फ्लाईओवर से कूदकर जान देने चला था टीचर, ट्रैफिक पुलिस ने ई-रिक्शा में अस्पताल पहुंचाकर बचाई जिंदगी

दिल्ली के रानी झांसी फ्लाईओवर पर एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश करते हुए छलांग लगा दी. गंभीर रूप से घायल शिक्षक की जान दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के दो जवानों की सूझबूझ से बच गई. दोनों ने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय ई-रिक्शा से उन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जिससे समय रहते इलाज शुरू हो सका.

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पुलिस की तत्परता से बची जान.(Photo: AI-generated) पुलिस की तत्परता से बची जान.(Photo: AI-generated)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

दिल्ली में ट्रैफिक पुलिस की तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता ने एक सरकारी स्कूल के शिक्षक की जान बचा ली. राजधानी के रानी झांसी फ्लाईओवर से एक 45 वर्षीय शिक्षक ने कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश करते हुए छलांग लगा दी. हादसे के बाद मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने बिना एक पल गंवाए घायल को अस्पताल पहुंचाया.

दरअसल, यह घटना 8 जुलाई की शाम करीब 4 बजे की है. अधिकारियों के मुताबिक आजाद मार्केट चौक पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को सूचना मिली कि एक व्यक्ति रानी झांसी फ्लाईओवर से कूदने की कोशिश कर रहा है. सूचना मिलते ही दोनों पुलिसकर्मी तुरंत मौके की ओर दौड़ पड़े.

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मौके पर पहुंचने पर कांस्टेबल साहिल और अमित ने देखा कि व्यक्ति फ्लाईओवर से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो चुका है. हालत नाजुक होने के कारण उन्होंने एंबुलेंस का इंतजार करने के बजाय तुरंत एक गुजर रहे ई-रिक्शा को रोका और घायल को उसमें बैठाकर अस्पताल ले गए.

एंबुलेंस का इंतजार नहीं किया, ई-रिक्शा बना सहारा

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दोनों ट्रैफिक पुलिसकर्मियों का उद्देश्य घायल को जल्द से जल्द इलाज उपलब्ध कराना था. यही वजह रही कि उन्होंने समय बर्बाद किए बिना ई-रिक्शा के जरिए उसे सीधे हिंदू राव अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने तत्काल उसका इलाज शुरू किया.

घायल की पहचान 45 वर्षीय आनंद कुमार सरोहा के रूप में हुई है, जो सरकारी स्कूल में शिक्षक हैं. हिंदू राव अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए सेंट स्टीफंस अस्पताल रेफर कर दिया.

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डॉक्टरों के मुताबिक शिक्षक अब खतरे से बाहर हैं, हालांकि उनका इलाज अभी भी अस्पताल में जारी है. समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण उन्हें जरूरी चिकित्सीय सहायता मिल सकी.

पुलिस की तत्परता से बची जान, कारण का खुलासा नहीं

दिल्ली पुलिस का कहना है कि ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय ने इस मामले में सबसे अहम भूमिका निभाई. अगर इलाज में देरी होती तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी.

फिलहाल पुलिस ने यह नहीं बताया है कि शिक्षक ने कथित तौर पर आत्महत्या जैसा कदम उठाने की कोशिश क्यों की. मामले के पीछे की वजह का अभी खुलासा नहीं किया गया है.

इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि आपात स्थिति में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया किसी की जिंदगी बचाने में कितनी अहम साबित हो सकती है. कांस्टेबल साहिल और अमित की सूझबूझ और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना की जा रही है.

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