स्वास्थ्य सुविधाएं लचर, लेकिन बिहार में सीमित है कोरोना का कहर

देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 11 हजार को पार कर चुका है जबकि 377 लोगों की अबतक मौत हो चुकी है. ऐसे में बिहार में कोरोना संक्रमण के अभी तक कुल 66 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 29 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं और महज एक शख्स की अभी तक मौत हुई है. हालांकि, स्वास्थ्य सेवा के मामले में बिहार की स्थिति काफी खराब है, इसके बाद भी कोरोना को नियंत्रण करने में सरकार सफल दिख रही.

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पटना मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में एक मरीज (फोटो: PTI) पटना मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में एक मरीज (फोटो: PTI)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 3:22 PM IST

  • बिहार में कोरोना के कुल पांच लैब बनाए गए हैं
  • बिहार में कोरोना वायरस के कुल 66 केस आए
  • बिहार में कुल 1,032 अस्पतालों में 5,510 बेड

कोरोना संक्रमण के मामले में महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु जैसे प्रदेशों की तुलना में बिहार की स्थिति फिलहाल काफी बेहतर नजर आ रही है. देश में कोरोना वायरस से संक्रमिक मरीजों का आंकड़ा 11 हजार को पार कर चुका है जबकि 377 लोगों की अबतक मौत हो चुकी है. बिहार में कोरोना संक्रमण के अभी तक कुल 66 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 29 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं और महज एक शख्स की अभी तक मौत हुई है.

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हालांकि, देश में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बिहार सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है, जहां न तो दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े हॉस्पिटल हैं और न ही मेडिकल की खास सुविधा. इसके बावजूद बिहार में कुल 38 जिलों में से 27 जिले ऐसे हैं जहां कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने नहीं आया है. बिहार में मौजूदा समय में कोरोना वायरस के महज 35 मरीज हैं, जिनका इलाज चल रहा है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समीक्षा बैठक में निर्देश दिया है कि जहां कोरोना संक्रमित पाए गए हैं, उन्हें एपीसेंटर मानते हुए उसके तीन किमी की परिधि में भी डोर टू डोर स्क्रीनिंग कराएं. बिहार के सिवान, बेगूसराय, नालंदा और नवादा जिलों में पल्स पोलियो अभियान की तर्ज पर डोर टू डोर स्क्रीनिंग की जाएगी जहां कोरोना के सबसे अधिक मामले पाए गए हैं. इसके तहत घर-घर जाकर यह पता लगाया जाएगा कि एक मार्च से 23 मार्च के बीच उनके घर में बाहर से कोई आया या नहीं.

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इस अभियान में दो-दो लोगों की टीम बना कर जांच कराई जाएगी. उसके ऊपर एक सुपरवाइज़र होगा, जो स्क्रीनिंग किए गए लोगों की लिस्ट बना कर सम्बंधित प्रखंड में जमा करेंगे जहां इसकी सूचि तैयार की जाएगी. जिनमें कोरोना के लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें प्रखंड स्तर पर बने क्वारनटीन सेंटर में रखा जाएगा.

बता दें कि बिहार में मंगलवार तक 7781 लोगों का कोरोना संक्रमण का टेस्ट किया गया है, जिनमें से 66 लोग पॉजिटिव पाए गए थे. इनमें सबसे अधिक सीवान में 29, बेगूसराय में 8, नालंदा और नवादा में 3-3 मामले पाए गए हैं. हालांकि इनमें से 29 लोग ठीक होकर अपने घर को जा चुके हैं, जिसके बाद फिलहाल 35 कोरोना पॉजिटिव के मामले है.

कोरोना संक्रमण के बिहार में जो 66 केस हुए हैं उसके 3 किलो मीटर के रेडियस में जितने भी घर हैं उन सभी घरों में भी डोर टू डोर स्क्रीनिंग कराई जाएगी. इसके बाद जितने लोग भी 1 मार्च से 23 मार्च के बीच विदेश से और देश के किसी भी प्रदेश से आए हैं, उन सभी के गांव के हर एक घर को स्क्रीनिंग किए जाने की नीतीश कुमार ने रणनीति बनाई है. इसके तरह से माना जा रहा है कि बिहार में करीब 8 हजार ऐसे गांव हैं, जहां स्क्रीनिंग होगी.

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बता दें कि नीति आयोग के अनुसार रोजगार की तलाश में बिहार से पलायन के मामले सबसे ज्यादा हैं. राज्य से बाहर जाने वाले करीब 62 फीसदी बिहार के लोग दूसरे राज्यों में रहते हैं. लॉकडाउन के बाद वो बड़ी तादाद में अपने घरों को वापस लौटे हैं और कुछ लोग अभी भी दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं.

बिहार में स्वास्थ्य सेवा

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के मुताबिक बिहार में 5 कोरोना वायरस के टेस्ट करने के लिए लैब बनाये गए हैं. इनमें से तीन पटना और दो दरभंगा में हैं. प्रदेश की आबादी के लिहाज से लैंबों की संख्या कम तो हैं. मेडिकल सेवा के लिहाज से बिहार की बात करें तो स्थिति सबसे खराब है. साल 2011 की जनगणना के लिहाज बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 10 करोड़ आबादी रहती है जिनके लिए कुल 1,032 अस्पताल है जिनमें महज 5,510 बेड हैं. इस हिसाब से देखेंगे तो लगभग 18,000 ग्रामीणों के लिए एक बेड की व्यवस्था है.

जनवरी से तैयारी शुरू कर दी थी

बिहार की स्वास्थ्य सेवा की हालत को देखते हुए नीतीश कुमार ने कोरोना के खिलाफ जनवरी महीने से ही रणनीति बनाकर लड़ाई शुरू कर दी थी. केंद्र सरकार की एडवाइजरी के बाद नेपाल से लगती बिहार की सीमा के सात जिलों पर कड़ा पहरा बिठाया गया और नेपाल के रास्ते बिहार में प्रवेश करने वालों की जांच शुरू की गई. वहीं, दूसरी ओर गया और पटना हवाई अड्डों पर भी थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था की गई. इसके साथ ही राज्य के बाहर से आने वालों को मामूली शक पर भी होम क्वारंटाइन करने के नियम प्रभावी किए गए.

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बिहार में मार्च में मिला पहला केस

सरकार की कड़ाई और प्रयासों का ही नतीजा है कि बिहार में कोरोना का पहला पॉजिटिव केस मार्च महीने में मिला. यह व्यक्ति कतर से लौटा था. मुंगेर निवासी इस व्यक्ति की दोनों किडनी फेल थी और इसी के इलाज के लिए उसे पटना एम्स में भर्ती किया गया था, जहां जांच में इसके पॉजिटिव होने की बात सामने आई. इस व्यक्ति की वजह से मुंगेर, गया और पटना मिलाकर करीब 16 लोग संक्रमित हुए. इस कड़ी में बिहार में दूसरा मामला सिवान में मिला, जो ओमान से आया था. इस व्यक्ति ने अपने परिवार समेत कुल 29 लोगों को संक्रमित किया.

कोरोना संक्रमित और संदिग्धों को क्वारनटीन और आइसोलेट करने का काम युद्धस्तर पर चलने लगा. इसके बेहतर नतीजे भी दिखे. आज राज्य में कोरोना के कुल 66 संक्रमित हैं, लेकिन इनमें से 29 लोग कोरोना को पराजित करने में सफल रहे हैं. यह संकेत हैं कि बिहार कोरोना के चंगुल से बाहर निकलने में सफल हो सकता है. बिहार के लोग ऐसे ही निर्धारित नियमों का पालन करते रहे तो कोरोना को बिहार आसानी से मात देने में सफल रहेगा.

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