Agenda Aajtak 2019: कानून बनाना हमारा काम, डंडा नहीं चला सकते- रविशंकर प्रसाद

मैं कभी नहीं चाहूंगा कि मैं डंडा चलाकर बताऊं कि जज कैसे काम करेंगे. कानून का ख्याल रखना ज्यूडिशरी का काम है. इसीलिए मैंने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा है कि आप इस बात की चिंता करें कि फास्ट ट्रैक कोर्ट जल्द से जल्द सजा दे.

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रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री (फोटो- शेखर घोष, इंडिया टुडे) रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री (फोटो- शेखर घोष, इंडिया टुडे)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 दिसंबर 2019,
  • अपडेटेड 3:35 PM IST

  • 12 साल तक की बच्ची के साथ रेप की घटना होती है तो दोषी को फांसी की सजा
  • हमने दो महीने में जांच की प्रक्रिया पूरी करने के लिए कानून बना दिया है
  • कानून का ख्याल रखना और लागू करना ज्यूडिशरी का काम है

देश के नंबर वन न्यूज चैनल आजतक के 'एजेंडा आजतक' के आठवें संस्करण के दूसरे दिन केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद शामिल हुए और उन्होंने हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया. देश में लगातार महिलाओं के साथ होने वाली रेप और हिंसा के मामले में न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली देरी को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारा काम है कानून बनाना, कानून बन गया है. 12 साल से छोटी बच्ची के साथ अगर रेप की घटना होती है तो दोषी को फांसी की सजा होगी. हमने दो महीने में जांच की प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी कानून बना दिया है. हमने कानून बना दिया कि ट्रायल फास्ट ट्रैक होगा. अब इन सब को लागू करना है.

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उन्होंने आगे कहा, 'मैं कभी नहीं चाहूंगा कि मैं डंडा चलाकर बताऊं कि जज कैसे काम करेंगे. कानून का ख्याल रखना ज्यूडिशरी का काम है. इसीलिए मैंने हाई कोर्ट के सभी मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा है कि आप इस बात की चिंता करें कि फास्ट ट्रैक कोर्ट जल्द से जल्द सजा दे. मुझे बेहद खुशी है कि माननीय मुख्य न्यायाधीश ने भी एक कमिटी बनाई है जो इस तरह के केसों की निगरानी करेंगे. तनाव होते हैं, होंगे लेकिन देश में कानून का राज होना चाहिए.'  

इससे पहले उन्होंने कहा, 'देश में हाल के दिनों में बेटियों के साथ जो हुआ है उस मामले में मैंने मुख्य न्यायाधीश से बात की है. मैंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को खत लिखा है और बताया है कि कानून में जो संशोधन हुए हैं, उसमें रेप और पॉक्सो के केस में जांच की प्रक्रिया दो महीने में पूरी हो. सरकारें इसको सुनिश्चित करें. हमने हाई कोर्ट के सारे चीफ जस्टिस को भी पत्र लिखा है कि 6 महीने में ट्रायल प्रक्रिया पूरी हो. इसकी चिंता अदालतें करें. 400 स्पेशल कोर्ट बनाए जा रहे हैं जिसमें डेढ़ सौ बनने शुरू हो चुके हैं. इसमें मैं भी सहयोग करूंगा जिससे ट्रायल समय पर हो सके.'   

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उन्होंने आगे कहा, 'मुझे न्यायिक प्रक्रिया में पूरा भरोसा है. भारत के लोकतंत्र को आगे बढ़ाने में स्वतंत्र न्यायपालिका की बड़ी भूमिका रही है. मैं कोई पोस्ट ऑफिस नहीं हूं कि यहां से फाइल आई और गई. मैं भी कानून मंत्री होने के नाते हिस्सेदार हूं. कॉलेजियम नाम भेजता है सुप्रीम कोर्ट नाम भेजता है. हमें अपनी राय देने का अधिकार है. कई बार हम लोगों की राय मानी भी जाती है. हमारी कोई तकरार नहीं है. मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं.'

ज्यूडिशरी और सरकार के बीच कोई तकरार नहीं

रविशंकर प्रसाद ने आगे कहा कि सरकार और न्यायपालिका के बीच कॉमन कमिटमेंट है. ज्यूडिशरी का काम है जजमेंट देना, हमारा काम है इंफ्रास्ट्रक्चर देना और मिल के काम करना है. ताकि अच्छे जजों की नियुक्ति हो. जजों की नियुक्ति की वजह टकराव नहीं है. हमलोगों की बातचीत होती रहती है. 

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