यूपी: BJP, BSP, SP और कांग्रेस के टिकट पर जीते चुनाव, इस बार निर्दलीय दंगल में उतरे शिव बाबू

शिवेंद्र सिंह को मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता है. उनका परिवार हालात को देखते हुए पार्टियां बदलते आया है. समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में घर वापसी करने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार भाजपा सिसवा सीट पर शिवेंद्र सिंह को ही मैदान में उतारेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

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समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता लेते हुए शिवेंद्र सिंह. समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता लेते हुए शिवेंद्र सिंह.

अमितेश त्रिपाठी

  • महाराजगंज,
  • 12 फरवरी 2022,
  • अपडेटेड 9:50 AM IST
  • शिवेंद्र सिंह को मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता है
  • हाल ही में सपा छोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं शिवेंद्र

सपा छोड़कर हाल ही में भाजपा का दामन थामने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री शिवेंद्र सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन भरा है. पर्चा भरते समय शिवेंद्र ने कहा कि मैंने पार्टी से बगावत नहीं की है. मैं भाजपा की कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करना चाहता हूं. लेकिन महाराजगंज की जनता के आग्रह पर पर्चा भर रहा हूं.

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महाराजगंज जिले की सिसवा सीट से विधायक पूर्व मंत्री शिवेंद्र सिंह को मौसम वैज्ञानिक भी कहा जाता है. यह परिवार हालात को देखते हुए पार्टियां बदलते आया है. समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में घर वापसी करने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार भाजपा सिसवा सीट पर शिवेंद्र सिंह को ही मैदान में उतारेगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इस बार राजपरिवार का सियासी गणित फेल हो गया और भाजपा ने वर्तमान विधायक प्रेस सागर पटेल को ही दोबारा टिकट थमा दिया. 

यूपी की राजनीति में चर्चित विधानसभा सीटों में महराजगंज जिले की सिसवा सीट भी शामिल है. यहां की सियासत राजपरिवार के इर्द-गिर्द ही घूमती आई है. यहां की जनता उन नेताओं के हाथ में भी क्षेत्र की बागडोर सौंप चुकी है, जिन्होंने दमदारी से राजपरिवार की खिलाफत की.

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1968 से अब तक सिसवा विधानसभा के चुनावी परिणाम पर नजर डालें तो यहां की चुनावी हार-जीत राजपरिवार तक ही सिमट कर रह गई है. हालात ऐसे हैं कि पिछले 14 चुनावों में राजपरिवार के 2 सदस्य ही विधायक की कुर्सी पर काबिज रह चुके हैं. 14 में से सिर्फ 5 बार ही राजपरिवार के बाहर के लोग विधायक चुने गए. परिवार के शिवेन्द्र सिंह उर्फ शिव बाबू 35 साल के सियासी सफर में सपा, कांग्रेस, बसपा और भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं. इस बार देखना दिलचस्प होगा कि सिसवा की सियायत किस करवट बैठती है.

लेटर की राजनीति पर आरोप-प्रत्यारोप

भाजपा सरकार में पूर्व मंत्री रहे शिवेंद्र सिंह से आज तक ने सवाल किया कि वर्तमान विधायक आरोप लगाते हैं कि थानों पर आप 2 लेटर लिखते हैं. एक पकड़वाने के लिए और दूसरा छुड़वाने के लिए. इस पर शिवेंद्र सिंह ने जवाब दिया कि वे 100 लेटर लिखते हैं. अगर सिसवा की जनता को लेटर पसंद हैं तो वे लिखते रहेंगे. उन्होंने विधायक पर आरोप लगाया कि वे तो सीधे थाने पर ही चले जाते हैं.

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