटिव पिटीशन

निर्भया केस के चारों गुनहगारों के डेथ वारंट की मांग पर पटियाला हाउस कोर्ट में आज सुनवाई होगी. कोर्ट ने सभी दोषियों को नोटिस भेजा है. निर्भया के माता-पिता ने सभी दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी करने की याचिका मंगलवार को दायर की थी. कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर बुधवार को जवाब दायर करने को कहा है.

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इस बीच एक दोषी विनय शर्मा आज सुप्रीम कोर्ट का रुख करेगा. दया याचिका खारिज करने के फैसले को विनय शर्मा चुनौती देगा. बीते दिनों ही विनय शर्मा की दया याचिका को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने खारिज कर दिया था. इससे पहले मुकेश ने अपनी दया याचिका खारिज होने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

SC का रोक से इनकार

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को चारो दोषियों को एकसाथ फांसी दिए जाने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग वाली केंद्र की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया. सॉलिस्टिर जनरल तुषार मेहता ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि अधिकारी डेथ वारंट के लिए आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन एक दोषी ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका और क्यूरेटिव पिटीशन के अधिकार का प्रयोग नहीं किया है और वह सभी दोषियों की फांसी रुकवाने के लिए दया याचिका दे सकता है.

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SC ने निचली कोर्ट जाने को कहा

जस्टिस आर. भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस ए.एस. बोपन्ना की पीठ ने कहा कि केंद्र को डेथ वारंट की नई तारीख के लिए निचली कोर्ट का रुख करना चाहिए. जस्टिस भूषण ने कहा कि अगर कुछ बचा नहीं है तो आप नए वारंट के लिए कह सकते हैं. इस पर सॉलिस्टिर जनरल मेहता ने कहा कि दोषी पवन को छोड़कर तीनों दोषियों ने अपने सभी कानूनी उपचारों का प्रयोग कर लिया है.

गुनहगारों को मिला था एक हफ्ते का समय

सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि चार दोषियों में से किसी ने भी दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दिए एक हफ्ते के समय में कोई कदम नहीं उठाया. इस स्थिति में केंद्र नए डेथ वारंट के लिए निचली अदालत के पास जा सकता है.

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