बीट रिपोर्ट: दिल्ली में अवैध निर्माण पर बड़ा एक्शन... लापरवाह अफसरों पर गिरेगी गाज, वेतन से वसूली और 2 साल तक की कैद का प्रावधान

दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में फैसला लिया गया कि ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी. लापरवाही साबित होने पर विभागीय कार्रवाई, वेतन और पेंशन से वसूली तथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

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दिल्ली में फायर सेफ्टी और अवैध निर्माण की होगी व्यापक जांच (Photo: ITG) दिल्ली में फायर सेफ्टी और अवैध निर्माण की होगी व्यापक जांच (Photo: ITG)

सुशांत मेहरा

  • नई दिल्ली,
  • 05 जून 2026,
  • अपडेटेड 10:06 PM IST

राजधानी दिल्ली में हाल के दिनों में सामने आए बड़े हादसों के बाद दिल्ली सरकार एक्शन मोड में दिखाई दे रही है. इसी कड़ी में दिल्ली सचिवालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक अहम उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें दिल्ली पुलिस, डीडीए, एमसीडी और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया. बैठक में अवैध निर्माण, भवन सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर कई बड़े और सख्त फैसले लिए गए.

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मुख्यमंत्री की हाई लेवल बैठक में अवैध निर्माण और सुरक्षा उल्लंघनों पर सख्त फैसले हुए. बैठक में मुख्यमंत्री के अलावा दिल्ली पुलिस कमिश्नर, डीडीए के वाइस चेयरमैन, एमसीडी कमिश्नर, जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल के हादसों की समीक्षा करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय करना था.

बैठक के बाद दिल्ली सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब अवैध निर्माण या नियमों के उल्लंघन के मामलों में केवल भवन मालिकों या संचालकों पर ही कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों को भी जवाबदेह ठहराया जाएगा.

सरकार ने फैसला किया है कि यदि किसी क्षेत्र में अवैध निर्माण, अनियमित गतिविधियां या सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है और उसमें अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने पर अधिकारियों की सैलरी, पेंशन और यहां तक कि उनकी संपत्ति से भी वसूली की जा सकती है.

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दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी

बैठक के बाद दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली सरकार हाल के हादसों को बेहद गंभीरता से ले रही है और दिल्लीवासियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि सरकार जनता के साथ खड़ी है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

गृह मंत्री ने बताया कि अब तक विभिन्न एजेंसियों के बीच जिम्मेदारियों के बंटवारे और समन्वय की कमी के कारण कई बार सरकारी आदेशों को लागू करने में कठिनाई आती थी. इस समस्या को दूर करने के लिए सरकार ने प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करने का निर्णय लिया है.

सरकार ने फैसला किया है कि जिला स्तर पर समन्वय को मजबूत करने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को अतिरिक्त प्रशासनिक शक्तियां दी जाएंगी. डीएम को विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एसीआर लिखने, छुट्टी स्वीकृत करने और सरकारी आदेशों के अनुपालन की निगरानी करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी. इससे जिला स्तर पर जवाबदेही तय करने और विभिन्न एजेंसियों को एक सूत्र में बांधने में मदद मिलेगी.

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बैठक में यह भी तय किया गया कि सरकारी आदेशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा 51, 55 और 56 के तहत कार्रवाई की जा सकती है. इन धाराओं के तहत दोषी अधिकारियों को दो साल तक की सजा का प्रावधान है. सरकार का मानना है कि सख्त कानूनी कार्रवाई का संदेश प्रशासनिक तंत्र में अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करेगा.

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दिल्लीभर में अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी पर बड़े निरीक्षण अभियान की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में दिल्ली भर में बड़े स्तर पर निरीक्षण अभियान चलाया जा सकता है. अवैध निर्माण, भवन सुरक्षा, फायर सेफ्टी, व्यावसायिक गतिविधियों और लाइसेंस संबंधी नियमों की जांच की जाएगी. जिला प्रशासन, एमसीडी, डीडीए, दिल्ली पुलिस और अन्य एजेंसियां मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाएंगी.

दिल्ली सरकार के इस फैसले को राजधानी में प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. सरकार का दावा है कि अब किसी भी हादसे या नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदारी तय होगी और लापरवाही करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

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