ऑस्ट्रेलियन एक्ट्रेस-मॉडल सलोनी चोपड़ा इन दिनों अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी की वजह से चर्चा में हैं. वो रेस 3 फिल्म में नजर आ चुकी हैं. हाल ही में उन्होंने परिवार, विरासत (Inheritance) और बेटियों के अधिकार को लेकर एक लंबी पोस्ट शेयर की है. सलोनी ने बताया कि उनकी मां की वसीयत (Will) की बात से शुरू हुई एक बातचीत ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया.
मां की वसीयत पर भाई ने कही ये बात
सलोनी ने बताया कि कुछ साल पहले उनकी मां अपनी वसीयत को लेकर बात कर रही थीं. उस दौरान उनके भाई ने कहा कि संपत्ति को बराबर-बराबर बांटने की बजाय टीना (सलोनी के घर का नाम) को ज्यादा हिस्सा मिलना चाहिए.
पहले तो सलोनी को लगा कि उनका भाई मजाक कर रहा है. यहां तक कि उनकी मां ने भी कहा कि शायद वह पागल हो गया है. लेकिन बाद में भाई ने अपनी बात की वजह भी बताई.
'महिलाओं को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है'
सलोनी के मुताबिक, उनके भाई का कहना था कि महिलाओं को जिंदगी में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. कई महिलाएं तलाक के बाद आर्थिक परेशानियों से गुजरती हैं, अकेले बच्चों की जिम्मेदारी उठाती हैं और समाज में कई तरह के भेदभाव का सामना करती हैं.
इसी वजह से उनके भाई का मानना था कि सिर्फ बराबर हिस्सेदारी नहीं, बल्कि जरूरत और परिस्थितियों को देखकर फैसला होना चाहिए.
महिलाओं के अधिकार पर रखी अपनी बात
सलोनी ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि भारत में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का कानूनी अधिकार काफी देर से मिला. उन्होंने महिलाओं के संपत्ति अधिकारों से जुड़े कई लेखों और रिपोर्ट्स का भी जिक्र किया.
उनका कहना है कि कई पीढ़ियों तक महिलाओं को आर्थिक रूप से पीछे रखा गया, इसलिए आज समानता के साथ-साथ न्याय (Equity) की भी बात होनी चाहिए.
'मेरा भाई परफेक्ट नहीं, लेकिन...'
सलोनी ने साफ किया कि उनका भाई कोई परफेक्ट इंसान नहीं है, लेकिन इस मामले में उसकी सोच उन्हें गर्व महसूस कराती है. उन्होंने लिखा कि अगर पुरुष सच में महिलाओं का साथ देना चाहते हैं, तो उन्हें ऐसे मुद्दों पर खुलकर बात करनी चाहिए. सलोनी ने सवाल उठाया कि ऐसे पुरुषों की तारीफ क्यों नहीं होती, जो बराबरी और महिलाओं के अधिकार की बात करते हैं.
सलोनी की यह पोस्ट अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है. कुछ लोग उनकी बात से सहमत हैं, तो कुछ का मानना है कि विरासत का बंटवारा बराबरी से ही होना चाहिए. कुल मिलाकर, उनकी इस पोस्ट ने महिलाओं के अधिकार और संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर नई बहस छेड़ दी.
विदेश की पुरानी नीतियों का भी दिया उदाहरण
सलोनी चोपड़ा ने अपनी बात को मजबूत करने के लिए विदेशों के पुराने कानूनों का भी जिक्र किया. उन्होंने लिखा कि भारत में 1950 के दशक तक महिलाएं अपनी संपत्ति की मालिक नहीं बन सकती थीं. वहीं अमेरिका में 1974 तक महिलाएं बिना किसी पुरुष (Male Co-signer) के अपने नाम पर मॉर्गेज (होम लोन) नहीं ले सकती थीं.
इसके अलावा सलोनी ने बताया कि भारत में बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबरी का कानूनी अधिकार साल 2005 में हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम के बाद मिला. उनका कहना था कि सदियों तक महिलाओं को आर्थिक रूप से पीछे रखा गया, इसलिए सिर्फ बराबरी (Equality) नहीं, बल्कि न्यायसंगत हिस्सेदारी (Equity) पर भी चर्चा होनी चाहिए.
उन्होंने अपनी पोस्ट में महिलाओं के संपत्ति अधिकारों से जुड़े कई आर्टिकल और रिपोर्ट्स भी शेयर किए और कहा कि इतिहास को समझे बिना आज की बराबरी की बहस अधूरी है.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क