नदियों में सिक्के डालकर मनोकामना मांगने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है. इसी विषय पर प्रेमानंद महाराज ने श्रद्धालुओं को एक अलग संदेश दिया है. उन्होंने कहा कि आस्था का उद्देश्य केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि ऐसा कार्य करना होना चाहिए जिससे किसी जीव या जरूरतमंद को लाभ मिले. उनके इस संदेश को लेकर भक्तों के बीच चर्चा तेज हो गई है और लोग इसे सकारात्मक सोच से जोड़कर देख रहे हैं.