मुलायम के चहेतों में इन नामों पर फंसेगा पेंच, क्या अखिलेश देंगे टिकट?

चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद मुलायम सिंह ने भी अखिलेश से अपने चहेतों के लिए टिकट मांगा था. मुलायम ने 38 लोगों की एक सूची उन्हें सौंपते हुए टिकट देने की मांग की थी.

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अखिलेश अखिलेश

संदीप कुमार सिंह

  • लखनऊ,
  • 19 जनवरी 2017,
  • अपडेटेड 8:01 AM IST

गठबंधन के गुणा-भाग में फंसी सपा के लिए बड़ा सवाल है कि वह टिकट कब डिक्लियर करेगी. कयास लगाए जा रहे थे कि गुरुवार शाम तक अखिलेश पहले और दूसरे चरण के लिए 135 टिकटों की घोषणा कर देंगे लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. हालांकि गठबंधन को लेकर स्थिति साफ हो चुकी है. सपा सिर्फ कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. आरएलडी एक बार फिर अकेले दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी. मुलायम ने अपने चहेतों के लिस्ट में शिवपाल और अपर्णा के लिए टिकट की सिफारिश की है. अब देखना होगा कि अपर्णा पर अखिलेश क्या निर्णय लेते हैं.

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लिस्ट फाइनल करेंगे अखिलेश
यह बात साफ है कि अखिलेश यादव ही सपा के कैंडिडेट लिस्ट पर अंतिम मुहर लगाएंगे. चुनाव आयोग का फैसला आते ही सपा प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम ने कहा था कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जल्द ही सपा की नई लिस्ट जारी करेंगे. खुद अखिलेश भी कह चुके हैं कि लिस्ट फाइनल करना उनकी पहली प्राथमिकता है. अखिलेश ने यह बात भी कही थी कि दोनों लिस्टों में 90% की समानता है. कुछ ही सीटों पर मतभेद हैं जिन्हें जल्द सुलझा लिया जाएगा.

मुलायम दे चुके हैं अपनी लिस्ट
चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद मुलायम सिंह ने भी अखिलेश से अपने चहेतों के लिए टिकट मांगा था. मुलायम ने 38 लोगों की एक सूची उन्हें सौंपते हुए टिकट देने की मांग की थी. नेता जी की लिस्ट में नारद राय, ओम प्रकाश सिंह, अंबिका चौधरी, शादाब फातिमा, शिवपाल यादव (पहले आदित्य यादव का नाम था), गायत्री प्रजापति, विजय यादव (देवरिया), अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह (रुद्रपुर), नाशी खान, रामदर्शन यादव (आजमगढ़), विश्वनाथ सिंह (फाजिलनगर), राजकिशोर सिंह, शारदा प्रताप शुक्ला, अपर्णा यादव, सोबरन सिंह यादव, मोहम्मद रेहान, कमर हसन (बुढ़ाना), रामवीर यादव (जसराना), आशीष यादव (एटा), शकुंतला निषाद (तिंदवारी), संदीप शुक्ला सुलतानपुर (सदर) का नाम प्रमुख है.

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मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई. चुनाव आयोग के फैसले के बाद से शांत, फिलहाल सपा में महज एक कार्यकर्ता की भूमिका में. मुलायम सिंह की 38 लोगों कि अंतिम लिस्ट में जसवंतनगर सीट से उनका नाम है (आपको बता दें कि पहले शिवपाल का नाम नहीं था, हालांकि उनके बेटे आदित्य यादव का नाम था). बुधवार को शिवपाल ने मीडिया में इतना जरूर कहा कि, "हां, मैं चुनाव लड़ूंगा." पार्टी में उनके समर्थक जसवंतनगर में जुट गए हैं. उनकी कोशिश है कि इस बार चुनाव में सबसे बड़ी जीत जसवंतनगर सीट से शिवपाल यादव की ही हो.


मुलायम की लिस्ट में तीन नाम ऐसे हैं जिन पर पेंच फंस सकता है. पहला नाम है मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव का. मुलायम ने अपर्णा को लखनऊ की कैन्ट विधानसभा सीट से टिकट देने के लिए कहा है. कैन्ट विधानसभा सीट कांग्रेस के पास थी. इस सीट से रीता बहुगुणा जोशी ने जीत दर्ज की थी (हालांकि अब वे बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं). गठबंधन की शर्त के मुताबिक इस सीट पर कांग्रेस की ही दावेदारी होगी. ऐसे में सपा को अपर्णा के लिए टिकट कांग्रेस से मंगाना पड़ेगा.

दूसरे नंबर पर हैं गायत्री प्रजापति, ये जीते थे अमेठी विधानसभा सीट से. अमेठी कांग्रेस का गढ़ रही है. इस सीट पर भी कांग्रेस दावेदारी कर सकती है. गायत्री ने कांग्रेस की अमिता सिंह को हराया था. इससे पहले यह सीट कांग्रेस के पास ही थी.

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तीसरे नंबर पर हैं राकेश वर्मा, राज्यसभा सांसद बेनी प्रसाद वर्मा के पुत्र राकेश वर्मा को शिवपाल ने टिकट दिया था. यह टिकट उन्हें अखिलेश के खास मंत्री अरविन्द सिंह गोप का टिकट काट कर दिया गया था. अब देखना होगा कि अखिलेश क्या कदम उठाते हैं.


यादव परिवार से इस बार मुलायम की छोटी बहू अपर्णा यादव के अलावा शिवपाल यादव के बेटे आदित्य यादव के चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है. इसके अलावा अंशुल यादव (जिला पंचायत अध्यक्ष, इटावा) भी टिकट के लिए मजबूत दावेदार हो सकते हैं. आपको बता दें कि अंशुल मुलायम के छोटे भाई राजपाल यादव के बेटे हैं और 2016 में उन्हें निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष चुना गया था.

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