चुनावों में कितनी ईवीएम खराब हुईं, आयोग ने क्या किया, बता रहे हैं CEC

पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के दौरान आई पांच शिकायतों की जांच का जिक्र करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि धांधली नहीं यह लापरवाही का मामला था.

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एजेंडा आजतक में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा (फोटो-aajtak) एजेंडा आजतक में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा (फोटो-aajtak)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 18 दिसंबर 2018,
  • अपडेटेड 6:25 PM IST

आजतक के खास कार्यक्रम 'एजेंडा आजतक' में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने ईवीएम पर उठ रहे सवालों पर बेबाकी से जवाब दिया. हाल में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन राज्यों में 1 लाख 76 हजार पोलिंग बूथ थे, जिनमें से सिर्फ पांच बूथों की शिकायत आई. इन शिकायतों की जांच में पाया गया कि यह धांधली का नहीं लापरवाही का मामला था.

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मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम में 1 लाख 76 हजार पोलिंग बूथों पर चुनाव संपन्न हुआ था. इनमें से सिर्फ पांच बूथों को लेकर राजनीतिक दलों ने शिकायत की थी. एमपी में जिस ट्रक को फर्जी बताया जा रहा था, दरअसल वह सही था. बस उसकी गलती थी कि उसने नंबर प्लेट नहीं लगाया था. ठीक इसी तरह होटल में ईवीएम को लेकर जो शिकायत आई थी, उसकी जांच में पता चला कि स्थानीय प्रशासन से नाराज होकर कर्मचारी होटल में आराम फरमाने चला गया था. धांधली जैसा कोई मामला नहीं था. लापरवाही बरतने के कारण उसे सस्पेंड कर दिया गया. वहीं, तीसरी शिकायत में आरोप था कि प्रत्याशी के घर में ईवीएम को रखा गया. लेकिन जांच में पता चला कि महिला कर्मचारी ईवीएम को बीच सड़क पर खड़ी जीप में रखकर अपने रिश्तेदार से मिलने चली गई थी, जिसकी सुरक्षा में जवान तैनात थे. इस लापरवाही के कारण महिला को भी सस्पेंड कर दिया गया.

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उन्होंने कहा कि ईवीएम पर लगाए गए सारे आरोप बेबुनियाद है. चुनाव 1 लाख 76 बूथों पर हुए. शिकायत केवल पांच बूथों की आई. अगर देखा जाए तो यह आंकड़ा एक फीसदी भी नहीं है. लेकिन हमारी कोशिश है कि भविष्य में ऐसी भी गलती कभी नहीं दोहराई जाए. हम चाहते हैं कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर कोई भी दल या व्यक्ति सवाल न उठा सके.

मध्यप्रदेश चुनाव के नतीजों में हुई देरी पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इस बार 13 हजार बूथ ज्यादा थे. साथ ही कई जगहों पर प्रत्याशी की संख्या भी अधिक थी और हर राउंड की गिनती के बाद सर्टिफिकेट जारी करने की वजह से गिनती में देरी हुई.

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