बेलसंड विधानसभा सीटः क्या जनता तीसरी बार जताएगी JDU पर भरोसा?

बिहार की बेलसंड विधानसभा सीट से सुनीता सिंह चौहान विधायक हैं. 2010 से ही लगातार इस सीट से सुनीता सिंह ही विधायक चुनी जा रही हैं. यह सीट जेडीयू के लिए एक सुरक्षित गढ़ के तौर पर उभरी है.

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बेलसंड की विधायक सुनीता सिंह चौहान (फाइल फोटो) बेलसंड की विधायक सुनीता सिंह चौहान (फाइल फोटो)

अभिषेक शुक्ल

  • नई दिल्ली,
  • 20 सितंबर 2020,
  • अपडेटेड 10:45 PM IST
  • बेलसंड की विधायक हैं सुनीता सिंह चौहान
  • 2 बार से लगातार जीत रही हैं विधानसभा चुनाव
  • जेडीयू के लिए सुरक्षित गढ़ बना बेलसंड

बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से एक बेलसंड विधानसभा की सीट संख्या 30 है. बेलसंड विधानसभा सीट सीमामढ़ी जिले के अंतर्गत आती है. यह सीट शिवहर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. जनता दल यूनाइटेड की सुनीता सिंह चौहान इस विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं. इस सीट पर जेडीयू का दबदबा है. 2010 से ही इस सीट पर जेडीयू की सत्ता बरकरार है.

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2015 का चुनाव

2015 के चुनाव में महागठबंधन बनाम राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) की लड़ाई में जीत महागठबंधन की हुई थी. सुनीता सिंह चौहान ने एनडीए के सहयोगी दल लोक जनशक्ति पार्टी के प्रत्याशी मोहम्मद नासिर अहमद को हराया था. इस चुनाव में जेडीयू को 33,785 वोट मिले थे, वहीं नासिर अहमद को 28,210 वोट हासिल हुए थे. इस साल कुल 18 लोगों ने चुनाव लड़ा था जिनमें 3 महिलाएं थीं. 16 प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो गई थी. कुल 52.04 फीसदी लोगों ने वोट डाला था.

इससे पहले साल 2010 में हुए चुनाव में भी सुनीता सिंह को ही जीत मिली थी. तब उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के प्रत्याशी संजय कुमार सिंह को मात दी थी. लगातार 2 बार के विधानसभा चुनावों में यहां जेडीयू को सत्ता हासिल हुई.

सुनीता सिंह फरवरी 2005 में हुए विधानसभा चुनाव में भी जीती थीं लेकिन किसी भी पार्टी को इस चुनाव में स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और कोई भी पार्टी अपने सहयोगियों के साथ सरकार बनाने की स्थिति में नहीं रही. ऐसे में दोबारा चुनाव कराने का निर्णय लिया गया. जब अक्टूबर 2005 में चुनाव संपन्न हुए तब जेडीयू की सुनीता सिंह को हार का मुंह देखना पड़ा और आरजेडी के संजय कुमार गुप्ता चुनाव जीत गए.

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सीट का इतिहास

बेलसंड विधानसभा में पहली बार 1957 में वोटिंग कराई गई. तब प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रमानंद सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी जमुना प्रसाद सिंह को हरा दिया था. 1962 के चुनाव में भी रमानंद सिंह ही जीते थे. उन्होंने जमुना प्रसाद सिंह को हराया था. इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस, जेएनपी, लोजपा, आरजेडी भी जीत दर्ज कर चुकी हैं. फिलहाल यह सीट 2010 से जेडीयू का गढ़ के तौर पर बनकर उभरी है. इस विधानसभा में कुल 2,35,495 वोटर हैं. 

विधायक का परिचय 

सुनीता सिंह चौहान बीते 2 बार के चुनाव से विधायक हैं. वे तीन बार विधायक रह चुकी हैं. उनका जन्म सुपौल के बरैल गांव में हुआ था. इनके पति राणा रणधीर सिंह चौहान भी जेडीयू के नेता हैं. सुनीता सिंह की गितनी नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में होती है. सुनीता सिंह समाजसेवा क्षेत्र से जुड़ी रही हैं. इन्होंने सक्रिय रूप से साल 2000 में इन्होंने राजनीति में एंट्री ली थी. देखने वाली बात यह है कि क्या 2 बार से लगातार जेडीयू के गढ़ के तौर पर उभरे बेलसंड विधानसभा में इस बार भी जेडीयू जीत का परचम लहरा पाती है या नहीं.

किस-किसके के बीच है मुकाबला?

बेलसंड विधानसभा सीट पर कड़ा मुकाबला एनडीए बनाम महागठबंधन ही है. महागठबंधन की ओर से संजय कुमार गुप्ता चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ एनडीए की ओर से जनता दल (यूनाइटेड) की ओर से सुनीता सिंह चौहान चुनावी समर में हैं. जेडीयू ने एक बार फिर सुनीता सिंह चौहान पर ही भरोसा जताया है.

अन्य उम्मीदवारों में रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया(अठावले) की ओर से राम रे, जन अधिकार पार्टी से सुबोध कुमार राय, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की ओर से धर्मेंद्र सिंह, लोक जनशक्ति पार्टी की ओर से नासिर अहमद, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी से शमीम आलम, दी प्लूरल्स पार्टी की ओर से राकेश कुमार सिंह, भारतीय पार्टी(लोकतांत्रिक) की ओर से बलराम कुमार चुनाव लड़ रहे हैं.

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52.38% लोगों ने किया वोट

बेलसंड विधानसभा में दूसरे चरण के तहत वोटिंग हुई. दरअसल इस चरण में 17 जिलों की 94 सीटों पर वोट डाले गए थे. इस चुनाव में कुल 52.38% वोट पड़े. चुनाव के नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.

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