यूपी के रामपुर में बदलते राजनीतिक समीकरण... आजम खान की घटती ताकत और इलाके में बीजेपी का बढ़ता कद

कभी सपा का गढ़ रही यूपी की रामपुर लोकसभा सीट पर अब बीजेपी का कब्जा है. पिछले दो चुनावों में इस सीट पर बीजेपी का कद लगातार बढ़ रहा है. अब आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर ये सीट सपा और बीजेपी के बीच वर्चस्व की लड़ाई बन गई है, जहां सपा अपने पुराने दुर्ग को फिर से पाने की जुगत में है तो वहीं, बीजेपी रामपुर में अपनी पैठ मजबूत करने में लगी है.

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बीजेपी नेता घनश्याम लोधी और आजम खान. (फाइल फोटो) बीजेपी नेता घनश्याम लोधी और आजम खान. (फाइल फोटो)

मिलन शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 05 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 7:29 AM IST

साल 2022 में समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े दुर्ग में भारतीय जनता पार्टी ने सेंध लगाते हुए उपचुनाव में रामपुर लोकसभा सीट पर अपना कब्जा जमा लिया. रामपुर सपा नेता आजम खान का गढ़ कहा जाता है. पर इन दिनों वो जेल में हैं, लेकिन रामपुर में आज भी आजम का सियासी वर्चस्व बरकरार है.

हाल ही में सपा नेता ने सीतापुर जेल से पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए अखिलेश यादव को यहां से चुनाव लड़ने के लिए आमंत्रित किया था. पर सपा प्रमुख ने आजम खेमे के विरोध को दरकिनार करते हुए दिल्ली के मौलवी मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को रामपुर लोकसभा सीट से मैदान में उतारा है, जबकि बीजेपी ने इस सीट से अपने वर्तमान सांसद घनश्याम लोधी को चुनावी दंगल में उतारा है.

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स्थानीय लोगों का आरोप है कि नदवी अखिलेश यादव द्वारा मैदान में उतारे गए पैराशूट उम्मीदवार हैं, क्योंकि आजम खान मैदान में नहीं हैं. मौलाना नदवी मूल रूप से रामपुर शहर से लगभग- 70-80 किलोमीटर दूर रामपुर निर्वाचन क्षेत्र सुअर-टांडा के रहने वाले हैं.  

इमाम मौलवी से लेकर एक राजनीतिक उम्मीदवार तक

आजम खान की मंजूरी के बिना ... समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को रामपुर में लोगों का जनादेश जीतने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. यही वजह है कि नदवी अब आजम के वफादारों और इलाके के प्रभावशाली नेताओं से मिलने की जुगत में लगे हुए हैं. अब्दुल सलाम आजम कैंप के नेता माने जाते हैं. वो उसी तुर्क जाति से आते हैं, जिससे नदवी हैं. बीते दिनों सलाम ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन दाखिल किया था, लेकिन अब वह सपा के भारत गठबंधन के उम्मीदवार के रूप में नदवी का समर्थन कर रहे हैं.

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सपा प्रत्याशी नदवी ने बताया कि वो 12 साल की उम्र में सुअर-टांडा (ग्रामीण रामपुर) में अपने पैतृक घर से रामपुर शहर चले गए और फिर नई दिल्ली में संसद के बगल वाली मस्जिद में मौलवी बनने के लिए लखनऊ चले गए. 'मैं भी 2005 में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को नमाज़ पढ़ता था… मैं हमेशा इस बात को और अधिक समझता था कि राष्ट्र के प्रति उनकी भूमिका और रोष क्या है… उन्हें देखकर मैं उनके जैसा बनना चाहता था, लेकिन मेरी राजनीति में कोई पैठ नहीं थी. कुछ महीने पहले समाजवादी पार्टी सुप्रीमो से मेरी मुलाकात हुई और मैंने उन्हें कुछ सुझाव दिए. इसके बाद उन्होंने मुझसे मिलने के लिए कहा. उन्हें मेरा सुझाव पसंद आया और मुझे रामपुर से नामांकन दाखिल करने के लिए कहा गया.'

क्या रामपुर जीतने के लिए उन्हें आजम का समर्थन प्राप्त है?

इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मेरा मानना है. यह केवल उनके आशीर्वाद से संभव है... असीम राजा और असीम खान अलग नहीं हैं. वे दोनों समाजवादी पार्टी में हैं...लेकिन कभी-कभी परिवार के मुखिया की बात सभी को सुननी होती है. साथ ही उन्होंने कहा कि सीएए/एनआरसी यहां कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं है, किसी की नागरिकता नहीं छीनी जा रही है. शुरू में लोगों को भ्रम था, लेकिन अब नहीं.

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बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग

बीजेपी ने अपने जिताऊ उम्मीदवार को मैदान में उतारने का फैसला किया है. घनश्याम लोधी ने 2022 के उपचुनाव में रामपुर सीट पर शानदार जीत हासिल की थी. हालांकि, रामपुर में लगभग 50% से अधिक मुस्लिम मतदाता हैं. लेकिन इलाके में भाजपा की सोशल इंजीनियरिंग हिंदुओं और अन्य जातियों के वोटों को मजबूत करना है. लोधी को उम्मीद है कि लोध जैसी जातियां, राजपूत, कमेरा, सैनी, पाल, कश्यप, कुर्मी, जाटव और यहां तक कि यादव... इस क्षेत्र में भाजपा को वोट दे सकते हैं.

लोधी ने रामपुर के अंतर्गत बिलासपुर क्षेत्र में अपने अभियान में कहा, अब रामपुर कोई हॉट सीट नहीं है, लेकिन हमारे पास केंद्र में मोदी लहर है और रामपुर में लोधी लहर है. सपा ने हमेशा तुष्टीकरण और धर्म की राजनीति की है, मतदाता अब भोले-भाले नहीं हैं... अब वे देखेंगे कि कोई वहां बेहतर है या यहां बेहतर है... रामपुर में किसी बाहरी को वोट नहीं मिलेगा.'

रामपुर में वोटों का गणित 

  • मुसलमान 50.57%
  • हिंदू 45.97% 
  • सिखों 2.8%
  • ईसाई 0.39%
  • अनुसूचित जाति (SC) 13.2%
  • 25.2% लोग शहरी क्षेत्रों में रहते हैं,जबकि 74.8% लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं

2019 में पड़े वोट: 16.68 लाख

8.41 लाख मुसलमान
8.26 लाख हिंदू

रामपुर में मुस्लिम वोट

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  • तुर्क - 1.45 लाख
  • पठान- 1.35 लाख

रामपुर में हिंदू वोट

  • लोध- 1.15 लाख
  • यादव- 50 हजार
  • जाटव- 1.5 लाख
  • सैनी- 80 हजार
  • पाल- 35 हजार (गडरिया या शेफर्ड)
  • कश्यप 30 हजार
  • कुर्मी- 70 हजार

2019 के चुनाव में हुआ कांटे का मुकाबला

उत्तर प्रदेश में रामपुर निर्वाचन क्षेत्र का नाम रामपुरिया चाकू से लिया गया है. यहां अब तक का सबसे दिलचस्प मुकाबला 2019 के चुनाव में आजम खान और जया प्रदा के बीच देखा गया था, जहां आजम खान ने बीजेपी की उम्मीदवार जया प्रदा को 1.10 लाख वोटों के अंतर से हरा दिया. लेकिन वक्त बदला और रामपुर में सियासी समीकरण भी बदल गए. 2019 के बाद रामपुर में हुए दो उपचुनावों में लोगों का रुझान बीजेपी की ओर झुकता हुआ नजर आया है. जब आजम खान को सजा सुनाई गई तो 2022 के उपचुनाव में बीजेपी के घनयशम लोधी ने जीत हासिल की. इसी तरह दिसंबर 2022 विधानसभा चुनावों में भाजपा के आकाश सक्सेना ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अजीम राजा को 33,000 वोटों से हरा दिया.

10 बार विधायक रह चुके हैं आजम खान

बता दें कि आजम खान रामपुर से 10 बार विधायक और एक बार सांसद रह चुके हैं. पिछले चार दशकों से आजम खान का गढ़ रहे रामपुर में 2019 के बाद बीजेपी ने काफी तेज से अपनी पकड़ मजबूत की है. लेकिन इस बार आजम खान जेल बंद होने के कारण 2024 के चुनाव के मैदान से दूर हैं. 

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इस साल 18 मार्च को रामपुर की एक अदालत ने 2016 में रामपुर के डूंगरपुर इलाके में एक घर को जबरन ध्वस्त करने के मामले में आजम खान को सात साल की सजा सुनाई थी और उन पर 8 लाख का जुर्माना लगाया था. यह पांचवां मामला था, जिसमें खान को सजा सुनाई गई है, जबकि वो दो मामलों में बरी हो चुके हैं.

'हम सपा प्रत्याशी को नहीं जानते'

वहीं, एक मतदाता का कहना है कि सपा ने एक ऐसे मौलाना को मैदान में उतारकर गलती की जो यहां रहता ही नहीं है. हम एक ऐसा उम्मीदवार चाहते थे जो यहां रहता हो... हम उम्मीदवार को नहीं जानते हैं और हम उससे संपर्क भी नहीं करते हैं. ऐसा लगता है कि सपा ने आसानी से यह सीट भाजपा को दे दी है.

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