पिता के सामने बेटी तो भाभी के सामने देवर... औरैया की इस सीट पर दो परिवारों में जंग!

औरैया की विधूना विधान सभा सीट पर एक तरफ बेटी अपने पिता से बगावत करके चुनावी मैदान में उतर आई है, दूसरे तरफ देवर ने अपनी भाभी को हराने के लिए 'राजनीतिक दुश्मन' से हाथ मिला लिया है.

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एक मंच पर रिया शाक्य और दिनेश वर्मा एक मंच पर रिया शाक्य और दिनेश वर्मा

aajtak.in

  • औरैया,
  • 18 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 11:24 AM IST
  • विधूना सीट पर लड़ाई रोचक
  • बीजेपी ने रिया शाक्य को दिया टिकट

औरैया की विधूना विधान सभा सीट पर लड़ाई रोचक हो गई है. एक तरफ बेटी अपने पिता से बगावत करके चुनावी मैदान में उतर आई है, दूसरे तरफ देवर ने अपनी भाभी को हराने के लिए 'राजनीतिक दुश्मन' से हाथ मिला लिया है. विधूना सीट पर आज चुनाव प्रचार थम जाएगा और 20 तारीख को यहां वोट पड़ेंगे.

विधूना विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने रिया शाक्य को मैदान में उतारा है. रिया शाक्य, मौजूदा विधायक विनय शाक्य की बेटी हैं. 2017 में बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीते विनय शाक्य ने हाल में ही सपा ज्वॉइन कर ली. इसके बाद बेटी ने बगावत कर दी. बगावत का नतीजा रहा कि बीजेपी ने बेटी को ही चुनाव मैदान में उतार दिया.

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वहीं, समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले विधूना से पांच बार विधायक रहे धनीराम वर्मा के छोटे बेटे दिनेश वर्मा ने हाल में ही सपा छोड़कर बीजेपी की सदस्यता ले ली. दरअसल, सपा ने दिनेश की भाभी रेखा वर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है. दिनेश और रेखा के रिश्ते तल्ख रहते हैं. यही वजह है कि दिनेश ने ऐन वक्त पर सपा छोड़ दी.

विधूना सीट से 2017 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके दिनेश वर्मा ने समाजवादी पार्टी पर परिवार तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि सपा ने दो परिवारों को तोड़ेने का काम किया, हम उनको तोड़ देने का काम करेंगे, पहले समाजवादी पार्टी में परिवार जोड़ने का काम किया जाता था लेकिन अब नई समाजवादी में परिवार तोड़ने का काम किया जा रहा है.

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आजतक से बात करते हुए दिनेश वर्मा ने कहा, 'हम लोगों ने अब यह निर्णय लिया है जिन लोगों ने घरों को तोड़ने का काम किया है, उजाड़ने का काम किया है, हम उन लोगों के ही घरों को तोड़ देंगे, उजाड़ देंगे.'

हालांकि, दिनेश वर्मा के सपा छोड़ने पर उनकी भाभी और प्रत्याशी रेखा वर्मा का कहना है कि दिनेश वर्मा से समाजवादी पार्टी को कोई नुकसान नहीं होगा, जब उन्हें समाजवादी पार्टी ने सम्मान दिया तब भी वह समाजवादी पार्टी से खुश नहीं हुए तो भारतीय जनता पार्टी के क्या होंगे.   

(रिपोर्ट- सूर्या शर्मा)

 

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