पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले बीजेपी और टीएमसी के बीच सत्ता को लेकर खींचतान शुरू हो गई है. इसी बीच भारतीय जनता पार्टी सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ बढ़ती एंटी-इनकंबेंसी और वोटर लिस्ट में हुआ बड़ा बदलाव बीजेपी की जीत की राह आसान कर दिया है. SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 1 करोड़ नामों को हटाया गया है, जिससे स्थापित मतदान पैटर्न के टूटने की संभावना है. विश्लेषण बताते हैं कि कांटे की टक्कर वाली सीटों पर बीजेपी बेहतर स्थिति में है.
आंकड़ों के मुताबिक, टीएमसी की जीत का बड़ा हिस्सा केवल मुस्लिम बहुल निर्वाचन क्षेत्रों में केंद्रित है जो राज्यव्यापी स्तर पर 'सीट-एफिशिएंट' नहीं है. इसके विपरीत बीजेपी का वोट वितरण अधिक समान है, जिससे वह करीबी मुकाबले वाली सीटों पर संरचनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में नजर आ रही है. महज 58 विधानसभा सीटों पर 1.92 लाख वोटों का स्विंग बीजेपी को जीत की दहलीज के पार ले जा सकता है.
बीजेपी सूत्रों का दावा है कि टीएमसी की बड़ी जीत के मार्जिन केवल कुछ खास इलाकों तक सीमित हैं, जबकि बीजेपी का वोट बैंक पूरे राज्य में अधिक फैला हुआ है जो उसे सत्ता के करीब ला सकता है.
SIR का असर?
दरअसल, बीजेपी सूत्रों का मानना है कि विशेष गहन संशोधन (SIR) के तहत करीब 1 करोड़ नामों का हटना इस चुनाव का सबसे बड़ा 'एक्स फैक्टर' साबित हो सकता है.
बीजेपी का तर्क है कि इस बदलाव से पुराने समीकरण ध्वस्त हो जाएंगे और कांटे की टक्कर वाली सीटों पर मुकाबला और भी कड़ा हो जाएगा, जहां टीएमसी का वोट बैंक कुछ गढ़ों में सिमटा है तो वहीं बीजेपी की पहुंच अधिक संतुलित है. संरचनात्मक रूप से ये स्थिति बीजेपी को उन सीटों पर बढ़त दिला सकती है. जहां हार-जीत का अंतर बहुत कम रहता है.
TMC के वेस्टेड वोट
आंकड़ों के अनुसार, टीएमसी के पास 114 ऐसी सीटें हैं, जहां जीत का अंतर 10 प्रतिशत से ज्यादा है, जबकि बीजेपी के पास ऐसी केवल 35 सीटें हैं. उधर, 2024 के आधार पर टीएमसी के 55.8 लाख वोट 'बर्बाद' माने जा रहे हैं, क्योंकि ये जीत के जरूरी अंतर से कहीं ज्यादा हैं. इसकी तुलना में बीजेपी के केवल 11.9 लाख वोट इस कैटेगरी में आते हैं.
टीएमसी के अतिरिक्त मार्जिन का आधे से ज्यादा हिस्सा मुस्लिम बहुल सीटों से आता है जो उसकी बढ़त को व्यापक बनाने के बजाय एक जगह केंद्रित कर देता है.
BJP के लिए जीत का समीकरण
बीजेपी सूत्रों का मानना है कि राज्य में कुल वोटों के बजाय सीटों का मार्जिन ज्यादा मायने रखता है. 2024 के बेसलाइन को देखें तो बीजेपी जीत के आंकड़े से केवल एक जोरदार धक्का दूर है.
विश्लेषण बताता है कि टीएमसी के गढ़ों में वोटों का केंद्रीकरण एक भ्रम पैदा करता है, जबकि वास्तव में बड़ी संख्या में सीटें प्रतिस्पर्धा के लिए खुली हुई हैं. वोटर लिस्ट में हुआ भारी फेरबदल और एंटी-इनकंबेंसी इस बार पिछले चुनावी नतीजों को अप्रासंगिक बना सकते हैं.
हिमांशु मिश्रा