'मेरा घर सार्वजनिक शौचालय लगता था' तंगी में बिता बचपन, बताते हुए रो पड़ा कॉमेडियन

कॉमेडियन राजीव ठाकुर ने अपनी जिंदगी के कठिन दौर को साझा किया है, जिसमें उन्होंने गरीबी और संघर्ष का सामना किया. कपिल शर्मा शो से मशहूर हुए राजीव ने बताया कि कैसे एक छोटे कमरे में परिवार के साथ जीवन बिताना पड़ा और पिता की फैक्ट्री के नुकसान के बाद आर्थिक तंगी झेली.

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राजीव ठाकुर का छलका दर्द (Photo: Social Media) राजीव ठाकुर का छलका दर्द (Photo: Social Media)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली ,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 1:32 PM IST

टेलीविजन-फिल्म और शोज में कॉमेडियन के जोक्स पर हंसना अच्छा लगता है. लगता है कि इन कॉमेडियन की जिंदगी कितनी मजेदार होती है. पर कई बार सच्चाई इससे बहुत अलग होती है. कपिल शर्मा शो पर अपनी कॉमेडी से दर्शकों को हंसाने वाले राजीव ठाकुर ने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा दुख शेयर किया है. राजीव ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी का एक हिस्सा गरीबी में बिताया है. गरीबी का जिक्र करते हुए वो इमोशनल हो गए. 

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राजीव ठाकुर की दर्दभरी कहानी 
वैभव मुंजाल के पॉडकास्ट पर राजीव ठाकुर ने अतीत के मुश्किल दिनों को याद किया. वो कहते हैं कि मेरा सफर ऐसे हालात में शुरू हुआ, जिन्हें मैं याद भी नहीं करना चाहता. अगर मैं आज लोगों को इसके बारे में बताऊं, तो ये बनावटी लग सकता है, क्योंकि इसे कंफर्म करने वाला कोई नहीं है. लोग अकसर कहते हैं कि आपको अपने दर्द को स्टैंड-अप कॉमेडी में बदलना चाहिए. मैं कभी-कभी ऐसा करता भी हूं, लेकिन उन जोक्स को परफॉर्म करते समय भी दर्द इतना असली होता है कि मैं बैकस्टेज रोने लगता हूं. इसीलिए मैं अपनी जिंदगी के उस दौर के बारे में बहुत कम बोलता हूं.

गरीबी का जिक्र करते हुए राजीव ठाकुर की आंखों में आंसू भर आए. उन्होंने कहा कि ये बिल्कुल पुरानी हिंदी मूवीज जैसा था. पापा की शादी के बाद उन्हें घर से निकाल दिया गया. वो आरामदायक घर से निकलकर एक कमरे वाले घर में रहने लगे. वही एक कमरा हमारा बेडरूम, लिविंग रूम, किचन और बाथरूम था. राजीव ने कहा कि उसी कमरे में 3 बच्चे पैदा हुए और पले-बढ़े. अगर एक शख्स नहा रहा होता, तो बाकी चार लोगों को बाहर इंतजार करना पड़ता था. मुझे लगता था कि हमारा घर कोई पब्लिक टॉयलेट है.

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राजीव ने बताया कि उनके पिता की अमृतसर में एक धागे की फैक्ट्री थी, जो 1984 के दंगों में बर्बाद हो गई थी. वो कहते हैं कि मेरे पिता बेरोजगार थे. हम किराया नहीं दे पाते थे. कमरे में सिर्फ एक 40-वाट का बल्ब था. मुझे बल्ब की पीली रोशनी पसंद नहीं थी. इसलिए जब मैं किसी के घर ट्यूब लाइट देखता, तो यही सोचता कि हमारे घर में ऐसी रोशनी कब आएगी. राजीव ने कहा कि परिवार चलाने के लिए उनकी मां कपड़े सिलती थीं. उस दौर में वो बिना लिफ्ट वाले घर में रहे. कॉमेडियन कहा कि पुराने दिनों को देखकर लगता है कि आज उन्होंने उम्मीद से दोगुना हासिल कर लिया है. 
 

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