किडनी फेलियर का बड़ा कारण बन सकता है UTI... इन लक्षणों को भूलकर भी न करें इग्नोर

पेशाब के दौरान जलन या बार-बार टॉयलेट जाने की समस्या को अक्सर लोग मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन यानी UTI अगर समय पर ठीक न हो तो यह किडनी को हमेशा के लिए खराब कर सकता है.

Advertisement
यूटीआई एक तरह का इंफेक्शन है जो अंदर ही अंदर फैल भी सकता है. (Photo: AI Generated) यूटीआई एक तरह का इंफेक्शन है जो अंदर ही अंदर फैल भी सकता है. (Photo: AI Generated)

आजतक लाइफस्टाइल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:00 PM IST

UTI Symptoms and Tips: यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) एक ऐसी स्थिति है जिसे ज्यादातर लोग शुरुआती दौर में गंभीरता से नहीं लेते. आमतौर पर यह इंफेक्शन ब्लैडर तक ही सीमित रहता है लेकिन यदि बैक्टीरिया शरीर के अंदरूनी हिस्सों में फैलने लगते हैं तो यह किडनी के लिए बड़ा खतरा बन जाता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यदि UTI का सही समय पर इलाज न किया जाए तो किडनी की कार्यक्षमता पूरी तरह खत्म हो सकती है जिससे डायलिसिस और ट्रांसप्लांट तक की नौबत आ सकती है.

Advertisement

जब संक्रमण किडनी तक पहुंच जाए

नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विक्रम कालरा के मुताबिक, जब संक्रमण का इलाज समय पर नहीं होता, तो बैक्टीरिया नीचे से ऊपर की ओर यानी किडनी की तरफ बढ़ने लगते हैं. वहीं जब एक साधारण UTI किडनी तक पहुंच जाता है तो इसे पायलोनेफ्राइटिस कहा जाता है. इस स्थिति में मरीज को तेज बुखार, कंपकंपी, पीठ के निचले हिस्से में दर्द और उल्टी जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं. यह इस बात का संकेत है कि अब इंफेक्शन केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि किडनी के फंक्शन को प्रभावित करने लगा है.

किडनी को कैसे पहुंचता है नुकसान?

नेशनल हेल्थ सर्विस के मुताबिक, लंबे समय तक UTI रहने से किडनी के टिश्यूज पर घाव यानी स्कारिंग (Scarring) हो सकती है. यह स्कारिंग किडनी की खून को फिल्टर करने की क्षमता को धीरे-धीरे कम कर देती है. इससे न केवल हाई ब्लड प्रेशर की समस्या पैदा होती है बल्कि आगे चलकर क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) का खतरा भी बढ़ जाता है. गंभीर मामलों में, यह इन्फेक्शन खून में भी फैल सकता है जो जानलेवा भी साबित हो सकता है.

Advertisement

बचाव के लिए क्या करें?

UTI को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका भरपूर पानी पीना है ताकि बैक्टीरिया शरीर से बाहर निकलते रहें. साथ ही पर्सनल हाइजीन का ध्यान रखना और पेशाब को ज्यादा देर तक न रोकना भी बेहद जरूरी है. अगर आपको पेशाब में जलन, बार-बार जाने की इच्छा या पेट के निचले हिस्से में दबाव महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर एंटीबायोटिक्स का कोर्स पूरा करना चाहिए.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement