डीएस ग्रुप ने उत्तर प्रदेश में 'पल्लू प्रोटेक्शन इक्विपमेंट' जागरूकता अभियान की शुरुआत की

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Press Release | एक कॉर्पोरेट कंपनी के रूप में, डीएस ग्रुप स्पष्ट मूल्यों के आधार पर काम करता है, जिनका उद्देश्य समाज कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए योगदान देना है।

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aajtak.in

  • New Delhi,
  • 17 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:00 PM IST
  • डीएस ग्रुप ने इस अभियान के तहत पल्लू प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई -PPE) फिल्टर पेश किया है।
  • यह पहल डीएस ग्रुप के 'फार्महर (FarmHER)' कार्यक्रम का हिस्सा है
  • इस अभियान के तहत मोबाइल जागरूकता वैन आयोजित किए जा रहे हैं

प्रमुख एफएमसीजी समूह और मल्टी-बिज़नेस कॉरपोरेशन, धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप (डीएस ग्रुप) ने कृषि कार्य के दौरान कीटनाशकों और रासायनिक पदार्थों के संपर्क से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से महिला किसानों की सुरक्षा के लिए नई पहल शुरू की है। कंपनी ने बागपत जिले के पाली, कथा, बांडपुर, सुनहेरा, बसी, मावीकला और सांकरौध सहित सात गांवों में 'पल्लू प्रोटेक्शन इक्विपमेंट' जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य केवल महिला किसानों को कीटनाशकों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में जागरूक करना ही नहीं, बल्कि उन्हें उनकी जरूरतों और स्थानीय जीवनशैली के अनुरूप एक व्यावहारिक सुरक्षा समाधान भी उपलब्ध कराना है। अभियान के तहत जागरूकता, स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा उपायों को एक साथ जोड़ते हुए सुरक्षित खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

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डीएस ग्रुप ने इस अभियान के तहत पल्लू प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई -PPE) फिल्टर पेश किया है। यह धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला नैनो-फाइबर फिल्टर है, जिसे साड़ी के पल्लू या दुपट्टे में आसानी से लगाया जा सकता है। इसके बाद यही पल्लू या दुपट्टा खेती के दौरान सुरक्षा कवच का काम करता है। यह फिल्टर कीटनाशकों के महीन कणों, धूल, हानिकारक रसायनों और पीएम 2.5 जैसे प्रदूषकों से बचाव में मदद करता है। कंपनी इन फिल्टरों को बागपत के  7 गांवों में चयनित टेलर की दुकानों, कीटनाशक विक्रेताओं और मेडिकल स्टोर के माध्यम से निःशुल्क उपलब्ध करा रही है।

इस अभियान के तहत मोबाइल जागरूकता वैन, पारंपरिक कठपुतली शो, स्थानीय भाषा में नुक्कड़ नाटक, निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर और घर-घर जाकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन और ग्रामीण समुदाय के सहयोग से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं को कीटनाशकों के संपर्क से होने वाले छिपे स्वास्थ्य जोखिमों और सुरक्षित कृषि पद्धतियों को अपनाने के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। स्वास्थ्य शिविरों में महिला किसानों के ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच तथा सुरक्षा मास्क वितरित किए जा रहे हैं। साथ ही प्रत्येक महिला किसान को सुरक्षित खेती का संदेश देने वाले कैलेंडर और आईने भी दिए जा रहे हैं ताकि सुरक्षित खेती पद्धतियों के प्रति जागरूकता लगातार बनी रहे।

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डीएस ग्रुप के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (कॉर्पोरेट मार्केटिंग) राजीव जैन ने कहा, “महिला किसान भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाती है, लेकिन खेती के दौरान उन्हें जिन स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है, उनके बारे में जागरूकता अभी भी बहुत कम है। हमारे अध्ययन में सामने आया कि कई महिला किसान कीटनाशकों का छिड़काव करते समय साड़ी के पल्लू या दुपट्टे को चेहरे पर बांधकर सुरक्षा का प्रयास करती हैं, जबकि इससे पर्याप्त बचाव नहीं हो पाता। इससे यह स्पष्ट होता है कि उन्हें ऐसे सरल, उपयोगी और उनकी जीवनशैली के अनुरूप सुरक्षा समाधान उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, जिन्हें वे आसानी से अपना सकें। 'पल्लू प्रोटेक्शन इक्विपमेंट' जागरूकता अभियान के माध्यम से डीएस ग्रुप केवल जागरूकता ही नहीं फैला रहा, बल्कि ऐसे व्यावहारिक और सुलभ समाधान भी उपलब्ध करा रहा है, जो महिला किसानों के लिए खेती को अधिक सुरक्षित और स्वस्थ बना सकते हैं।”

यह पहल डीएस ग्रुप के 'फार्महर (FarmHER)' कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके जरिए देशभर की महिला किसानों के योगदान को सम्मान देने और उनकी मदद करने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का मकसद महिला किसानों तक स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़ी जरूरी जानकारी आसान भाषा और उनकी जरूरत के मुताबिक पहुंचाना है, ताकि वे सुरक्षित और बेहतर तरीके से खेती कर सकें। कंपनी ने पुरुष किसानों का भी ध्यान रखा है। इसके लिए पीपीई (PPE) (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) का एक खास संस्करण तैयार किया गया है, जिसे किसानों के गमछे में लगाया जा सकता है। इससे पुरुष किसान भी खेती के दौरान कीटनाशकों, धूल और अन्य हानिकारक कणों से खुद को बेहतर तरीके से सुरक्षित रख सकेंगे।

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डीएस ग्रुप के बारे में

डीएस ग्रुप (धर्मपाल सत्यपाल ग्रुप) भारत के प्रमुख एफएमसीजी समूहों में से एक है, जो देश और विदेश दोनों जगह अपनी मजबूत मौजूदगी रखता है। यह एक बहु-व्यवसायिक कंपनी है, जिसकी स्थापना 1929 में हुई थी। यह समूह अपने लंबे अनुभव और परंपरा को आधुनिक सोच और विकास के साथ जोड़ते हुए आगे बढ़ रहा है। डीएस ग्रुप का कारोबार कई क्षेत्रों में फैला हुआ है, जैसे फूड और बेवरेज, कन्फेक्शनरी, माउथ फ्रेशनर, हॉस्पिटैलिटी, एग्री बिजनेस, लक्जरी रिटेल और अन्य निवेश। इस समूह के प्रमुख ब्रांड में कैच, पल्स, पास पास, सिल्वर पर्ल्स, क्षीर, रजनीगंधा, ओविनो, एल’ओपेरा, ले मार्चे, बर्थराइट, लवइट, चिंगल्स, गोलमोल, नमः आदि शामिल हैं।

एक कॉर्पोरेट कंपनी के रूप में, डीएस ग्रुप स्पष्ट मूल्यों के आधार पर काम करता है, जिनका उद्देश्य समाज कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए योगदान देना है। कंपनी के मुख्यालय को (यूएसजीबीसी) यूएस ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल के मौजूदा भवन O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) प्रोग्राम वर्जन 4.0 के तहत (LEED) लीडरशिप इन एनर्जी एंड एनवायरनमेंटल डिज़ाइन प्लैटिनम सर्टिफिकेट मिला है। इसके अलावा, डीएस मुख्यालय को यूएसजीबीसी से LEED ज़ीरो कार्बन सर्टिफिकेट भी मिला है। डीएस ग्रुप ने अपने सभी व्यवसायों में “डबल मटेरियलिटी असेसमेंट” प्रक्रिया शुरू की है, जिससे कंपनी की आर्थिक गतिविधियां वैश्विक ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासन) मानकों के अनुरूप रहें। इसके अलावा, पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को दिखाते हुए, कंपनी के भारत में 30 स्थानों पर मौजूद बिजनेस यूनिट्स में वॉटर पॉजिटिविटी इंडेक्स 1.8 है।

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