'जन नायक' लीक मामले में बड़ा खुलासा, 1.2 करोड़ लोगों ने देख ली थलपति विजय की फिल्म

मद्रास हाई कोर्ट ने 'जन नायक' लीक मामले में आरोपी दो लोगों की जमानत याचिका खारिज कर दी है. मद्रास कोर्ट का कहना है कि जांच अभी भी जारी है.

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जन नायक पर मद्रास HC में सुनवाई (Photo: YT/ Director Films) जन नायक पर मद्रास HC में सुनवाई (Photo: YT/ Director Films)

आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:16 PM IST

साउथ सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के सीएम विजय की मच-अवेटेड फिल्म 'जन नायक' रिलीज से पहले ही लीक हो गई थी. अब मद्रास हाई कोर्ट ने 'जन नायक' लीक मामले में शामिल दो मुख्य आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. कोर्ट में सुनवाई के दौरान जो आंकड़े सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं.

दरअसल सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि यह फिल्म अभी सिनेमाघरों तक पहुंची भी नहीं थी कि उससे पहले ही करीब 1.2 करोड़ लोग इसका अनसर्टिफाइड (बिना सेंसर हुआ) पायरेटेड वर्जन ऑनलाइन देख चुके थे. पायरेसी की यह घटना फिल्म की टीम और मेकर्स के लिए एक बहुत बड़ा झटका मानी जा रही है.

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मद्रास हाई कोर्ट ने नहीं दी राहत
'द हिंदू' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस सी. कुमारप्पन ने 2 जुलाई को इस मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी एस. रजनी और जयप्रकाश को जमानत देने से साफ मना कर दिया. अदालत के सामने यह बात रखी गई कि जब तक पुलिस और साइबर सेल की टीमें इस गैर-कानूनी पायरेटेड कॉपी को इंटरनेट से हटाने और इसका प्रसार रोकने की कोशिश करतीं, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और करोड़ों लोग इसे ऑनलाइन देख चुके थे.

एक सोची-समझी साजिश थी लीक
अभियोजन पक्ष यानी सरकारी वकील ने कोर्ट में बड़ा दावा करते हुए कहा कि फिल्म का लीक होना कोई इत्तेफाक या दुर्घटना नहीं थी, बल्कि इसे एक सुनियोजित साजिश के तहत अंजाम दिया गया था. जांच में सामने आया कि एक फ्रीलांस फिल्म एडिटर ने चालाकी से एडिटिंग स्टूडियो से फिल्म के महत्वपूर्ण हिस्सों को एक हार्ड ड्राइव में कॉपी कर लिया था. इसके बाद उसने अपने दो सगे भाइयों की मदद से उन कड़ियों को एक साथ जोड़ा और पूरी फिल्म तैयार कर ली. इस तैयार कॉपी को पहले गूगल ड्राइव पर अपलोड किया गया और वहां से यह देखते ही देखते 'तमिल रॉकर्स' जैसी खतरनाक पायरेसी वेबसाइट्स तक पहुंच गई, जहां से यह पूरी दुनिया में फैल गई.

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क्यों खारिज हुई आरोपियों की जमानत?
हाई कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता और आरोपों की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों आरोपियों को जेल में ही रखने का फैसला सुनाया. कोर्ट ने माना कि जो प्रिंट लीक हुआ है, वह पूरी तरह से अनसर्टिफाइड है. सरकारी पक्ष की तरफ से दलील दी गई कि इस मामले की जांच अभी बहुत ही नाजुक और महत्वपूर्ण मोड़ पर है. इस पायरेसी नेटवर्क से जुड़े कुल 21 आरोपियों में से दो आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. पुलिस को अंदेशा है कि अगर इस वक्त आरोपियों को जमानत पर रिहा किया गया, तो वे बचे हुए आरोपियों को छिपाने, सबूतों को नष्ट करने या गवाहों को डराने-धमकाने का काम कर सकते हैं. इसके अलावा, इस पूरे रैकेट के पीछे हुए पैसों के लेन-देन (फाइनेंशियल ट्रेल) का पता लगाना भी अभी बाकी है.

बता दें कि इस बड़ी मुसीबत से निपटने और फिल्म को इंटरनेट पर और ज्यादा फैलने से रोकने के लिए इसके निर्माता 'केवीएन प्रोडक्शंस' ने भी मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया थाच. मेकर्स की अपील पर तुरंत संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश जारी किया था. इस आदेश के तहत सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स (ISPs) को निर्देश दिए गए थे कि वे उन तमाम वेबसाइटों, लिंक्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को तुरंत ब्लॉक करें, जहां इस फिल्म को गैर-कानूनी तरीके से स्ट्रीम या शेयर किया जा रहा है. 

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क्यों खास है फिल्म 'जन नायक'?
एच. विनोथ के निर्देशन में बनी 'जन नायक' की सबसे बड़ी वजह यह है कि सुपरस्टार विजय ने राजनीति में कदम रख दिया है और वे तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बन चुके हैं, ऐसे में सिनेमा को हमेशा के लिए अलविदा कहने से पहले यह उनके एक्टिंग करियर की आखिरी फिल्म होने वाली है. 

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