लखनऊ के अलीगंज की इमारत में 15 परिवारों के चिराग बुझ गए. सरकारी लापरवाही, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और सिस्टम की नाकामी पर एक बार फिर सवाल उठ खड़े हुए. लेकिन यह पहली बार नहीं है जब किसी इमारत, बेसमेंट या अवैध इस्तेमाल ने जानें ली हों. 27 जुलाई 2024 को देश ने दिल्ली के ओल्ड राजिंदर नगर में भी ऐसी ही बेबसी देखी थी, जब राउज आईएएस स्टडी सर्कल (Rau's IAS Study Circle) के बेसमेंट में पानी भरने से तीन यूपीएससी अभ्यर्थियों की मौत हो गई थी. उस हादसे के बाद जांच हुई, कार्रवाई हुई, वादे हुए कि अब ऐसा दोबारा नहीं होगा. लेकिन क्या सिस्टम ने सचमुच कोई सबक लिया?
आजतक की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम की पड़ताल बताती है कि जवाब असहज करने वाला है. दिल्ली के यमुना विहार के एजुकेशन हब में आज भी बेसमेंट का इस्तेमाल नियमों के खिलाफ हो रहा है. पहाड़गंज में बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम (B&B Scheme) की आड़ में कई प्रॉपर्टियां कथित तौर पर होटल की तरह चल रही हैं और उत्तम नगर में भी B&B के नाम पर कमरों की संख्या और संचालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. यह सिर्फ तीन जगहों की कहानी नहीं है. यह उस पैटर्न की कहानी है जिसमें हादसे के बाद सख्ती का दावा होता है, लेकिन जमीन पर खतरनाक व्यवस्थाएं जस की तस चलती रहती हैं.
यमुना विहार का एजुकेशन हब
27 जुलाई 2024 को राउज आईएएस स्टडी सर्कल के बेसमेंट में जो हुआ, उसने पूरे देश को हिला दिया था. जिस बेसमेंट को पार्किंग और स्टोरेज के लिए मंजूरी मिली थी, वहां लाइब्रेरी चल रही थी. जगह के अवैध इस्तेमाल, पानी भरने, सीमित निकास और बायोमेट्रिक एक्सेस सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल उठे. लेकिन आजतक की पड़ताल में जो सामने आया, वह बताता है कि दिल्ली के कुछ हिस्सों में हालात अब भी नहीं बदले.
Future World Technical Institute: 10x10 के कमरे में लाइब्रेरी, 25 स्टडी क्यूबिकल और बायोमेट्रिक एंट्री
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के यमुना विहार में Future World Technical Institute के बेसमेंट में एक 10x10 फुट के कमरे को लाइब्रेरी में बदल दिया गया है. यहां करीब 25 स्टडी क्यूबिकल बनाए गए हैं और सबसे चौंकाने वाली बात इस लाइब्रेरी में एंट्री बायोमेट्रिक सिस्टम से होती है. आजतक एसआईटी की मुलाकात वहां के मैनेजर राकेश से हुई. जब रिपोर्टर ने पूछा, 'ये लाईब्रेरी के लिए पता करना था…', तो राकेश ने बताया, '₹1,500, 13 घंटे के लिए… फुल डे.'
लाइब्रेरी दिखाते हुए उसने कहा, 'इसके अंदर वाई-फाई, वॉटरकूलर सब है, बस वॉशरूम के लिए ऊपर जाना पड़ता है.'
लेकिन यह सिर्फ लाइब्रेरी नहीं थी. बेसमेंट में ही एसएससी की क्लास भी चलती मिली. पड़ताल में यह भी सामने आया कि बेसमेंट के अलग-अलग हिस्से करके उनका इस्तेमाल किया जा रहा है. बिल्डिंग के स्वामित्व और संचालन पर पूछे गए सवाल पर राकेश ने कहा, 'नहीं मेरी नहीं है… रेंट पे… मैं ऊपर पूरा मैनेजमेंट देखता हूं.' जब रिपोर्टर ने पूछा, 'होती तो कोचिंग ही है?', तो जवाब मिला, 'होती कोचिंग ही है.'
कुछ ही कदम दूर Horizon Academy, जहां बेसमेंट तक में क्लास
यमुना विहार की कहानी यहीं खत्म नहीं होती. Future World से कुछ ही कदम दूर Horizon Academy नाम का कोचिंग सेंटर बच्चों को NEET और IIT की तैयारी करवा रहा है. यहां क्लास टॉप फ्लोर से लेकर बेसमेंट तक चलती मिलीं. सेंटर संचालक ने बताया, '4 सब्जेक्ट्स हैं… बच्चों को पढ़ने सिर्फ 36 हजार की फीस लगेगी… 4 से 6 क्लास होगी.' एक क्लास में बच्चों की संख्या पर पूछे गए सवाल पर उसने कहा, '10वीं में सर 30 जाएगा.'
इसके बाद आजतक की टीम को सेंटर के अलग-अलग हिस्से दिखाए गए. स्टाफ ने टॉप फ्लोर की क्लास दिखाई, फिर बेसमेंट की ओर ले जाते हुए कहा, 'एक क्लास ये…', और जब रिपोर्टर ने पूछा, 'बेसमेंट में भी क्लास है?', तो जवाब मिला, 'हां'. कुछ ही देर बाद दूसरी क्लास दिखाते हुए स्टाफ ने कहा, 'एक ये क्लास हो गई और एक ये क्लास है.'
राजिंदर नगर के बाद भी वही खतरा?
यमुना विहार की तस्वीरें कई सवाल खड़े करती हैं. क्या बेसमेंट में लाइब्रेरी और कोचिंग चलाना सुरक्षा मानकों के अनुरूप है? क्या इन परिसरों में फायर सेफ्टी, एग्टिज, इमरजेंसी मैनेजमेंट और क्राउड कैपेसिटी की जांच हुई है? क्या बायोमेट्रिक एंट्री सिस्टम किसी तरह की इमरजेंसी में जोखिम नहीं बढ़ा सकता? राजिंदर नगर हादसे के बाद दावा किया गया था कि बेसमेंट के दुरुपयोग पर सख्ती होगी. लेकिन आजतक की पड़ताल बताती है कि दिल्ली के एजुकेशनल हब में आज भी छात्र संभावित खतरों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं.
पहाड़गंज: Bed & Breakfast की आड़ में होटल? संकरी गलियां, दर्जनों कमरे और NIDHI प्रमाणपत्र का सवाल
दिल्ली में आग और हादसों के बाद हर बार नियमों को सख्ती से लागू करने के दावे किए जाते हैं. लेकिन आजतक की पड़ताल जब पहाड़गंज के तेल मंडी और मुल्तानी ढांडा इलाके में पहुंची, तो कई ऐसी प्रॉपर्टियां मिलीं जो गंभीर सवाल खड़े करती हैं.
‘The Yuvaan B&B’: 16 कमरे, 4 फ्लोर और संकरी गली
आजतक की टीम The Yuvaan B&B पहुंची. जिस बेड एंड ब्रेकफास्ट स्कीम का उद्देश्य लोगों को अपने घर के सीमित हिस्से में पर्यटकों को ठहराने की अनुमति देना था, वहां तस्वीर कुछ और दिखी. इतनी संकरी और घुमावदार गलियां कि दो लोग मुश्किल से एक-दूसरे को पार कर सकें. ऐसे में अगर आग लग जाए, तो क्या दमकल की टीम समय पर पहुंच पाएगी? यहां मौजूद स्टाफ से रिपोर्टर ने कमरे के बारे में पूछा. जवाब मिला, 'रुम हैं नहीं…'. लेकिन आगे बातचीत में स्टाफ ने किराया, सुविधाएं और कमरों की संख्या तक बताई. उसने कहा, 'स्टार्टिंग हम लोगों का डबल बेड का ₹1,200… एसी रहेगा… फ्रिज रहेगा…'. जब रिपोर्टर ने पूछा, 'कितने कमरे हैं यहां?', तो जवाब था, 'यहां पर 16 कमरे हैं… अभी तो 16 के 16 कमरे लगे हुए हैं… चार फ्लोर का है.'
Blue Berry: 8 कमरे, संकरी सीढ़ी और NIDHI प्रमाणपत्र
पहाड़गंज के मुल्तानी ढांडा पड़ताल के दौरान आजतक की टीम को Blue Berry नाम की एक और प्रॉपर्टी मिली. यहां पहुंचने के लिए एक बेहद संकरी सीढ़ी से गुजरना पड़ता है. यहां मौजूद नदीम से बातचीत में रिपोर्टर ने कहा, 'मेरे करीब 20 गेस्ट आ रहे हैं.' नदीम ने जवाब दिया, 'हम लोगों के पास 8 रुम ही हैं… 1500 रुपये में एक रुम है.' उसने यह भी कहा, 'ब्रेकफास्ट इनक्लूड नहीं है. हम लोगों का किचन है, अगर आपको चाहिए तो आपको प्रोवाइड हो जाएगा.'
NIDHI सर्टिफिकेट: क्या यह होटल चलाने की मंजूरी है?
इस प्रॉपर्टी पर Delhi Tourism और NIDHI पोर्टल का प्रमाणपत्र लगा मिला. पहली नजर में यह किसी सरकारी मंजूरी जैसा दिखता है. लेकिन प्रमाणपत्र को ध्यान से पढ़ने पर पता चलता है कि इसे अंतिम सरकारी मंजूरी या संचालन की स्वीकृति नहीं माना जा सकता. यही वह बिंदु है जहां बड़ा सवाल उठता है कि क्या इस तरह के प्रमाणपत्र को दिखाकर प्रॉपर्टी को होटल की तरह चलाया जा रहा है? क्योंकि किसी भी होटल या गेस्ट हाउस के संचालन के लिए केवल NIDHI पंजीकरण पर्याप्त नहीं होता. सामान्यतः सवाल उठते हैं:
फायर सेफ्टी अनुपालन क्या है?
भवन उपयोग की अनुमति क्या है?
स्थानीय निकायों की मंजूरी है या नहीं?
इमारत की क्षमता, निकास और संरचना सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं?
गत्ते का भंडारण, प्लास्टिक कटिंग मशीनें और इमारत के भीतर बिजली का पोल
इस प्रॉपर्टी को लेकर उपलब्ध दस्तावेजों और स्थानीय रिकॉर्ड के आधार पर आजतक की पड़ताल में और भी बातें सामने आईं. यह इमारत लगभग 50 वर्ग गज के भूखंड पर निर्मित बहुमंजिला ढांचे के रूप में सामने आई. भूतल पर गत्ते का भंडारण दिखाई दिया, जो आग लगने की स्थिति में जोखिम बढ़ा सकता है. परिसर में लेजर आधारित प्लास्टिक कटिंग मशीनें भी संचालित होती दिखाई दीं. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिजली का एक पोल इमारत की संरचना के भीतर दिखाई देता है. दस्तावेज बताते हैं कि इस संबंध में BSES ने नबी करीम थाना पुलिस को शिकायत भेजकर कार्रवाई की मांग की थी.
पहाड़गंज की तस्वीरें क्या कहती हैं?
संकरी गलियां और सीढ़ियां
बहुमंजिला ढांचे में कमरों का संचालन
NIDHI प्रमाणपत्र को लेकर भ्रम
ज्वलनशील सामग्री का भंडारण
परिसर में अन्य गतिविधियां
बिजली संरचना से जुड़े सवाल
पहाड़गंज की तस्वीरें एक बार फिर वही सवाल खड़ा करती हैं कि क्या कार्रवाई किसी दुर्घटना के बाद होगी, या फिर खतरे को पहले ही पहचाना जाएगा?
उत्तम नगर: B&B के नाम पर 27 कमरे? आवास का सीमित कमर्शियल उपयोग या होटल मॉडल?
आजतक की पड़ताल उत्तम नगर भी पहुंची. यहां भी Bed & Breakfast Scheme के तहत चल रही प्रॉपर्टियों की जांच में ऐसे तथ्य सामने आए, जो यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या B&B योजना का इस्तेमाल कुछ जगहों पर व्यावसायिक होटल संचालन के लिए किया जा रहा है.
SJ Residency: 27 कमरे और चार मंजिल
कागजों में SJ Residency बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना के तहत पंजीकृत बताई गई. लेकिन मौके पर जो तस्वीर सामने आई, उसने सवाल खड़े कर दिए. यहां मैनेजर अनामिका से रिपोर्टर ने कहा, 'मुझे 10 रूम चाहिए… एक दिन के लिए चाहिए…', जवाब में अनामिका ने कहा, 'रुम का आपको पड़ेगा 800…' और आगे बताया, 'अभी 27 रूम हैं… चार फ्लोर का.'
मैनेजर के मुताबिक प्रॉपर्टी में 27 कमरे हैं और संचालन चार मंजिलों पर हो रहा है. सवाल यह है कि क्या यह संचालन बेड एंड ब्रेकफास्ट योजना की मूल भावना और शर्तों के अनुरूप है, या फिर योजना का इस्तेमाल व्यावसायिक होटल संचालन के लिए किया जा रहा है?
Blue Moon Hotel: अनुमति सीमित, संचालन ज्यादा?
उत्तम नगर में ही आजतक की टीम को एक और प्रॉपर्टी मिली- Blue Moon Hotel. इसे भी Bed & Breakfast Scheme के तहत पंजीकृत बताया गया. लेकिन यहां प्रदर्शित अनुमति पत्र में यह बात दर्ज मिली कि मालिक मनोज आहूजा को प्रत्येक मंजिल पर सीमित संख्या में कमरे किराये पर देने की अनुमति है. इसके बावजूद मौके पर जो जानकारी दी गई, उसने नए सवाल खड़े कर दिए. रिपोर्टर के सवाल, 'यहां पर कितने रुम हैं? और जवाब मिला, '14 कमरे… हमारे यहां 7 एसी और 7 नॉन एसी कमरे हैं.' और फिर जोड़ा गया, 'ब्रेकफास्ट नहीं हो पाएगा.'
B&B बनाम होटल: मूल फर्क क्या है?
यही वह जगह है जहां जांच का कानूनी और नीतिगत पहलू सामने आता है. होटल चलाने के लिए आम तौर पर जिन बातों का महत्व होता है उनमें...
फायर सेफ्टी नियमों का पालन
भवन निर्माण मानकों का पालन
व्यावसायिक उपयोग की अनुमति
पार्किंग और निकास व्यवस्था
सुरक्षा और रिकॉर्ड-रखरखाव
स्थानीय निकायों और अन्य एजेंसियों की मंजूरियां
B&B योजना का उद्देश्य क्या है?
मालिक के निवास वाले घर के सीमित हिस्से को टूरिस्ट के लिए खोलना. इसे पूर्ण व्यावसायिक होटल मॉडल में बदलना नहीं. उत्तम नगर की पड़ताल यही सवाल उठाती है कि क्या कुछ प्रॉपर्टियां B&B योजना की अपेक्षाकृत आसान व्यवस्था का लाभ उठाकर खुद को होटल की तरह संचालित कर रही हैं?
तीन जगहें, एक पैटर्न: हादसे के बाद सख्ती के दावे, लेकिन जमीन पर वही खतरे
आजतक की यह पड़ताल तीन अलग-अलग किस्म की लोकेशनों तक गई:
यमुना विहार: जहां बेसमेंट में लाइब्रेरी और कोचिंग चलती मिली.
पहाड़गंज: जहां B&B के नाम पर बहुमंजिला प्रॉपर्टियां संकरी गलियों में संचालित होती दिखीं, और एक NIDHI प्रमाणपत्र को लेकर गंभीर भ्रम सामने आया.
उत्तम नगर: जहां कमरों की संख्या और B&B की सीमा को लेकर सवाल उठे.
इन तीनों कहानियों में एक चीज कॉमन है:
नियमों और वास्तविक संचालन के बीच अंतर
सुरक्षा की अनदेखी
कागज और जमीन की तस्वीर में फर्क
हादसे के बाद भी सिस्टम का न बदलना
बड़ा सवाल: क्या सबक सिर्फ हादसे के बाद की कार्रवाई तक सीमित है?
लखनऊ की इमारत, राजिंदर नगर का बेसमेंट, यमुना विहार का एजुकेशन हब, पहाड़गंज की संकरी गलियां और उत्तम नगर की B&B प्रॉपर्टियां... इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यही है...
क्या सरकारी एजेंसियां सिर्फ हादसे के बाद जागती हैं?
क्या नियम सिर्फ कागजों पर हैं?
क्या छात्रों, मेहमानों और आम लोगों की सुरक्षा सिस्टम की प्राथमिकता है भी या नहीं?
आजतक ने अपनी पड़ताल में जो पाया, वह सिर्फ तीन लोकेशनों का मामला नहीं है. यह उस प्रशासनिक संस्कृति पर सवाल है जिसमें जोखिम पहले बनता है, कार्रवाई बाद में होती है.
अरविंद ओझा / नितिन जैन