नागिरकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन जारी है. दो महीने से ज्यादा वक्त से जारी इस विरोध प्रदर्शन के चलते नोएडा-फरीदाबाद रोड बंद था. सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकारों के साथ बातचीत के बाद शनिवार को नोएडा-फरीदाबाद रोड सबके लिए खोल दिया गया था.
रोड खुलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली है. रोड पर हलचल देखी जा रही है. सड़क खुलने के बाद बसें, ई रिक्शा और अन्य गाड़ियां देखी जा रही हैं. दिल्ली पुलिस के जवान, जो विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से शाहीन बाग में तैनात थे, वे अब ट्रैफिक पर नजर रख रहे हैं.
गाड़ियों की आवाजाही शुरू
शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच शनिवार की शाम जामिया नगर से कालिंदी कुंज होते हुए नोएडा की ओर जाने वाला रास्ते को करीब 2 महीने बाद खोल दिया गया. इस रास्ते गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई है.
हालांकि शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस के साथ सड़कों को खोलने के संबंध में कोई बातचीत नहीं की है. दिल्ली पुलिस भी कह रही है कि सड़कें खोलने के संबंध में प्रदर्शनकारियों के साथ उनकी बातचीत नहीं हुई है.
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रोड ब्लॉकेज पर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर
सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त वार्ताकार वजाहत हबीबुल्ला ने सड़क बंद होने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा भी दायर किया है. हलफनामे में कहा गया है कि
पुलिस ने 5 जगहों पर रोड ब्लॉक किया है. अगर ब्लॉकिंग रोक दी जाती तो ट्रैफिक सामान्य तरीके से चलने लगता. हलफनामे में कहा गया है कि पुलिस ने बेवजह रास्ता बंद किया, जिसकी वजह से लोगों को परेशानी हुई.
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प्रदर्शन खत्म करने की मांग नहीं
दरअसल, शनिवार सुबह करीब 10.30 बजे वातार्कार साधना रामचंद्रन प्रदर्शनकारियों से मिलने शाहीनबाग पहुंची थीं. उस वक्त उन्होंने प्रदर्शनकारियों के सामने कहा था कि अगर हम आपको प्रदर्शन खत्म करने के लिए नहीं कह रहे हैं.
'प्रदर्शनकारियों ने बंद नहीं की थी सड़क'
इसके बाद प्रदर्शनकारियों की तरफ से लगातार कहा जा रहा था कि सड़क हमने बंद की ही नहीं थी, दिल्ली पुलिस की तरफ से यह सड़क बंद की गई. सीएए और एनआरसी को लेकर शाहीनबाग में पिछले 71 दिनों से विरोध प्रदर्शन चल रहा है और इस वजह से इस रास्ते पर प्रदर्शन हो रहा है. उससे आसपास के लोगों को दिक्कत हो रही थी.
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