पटाखों बिना भी दिल्ली में राहत नहीं, सामान्य से 9 गुना बढ़ा प्रदूषण

अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो चौंकाने वाला पहलू यह है कि दिल्ली के तमाम अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर सामान्य से 9 गुना तक ज्यादा हो गया है. ऐसे में पटाखों पर लगे बैन से कितना फर्क पड़ेगा ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है.

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फाइल फोटो फाइल फोटो

स्मिता ओझा

  • नई दिल्ली,
  • 19 अक्टूबर 2017,
  • अपडेटेड 3:59 PM IST

दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए इस बार की दिवाली कुछ अलग है इस बार न तो पटाखों का शोर होगा और न ही अनार और चकरी की रोशनी. लेकिन बढ़ते प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए इस कदम ने दिल्ली-एनसीआर के दूषित हवा पर ज्यादा फर्क पड़ेगा ऐसा होता नहीं दिखता. दीवाली से एक दिन पहले ही प्रदूषण के आंकड़े चौंकाने वाले दिखने लगे हैं.

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दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने 10 स्टेशनों पर एयर क्वालिटी मापने की व्यवस्था की है. लेकिन जो आंकड़े निकल कर आए हैं वो बताने के लिए काफी हैं कि कैसे दिल्ली में दिवाली से पहले ही प्रदूषण ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं.

अगर हम आंकड़ों पर नजर डालें तो चौंकाने वाला पहलू यह है कि दिल्ली के तमाम अलग-अलग इलाकों में प्रदूषण का स्तर सामान्य से 9 गुना तक ज्यादा हो गया है. ऐसे में पटाखों पर लगे बैन से कितना फर्क पड़ेगा ये समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है.

दिल्ली-नोएडा और गुरुग्राम के अलग अलग बाज़ारों में आजतक ने जब लोगों से इस पर उनकी राय जननी चाही तो सबने एक सुर में पटाखो पर लगे बैन का समर्थन तो किया पर प्रदूषण स्तर पर चिंता जाहिर की.

दिल्ली का सरोजनी नगर बाजार दिवाली की खरीदारी करने आये लोगों से गुलजार है, जहां एक तरफ मंदी से उभरते बाज़ार के दुकानदारों के चेहरे खिले हुए है तो वहीं पटाखों की चाह में आये बच्चों और युवाओं में मायूसी भी दिखी.

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उत्तम नगर से आये 14 साल के पीयूष ने कहा " बिना पटाखों के दीवाली कैसी? ये ठीक है कि पॉल्युशन ज्यादा हो गया है पर क्या पटाखे सिर्फ दीवाली पर बैन करने से सब ठीक हो जायेगा, ऐसा है तो शादी या दूसरे मौके पर भी पटाखों को बैन करना चाहिए, टैब पॉल्युशन नहीं होगा क्या?".

नोएडा अट्टा बाज़ार

नोएडा के अट्टा बाजार में भी रौनक लगी है पर यहां भी बाज़ार से पटाखें नदारत हैं. हालांकि नोएडा और आस-पास के इलाकों के लोग दिल्ली के सदर बाजार और चांदनी चौक से पटाखों की खरीदारी करते है पर कुछ हद तक अट्टा मार्केट में भी पटाखों का बाजार खूब सजता है, पर इस बार यहां लोगों में मायूसी है.

नोएडा के सेक्टर 56 के रहने वाले वरुण का कहना है, "अगर पटाखे बैन हैं तो फिर खरीदने वाले खरीद कैसे रहे हैं, हर बाजार में चोरी छुपे पटाखे मिल रहे है, पर हां इस बैन के चलते उनके रेट डबल हो गए है, दुकानदारों की कमाई दोगुनी हो गई है बस, मैन अपने 2 साल के बेटे के लिए पिछले साल जो पटाखे 2000 में खरीदे थे वो इस बार 3500 के लिए है, कहा बैन है सब मिल रहा है बस चोरी छुपे ऊँचे दाम में, आम लोगों को लूटने के लिए बैन लगा है बस".

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गुरुग्राम का सदर बाजार दिल्ली के सदर बाजार की तरह ही खरीदारों से खचा खच भर है. यहां अपने बेटी के साथ आये समीर जी का कहना है " बहुत अच्छा हुआ पटाखों पर बैन लगा, पैसे की फिजूल खर्ची और बेमतलब के शोर और प्रदूषण से राहत मिली हालांकि बैन जरूरी नही था लोगों को खुद आगे आ कर ये पहल करनी चाहिए थी, हम तो आज अपनी बेटी के साथ अपने घर के आस पास पौधे लगाएंगे, मैं यही लेने आया था, बच्चों को पर्यावरण से जोड़ना जरूरी है क्योंकि प्रदूषण के आंकड़े चिंताजनक है".

दिल्ली-एनसीआर के अलग अलग इलाकों से लोगों ने पटाखों पर बैन का स्वागत तो किया है पर ज्यादातर यहीं मानते है कि पटाखों के प्रदूषण पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, और दीवाली के एक दिन पहले आये प्रदूषण कंट्रोल कमिटी के आकड़ों ने ये बात साबित कर दी है.

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