नंदीग्राम हादसाः कई अफसरों पर गिरी गाज, लापरवाही को बख्शने के मूड में नहीं ECI

निर्वाचन आयोग नंदीग्राम घटना के बाद स्टार प्रचारकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मानक प्रोटोकॉल को लेकर एहतियाती निर्देशिका जारी करने पर भी विचार कर रहा है. इन निर्देशों का स्टार प्रचारकों को सख्ती से पालन करना होगा. भविष्य में चुनावों के दौरान ऐसी घटनाएं होती हैं तो उस जिले के डीएम और एसपी फौरन हटाए जाएंगे.

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चुनाव आयोग लापरवाही के खिलाफ सख्त (सांकेतिक तस्वीर) चुनाव आयोग लापरवाही के खिलाफ सख्त (सांकेतिक तस्वीर)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2021,
  • अपडेटेड 8:10 AM IST
  • सुरक्षा निदेशक के निलंबन-तबादले की सिफारिश
  • डीएम विभु गोयल का गैर चुनावी पद पर तबादला
  • एसपी प्रवीण भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किए गए

नंदीग्राम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जख्मी होने की वजह तलाशने वाली रिपोर्ट में सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े आला अधिकारी नप गए हैं. सुरक्षा निदेशक, एसपी और डीएम पर गाज गिरी है. इस मामले में किसी का निलंबन तो किसी का तबादला और किसी पर दोनों सजा एक साथ दी जा रही है.

मुख्यमंत्री ममता की सुरक्षा व्यवस्था में भारी चूक और लापरवाही के लिए सुरक्षा निदेशक विवेक सहाय पर निलंबन और तबादले की तलवार गिरी. सहाय के बारे में कहा जाता है कि वह वीवीआईपी के लिए तय बुलेटप्रूफ वाहनों में बैठकर घूमा करते थे. 

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निर्वाचन आयोग (ECI) के निशाने पर विवेक तब आए जब मामले की जांच के सिलसिले में विभिन्न रिपोर्ट्स से यही पता चला कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित राज्य के वीवीआईपी की सुरक्षा व्यवस्था के निदेशक विवेक सहाय का रवैया भी विचित्र, गैरजिम्मेदाराना और लचर दिखा. वो खुद वीवीआईपी के लिए तैनात बुलेटप्रूफ वाहनों में घूमते हैं जबकि खुद ममता बुलेटप्रूफ के बजाए साधारण वाहन में.

सहाय के खिलाफ सख्त कार्रवाई की सिफारिश
सीएम ममता बनर्जी भी अक्सर सुरक्षा व्यवस्था की कोई परवाह नहीं करतीं और प्रोटोकॉल तोड़ती रहती हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा से जुड़ी कभी भी और कैसी भी अप्रिय स्थिति की आशंका बनी रहती है.

निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा निदेशक विवेक सहाय के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की सिफारिश राज्य प्रशासन से की है. आयोग ने तत्काल प्रभाव से सहाय को निलंबित कर उनकी ड्यूटी गैर चुनावी पद पर रखने को कहा गया है. यानी सहाय शंट पोस्टिंग पर जाएंगे.  

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मीटिंग में सख्त एक्शन लेने के आदेश देने के कुछ देर बाद ही आयोग ने तत्काल प्रभाव से जिलाधिकारी (डीएम) विभु गोयल का तबादला गैर चुनावी पद पर कर दिया. गोयल की जगह 2005 बैच की आईएएस अधिकारी स्मिता पांडे ने ले ली.

मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सुरक्षा बंदोबस्त चाक चौबंद रखने में नाकाम माने गए पूर्व मेदिनीपुर के पुलिस अधीक्षक यानी एसपी प्रवीण प्रकाश भी तत्काल प्रभाव निलंबित कर दिए गए. प्रवीण की जगह इस संवेदनशील जिले के पुलिस कप्तान का जिम्मा 2009 बैच के आईपीएस सुनील यादव ने संभाला.
 
आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को ये आगाह किया है कि ममता मामले में दर्ज एफआईआर की जांच शिद्दत से हो और निर्णायक हो. ड्यूटी में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारी कर्मियों को सख्त सजा मिले.

कई अफसरों पर गिर सकती है गाज
आयोग ने इसी नंदीग्राम में हुई हादसे के मुद्दे पर रविवार को बुलाई गई विशेष बैठक में राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की उच्च स्तरीय समिति बनाकर इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पड़ताल कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की सिफारिश की है. यानी उन लोगों पर गाज गिरना तय है जिन पर कहीं भी ऐसे किसी दौरे के समय वीवीआईपी की सुरक्षा और आसपास ऐसी घटनाओं को रोकने की जिम्मेदारी रहती है.

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निर्वाचन आयोग इस घटना के बाद स्टार प्रचारकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मानक प्रोटोकॉल को लेकर एहतियाती निर्देशिका जारी करने पर भी विचार कर रहा है. इन निर्देशों का स्टार प्रचारकों को सख्ती से पालन करना होगा.

इस घटना में प्रशासन की लापरवाही, सुरक्षा के लचर इंतजाम और अधिकारियों की मनमानी के सबूत मिलने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त तेवर अपनाते हुए कहा है कि अगर भविष्य में चुनावों के दौरान ऐसी घटनाएं होती हैं तो उस जिले के डीएम और एसपी फौरन हटाए जाएंगे. यानी ये घटना भविष्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और निर्भय चुनाव व्यवस्था के लिए मील का पत्थर जरूर बन सकती है.

निलंबन और तबादले के फरमान जारी करने के साथ ही निर्वाचन आयोग ने पंजाब के खुफिया विभाग के पूर्व पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार शर्मा को स्पेशल पुलिस ऑब्जर्वर बनाया है. शर्मा राज्य की विधानसभा चुनाव का इंतजाम देखने वाले दूसरे स्पेशल पुलिस ऑब्जर्वर होंगे. अब तक आयोग ने पूर्व आईपीएस अधिकारी विवेक दुबे को स्पेशल पुलिस ऑब्जर्वर बनाया हुआ है.

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल मुख्य सचिव अलापन बंदोपाध्याय और पुलिस निदेशक को आदेश दिया है कि अगले तीन दिनों के भीतर सहाय के अधीनस्थ और मुख्यमंत्री की सुरक्षा के जिम्मेदार अधिकारियों जो अपनी ड्यूटी निभाने में नाकाम रहे हैं उनकी पहचान कर आयोग को बताएं. उनके खिलाफ समुचित और सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित करें.

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