रीमेक भी दमदार, आमिर भी असरदार... 'सितारे जमीन पर' की कामयाबी से साबित हुई ये 5 चीजें

सितारे जमीन पर' सिर्फ कमाई के मामले में ही कामयाब नहीं है, बल्कि इस फिल्म की कामयाबी फिल्म बिजनेस की बहुत सारे ऐसे अनकहे नियमों का भी जवाब है जो पिछले कुछ सालों में बनने लगे थे. आइए बताते हैं कैसे...

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'सितारे जमीन पर' की सक्सेस से साबित हुईं ये 5 बातें 'सितारे जमीन पर' की सक्सेस से साबित हुईं ये 5 बातें

सुबोध मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 23 जून 2025,
  • अपडेटेड 3:00 PM IST

सुपरस्टार आमिर खान की फिल्म 'सितारे जमीन पर' शुक्रवार को थिएटर्स में रिलीज हुई. रिलीज से पहले इस फिल्म के ट्रेलर को जनता से बहुत पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला था. लेकिन फिर भी 'सितारे जमीन पर' जिस तरह की फिल्म है, इसे बॉक्स ऑफिस पर बड़ा धमाका करने वाली फिल्म नहीं माना जा रहा था.

'सितारे जमीन पर' को थिएटर्स में रिलीज हुए अब तीन दिन हो चुके हैं और पहले वीकेंड में ही इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जो आंकड़े जुटाए हैं, उनसे ट्रेड एक्सपर्ट्स भी सरप्राइज हो गए हैं. 10 करोड़ की रेंज में ओपनिंग कलेक्शन करने वाली ये फिल्म, अगले दो दिनों में आमिर के करियर में सबसे बड़े वीकेंड कलेक्शन करने वाली फिल्मों में से एक बन गई. शुक्रवार से संडे तक आते-आते इस फिल्म की कमाई ऑलमोस्ट तीन गुना बढ़ गई. 

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पहले दिन के बाद 'सितारे जमीन पर' का सफर जिस तरह आगे बढ़ा है, कई सालों तक एक किस्से की शक्ल में सुनाया जाएगा. रिपोर्ट्स के हिसाब से 80 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म वीकेंड में ही 57 करोड़ का कलेक्शन कर चुकी है और सुपरहिट कहलाने के लिए तैयार है. मगर 'सितारे जमीन पर' सिर्फ कमाई के मामले में ही कामयाब नहीं है, बल्कि इस फिल्म की कामयाबी फिल्म बिजनेस की बहुत सारे ऐसे अनकहे नियमों का भी जवाब है जो पिछले कुछ सालों में बनने लगे थे. आइए बताते हैं कैसे... 

1. रीमेक्स भी चल सकते हैं  
लॉकडाउन के बाद से बॉलीवुड में करीब 20 से ज्यादा ऐसी फिल्में फ्लॉप हो चुकी हैं जो रीमेक थीं. इनमें साउथ से लेकर, हॉलीवुड तक के रीमेक शामिल हैं. फ्लॉप रीमेक्स में अक्षय कुमार की 'बच्चन पांडे', सलमान खान की 'किसी का भाई किसी की जान', ऋतिक रोशन-सैफ अली खान की 'विक्रम वेदा' और कार्तिक आर्यन की 'शहजादा' जैसी फिल्में शामिल हैं. खुद आमिर की ही पिछली फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' ऑस्कर जीतने वाली हॉलीवुड फिल्म 'फॉरेस्ट गंप' का रीमेक थी और ये बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. 

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इन फिल्मों के फ्लॉप होने से ये परसेप्शन बना कि अब रीमेक फिल्में नहीं चलेंगी. इसीलिए जब स्पेनिश फिल्म 'कैम्पियोनीज' से रीमेक होकर 'सितारे जमीन पर' बनी तो कई बार कहा गया कि ये फिल्म भी कुछ खास कमाल नहीं कर पाएगी. मगर कहानी के दूसरे पहलू पर लोगों का ध्यान नहीं गया. बॉलीवुड में पिछले कुछ सालों से जो रीमेक बने उनमें से अधिकतर खराब रीमेक के उदाहरण भी माने जा सकते हैं. ऊपर से रीमेक ऐसी फिल्मों के बने जो ओटीटी या दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर खूब देखी गईं. पहले इस तरह के रीमेक इसलिए चल जाते थे क्योंकि लोग ऑरिजिनल फिल्म तक नहीं पहुंच पाते थे. 

'सितारे जमीन पर' पोस्टर (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

'सितारे जमीन पर' जिस फिल्म का रीमेक है वो खुद या उसका हॉलीवुड रीमेक 'चैम्पियंस', हिंदी दर्शकों में बहुत पॉपुलर नहीं रहे. ऊपर से आमिर की फिल्म में कहानी को जिस तरह इंडियन बनाया गया, वो जनता को पसंद आया. इस फिल्म की कामयाबी ये साबित करती है कि रीमेक अभी भी कामयाब हो सकते हैं, बशर्ते ऑरिजिनल फिल्म हिंदी दर्शकों तक ना पहुंची हो और रीमेक में कहानी को नए तरीके से ट्रीट किया गया हो. 

2. अभी भी चल सकती हैं सोशल ड्रामा फिल्में
लॉकडाउन के बाद से जिस तरह बड़े बजट की मसाला एंटरटेनर फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर राज किया, उससे ये भी एक परसेप्शन बनने लगा कि ये एक्शन-मसाला फिल्मों का दौर है. या फिर अब बॉक्स ऑफिस पर सीक्वल चलेंगे. माना जाने लगा कि लॉकडाउन के बाद सोशल ड्रामा फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई करने का दौर जा चुका है. 

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2021 से 2024 तक बॉक्स ऑफिस पर सबसे बड़ी हिट्स अधिकतर एक्शन फिल्में या बड़े बजट की ग्रैंड सेटअप वाली फिल्में रहीं जैसे- सूर्यवंशी, RRR, जवान, पठान, एनिमल. या फिर बॉक्स ऑफिस पर सीक्वल्स छाए रहे जैसे- KGF 2, पुष्पा 2, गदर 2, भूल भुलैया 3 या स्त्री 2. लॉकडाउन के बाद वाले सालों में 'द कश्मीर फाइल्स' या 'द केरला स्टोरी' को छोड़कर कोई भी ड्रामा फिल्म बहुत बड़ी हिट नहीं रही जिसने 200 करोड़ या ज्यादा का कलेक्शन किया हो. लेकिन ये दोनों फिल्में कंट्रोवर्शियल पॉलिटिकल मुद्दों पर बेस्ड थीं. 

'सितारे जमीन पर' लॉकडाउन के बाद आई एक दुर्लभ सोशल ड्रामा फिल्म है जो एक महत्वपूर्ण मैसेज और कॉमेडी का कॉम्बिनेशन लेकर आई है. इसमें कोई भी ऐसा फॉर्मूला नहीं है जो बॉक्स ऑफिस पर हिट होने की गारंटी देता हो. फिर भी पहले वीकेंड में ही इस फिल्म की जैसी ग्रोथ हुई है, वैसी लॉकडाउन के बाद बहुत कम फिल्मों ने देखी है. 

3. सिर्फ बजट ही नहीं, कहानी होनी चाहिए बड़ी 
लॉकडाउन के बाद शाहरुख खान का कमबैक 'पठान' और 'जवान' जैसी बड़ी फिल्मों से हुआ. अक्षय कुमार ने अपने कमबैक के लिए 'सम्राट पृथ्वीराज' और 'बड़े मियां छोटे मियां' जैसी बड़े बजट की फिल्में ट्राई कीं. सलमान ने बड़े कमबैक के कोशिश 'टाइगर 3' और 'सिकंदर' जैसी फिल्मों से की थी. 

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इन ट्रेंड से अलग आमिर ने 'सितारे जमीन पर' से कमबैक किया है जो रिपोर्ट्स के हिसाब से 80 करोड़ की फिल्म है. इसका बजट लॉकडाउन के बाद, कई बड़े स्टार्स की फिल्मों के बजट का आधा भी नहीं है. मगर 'सितारे जमीन पर' की खासियत इसकी कहानी है. इमोशन, कॉमेडी, ड्रामा और सोशल मैसेज का ये कॉम्बिनेशन आमिर का कमबैक लेकर आया है. ये दिखाता है कि लॉकडाउन के बाद का दौर, बहुत सोच-परखकर सिनेमा देखने वालों का है. अगर फिल्म उनके इमोशंस को अपील नहीं करती है तो वो टिकट नहीं खरीदते, चाहे उसके हीरो का नाम और बजट कितना भी तगड़ा हो. 

4. सोशल मीडिया की नफरत से नहीं पड़ता फिल्म पर असर 
लॉकडाउन के बाद वाले साल आमिर खान के लिए बहुत स्ट्रगल भरे रहे हैं. 'लाल सिंह चड्ढा' के फ्लॉप होने से लेकर, अपने पुराने बयानों और पर्सनल रिश्तों तक के लिए सोशल मीडिया ट्रोल्स ने उनकी इमेज खराब करने की कोशिश बहुत की. आमिर पर भी चीजों का इतना असर पड़ा कि एक वक्त तो वो एक्टिंग से ही रिटायर होने पर विचार कर रहे थे. 

'सितारे जमीन पर' में आमिर खान (क्रेडिट: सोशल मीडिया)

आमिर को लेकर सोशल मीडिया पर नेगेटिविटी फैलाने वाले ट्रोल्स इतने एक्टिव रहे कि 'सितारे जमीन पर' के वक्त भी बहुत सारे हैंडल्स ने उन्हें टारगेट किया. जबकि इस फिल्म के ट्रेलर को मिल रहा पॉजिटिव रिस्पॉन्स सभी को साफ नजर आ रहा था. लेकिन आमिर ने 'सितारे जमीन पर' के प्रमोशन में ही अपने इंटरव्यूज में ये बार-बार कहा कि सोशल मीडिया की नेगेटिविटी किसी अच्छी फिल्म को नुक्सान नहीं पहुंचा सकती. 

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उन्होंने जनता से सिर्फ अपनी फिल्म देखने के लिए कहा. जनता ने पहले दिन आमिर की फिल्म को मौका दिया और पहले ही दिन से जो तारीफें मिलनी शुरू हुईं, वो 'सितारे जमीन पर' की धमाकेदार शुरुआत की सबसे बड़ी वजह बनीं. 

5. कहीं नहीं जा रहे आमिर 
'लाल सिंह चड्ढा' फ्लॉप होने को बहुत लोगों ने आमिर के सुपरस्टारडम का अंत बता दिया था. आमिर ने खुद भी लंबा ब्रेक लिया और बीच में वो खुद एक्टिंग से दूर होते नजर आए. इसे कई बार यूं देखा गया कि आमिर अब शायद ही उस तरह कभी बॉलीवुड के काम आएं जैसे लॉकडाउन के पहले आते थे. लेकिन 'सितारे जमीन पर' जैसी सोशल मैसेज वाली फिल्म से आमिर ने ये भी दिखाया है कि कंटेंट के मामले में लोगों का उनपर विश्वास अभी भी बरकरार है और वो इसे मजबूत करने वाली कहानियां बड़े पर्दे पर लाने में अभी भी सक्षम हैं. 

'सितारे जमीन पर' की आजमाइश का एक पैमाना ये भी था कि ये प्रॉपर 'आमिर खान फिल्म' है या नहीं? एक 'आमिर खान फिल्म' में अच्छे मैसेज के साथ कॉमेडी और एंटरटेनमेंट का वो कॉम्बो भी होता है जो जनता को मैसेज-डिलीवरी के बीच बोर नहीं होने देता बल्कि सीट्स से बांधे रखता है. 'रंग दे बसंती', '3 इडियट्स' और 'तारे जमीन पर' जैसी फिल्में एक स्टार के तौर पर आमिर के उस कमिटमेंट का सबूत हैं जो वो समाज के प्रति रखते हैं.  

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'सितारे जमीन पर' भी इसी कमिटमेंट को दिखाती है. फिल्म में इस फैक्टर का वजनदार साबित होना ये बताता है कि आमिर अगर दमदार कंटेंट लाएंगे तो मल्टीप्लेक्स से लेकर सिंगल स्क्रीन तक और मेट्रो शहरों से लेकर टियर 2-टियर 3 शहरों की ऑडियंस तक की ऑडियंस थिएटर्स में पहुंचेगी. इसलिए आमिर फैक्टर एक-दो फिल्मों की नाकामी से कमजोर नहीं होने वाला.

'सितारे जमीन पर' ने अभी बॉक्स ऑफिस पर पहला ही वीकेंड बिताया है. मगर इन तीन दिनों में ही फिल्म ने इशारा कर दिया है कि ये आगे भी बड़े कमाल करने वाली है. पहले ही हफ्ते में ये बॉक्स ऑफिस से अपना बजट रिकवर कर लेगी और अगले करीब दो हफ्तों तक इसके सामने कोई बड़ी फिल्म नहीं रिलीज होने वाली. ऐसे में अब नजरें इस बात पर रहेंगी कि 'सितारे जमीन पर' बॉक्स ऑफिस पर क्या नए कमाल करती है. 

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