बॉलीवुड के सुपरस्टार राज कुमार के बारे में कहा जाता है कि उनके दौर में जैसी फैन फॉलोइंग उनकी थी वैसी उससे पहले किसी के लिए भी नहीं देखी गई थी. राज कुमार का जन्म 8 अक्टूबर, 1926 को बलूचिस्तान में हुआ. फिल्मों में आने से पहले उन्होंने मुंबई पुलिस में सब इंस्पैक्टर की भी नौकरी की.
1957 में मदर इंडिया फिल्म से वे पॉपुलर हुए और मरते दम तक फिल्मों में काम किया. 3 जुलाई, 1996 को कैंसर की बीमारी के कारण उनका इंतेकाल हो गया. मगर आज भी उनके डायलॉग्स जिस तरह से लोगों के बीच फेमस हैं शायद ही किसी दूसरे एक्टर के होंगे. राज कुमार की पुण्यतिथि पर बता रहें हैं उनके कुछ फेमस डायलॉग्स.
वक्त 1965- चिनॉय सेठ, जिनके अपने घर शीशे के हों, वो दूसरों पर पत्थर नहीं फेंका करते.
सौदागर 1991- जब राजेश्वर दोस्ती निभाता है तो अफसाने लिखे जाते हैं और दुश्मनी करता है तो तारीख बन जाती है.
तिरंगा 1992- ना तलवार की धार से, ना गोलियों की बौछार से.. बंदा डरता है तो सिर्फ परवर दिगार से.
बेताज बादशाह 1994- हम अपने कदमों की आहट से हवा का रुख़ बदल देते हैं.
सौदागर 1991- जानी, हम तुम्हे मारेंगे, और ज़रूर मारेंगे, लेकिन वो बंदूक भी हमारी होगी, गोली भी हमारी होगी और वक़्त भी हमारा होगा.
सूर्या 1989- दिल्ली तक बात मशहूर है कि राजपाल चौहान के हाथ में तंबाकू का पाइप और जेब में इस्तीफा रहता है. जिस रोज़ इस कुर्सी पर बैठकर हम इंसाफ नहीं कर सकेंगे, उस रोज़ हम इस कुर्सी को छोड़ देंगे. समझ गए चौधरी!
तिरंगा 1992- हम तुम्हें वो मौत देंगे जो ना तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी और ना ही कभी किसी मुजरिम ने सोची होगी.
सौदागर 1991- शेर को सांप और बिच्छू काटा नहीं करते.. दूर ही दूर से रेंगते हुए निकल जाते हैं.