बवाल के बाद एक बार फिर से चर्चा में हैं रानी पद्मावती

फिल्म निर्देशक संजयलीला भंसाली की फिल्म 'पद्मावती' पर हुआ विवाद अभी खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. राजपूतों की करनी सेना का ये आंदोलन अब चित्तौड़ महल तक पहुंच गया है...

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चित्तौड़गढ़़ दुर्ग चित्तौड़गढ़़ दुर्ग

शरत कुमार

  • नई दिल्ली,
  • 16 फरवरी 2017,
  • अपडेटेड 12:10 AM IST

फिल्म निर्देशक संजयलीला भंसाली की पिटाई के बाद से चल रहा राजपूतों की करनी सेना का आंदोलन अब चित्तौड़ दुर्ग तक पहुंच गया है. रानी पद्मिनी का विषय लगातर तूल पकड़ता जा रहा है जिसके चलते अब विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़़ दुर्ग से जुड़ी कहानियां हटाने के लिए और पद्मिनी महल में लगे कांच को हटाने के लिए करनी सेना ने आंदोलन शुरु कर दिया है.

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करनी सेना ने चित्तौड़ के दुर्ग में घुसकर प्रदर्शन किया और वहां पद्मिनी महल में लगे उस कांच के टुकड़े को हटाने के लिए कहा जिसे गाईड्स वहां आनेवाले टूरिस्टों को दिखाते हैं कि इसी कांच में अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मावती को देखा है. साथ ही टूरिस्ट गाईड्स द्वारा इन गलत बातों को बताने पर परिणाम भुगतने की भी चेतावनी दी है. इसे लेकर करनी सेना ने पुरातत्व विभाग को एक सप्ताह का समय देते हुए चेतावनी दे डाली है.

उधर चित्तौड़ के जौहर स्मृति संस्थान ने दुर्ग और पद्मावती के इतिहास को फिर से लिखना शुरु कर दिया है. इनका कहना है कि पद्मावती के रानी होने के सुबूत तो किले में हैं लेकिन अलाउद्दीन खिलजी ने इस दुर्ग को कभी जीता था इसके सुबूत कहीं नही है. अलाउद्दीन खिलजी और पद्मावती का प्रसंग शूफी कवि मल्लिक मुहम्मद जायसी ने शेर शाह सूरी के काल में 1540 में लिखा है. जबकि पद्मावती उसके 237 साल पहले रानी हुई थी.

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दरअसल संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बन रही फिल्म में रानी पद्मावती के अलाउद्दीन खिलजी के सपने की प्रेमिका रानी पद्मिनी को बताने की बात पर मचे बवाल का विरोध जयपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलो में भी झेलना पड़़ा था. जिसके बाद से यह विषय लगातार आगे बढ़ते हुए अब आ पहुंचा है चित्तौड़गढ़़ दुर्ग के पद्मिनी महल में जहां लगे कांच को हटाने और गाईड्स द्वारा पर्यटकों को गलत जानकारी देने के विरोध में एक बार फिर से करनी सेना ने पुरातत्व विभाग को सात दिन में दोनों मांगों को पूरा करने की चेतावनी दे डाली.

करनी सेना के नेता गोविंद सिंह खांगोरत ने कहा कि झूठे इतिहास की बातें हम किले में टूरिज्म विभाग और पुरातत्व विभाग को नही बताने देंगे. कांच का अविष्कार रानी पद्मिनी के कार्यकाल के काफी बाद में हुआ है. ऐसे में उस वक्त खिलजी के पद्मावती के कांच में देखने की बातें झूठी है.


गौरतलब है कि पद्मावती फिल्म के विवाद के बाद चित्तौड़गढ़ देखनेवाले टूरिस्टों की संख्या बढ़ी है और खासकर लोग पद्मावती महल देखने जरुर जा रहे हैं.

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