दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल और रेस्टोरेंट में बुधवार को लगी भीषण आग ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजधानी में कमर्शियल इमारतों की फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस हादसे में 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल हैं.
दमकल विभाग के मुताबिक, बुधवार सुबह करीब 9:45 बजे आग लगने की सूचना मिलने के बाद राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया. घटनास्थल से 40 लोगों को सुरक्षित निकाला गया. आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है, हालांकि शुरुआती आशंका है कि आग रेस्टोरेंट वाले हिस्से से शुरू हुई.
इस हादसे ने राजधानी को झकझोर दिया है, लेकिन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं है. एनसीआरबी के मुताबिक, वर्ष 2024 में देशभर में कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने की घटनाओं में 249 लोगों की मौत हुई. यह पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा मौतों का आंकड़ा है. 2023 में ऐसी घटनाओं में 241 लोगों की जान गई थी, जबकि 2022 में यह संख्या 219 थी.
चिंता की बात यह है कि आग लगने की घटनाओं की संख्या लगभग स्थिर रही, लेकिन मौतों का आंकड़ा बढ़ता गया. 2024 में देशभर में कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने की 277 घटनाएं दर्ज की गईं, जबकि 2023 में यह संख्या 278 थी. दिल्ली की तस्वीर और भी चिंताजनक है. राजधानी में 2024 के दौरान कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने की केवल 9 घटनाएं दर्ज हुईं, लेकिन इनमें 12 लोगों की मौत हो गई.यानी हर एक आग की घटना में औसतन 1.3 लोगों की जान गई, जो राष्ट्रीय औसत से अधिक है.
दिल्ली में कमर्शियल बिल्डिंग में आग से होने वाली मौतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. 2021 में ऐसी घटनाओं में 4 लोगों की मौत हुई थी, जो 2024 में बढ़कर 12 हो गई. मालवीय नगर हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस एक घटना में मरने वालों की संख्या पिछले साल दिल्ली में कमर्शियल बिल्डिंग में आग लगने से हुई कुल मौतों से भी ज्यादा है.
पिछले महीने ही पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में एक रिहायशी इमारत में लगी आग में 9 लोगों की जान चली गई थी. राजधानी में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं फायर सेफ्टी मानकों के पालन और उनकी निगरानी को लेकर सवाल खड़े करती हैं. मालवीय नगर अग्निकांड की जांच शुरू हो चुकी है. लेकिन एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि बार-बार चेतावनियों और बड़े हादसों के बावजूद फायर सेफ्टी नियमों के पालन में चूक क्यों हो रही है. ऐसे हादसे बताते हैं कि सुरक्षा व्यवस्था में छोटी सी लापरवाही भी कुछ ही मिनटों में बड़े जानलेवा हादसे में बदल सकती है.
पीयूष अग्रवाल