संजय निषाद की सीटों पर राजभर की नजर, अंसारी परिवार का डर या सवर्णों की नाराजगी का खतरा

योगी सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अपनी परंपरागत सीट जहूराबाद छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. राजभर की नजर निषाद पार्टी के प्रभाव वाली सीटों पर है, लेकिन सवाल यही है कि वो अपनी सीट क्यों छोड़ रहे हैं. क्या उन्हें अंसारी परिवार के वर्चस्व से डर है या फिर सवर्ण वोटों की नाराजगी का खतरा?

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ओम प्रकाश राजभर क्यों अपनी सीट बदल रहे, क्या अंसारी परिवार के चलते सता रहा डर (Photo-ITG) ओम प्रकाश राजभर क्यों अपनी सीट बदल रहे, क्या अंसारी परिवार के चलते सता रहा डर (Photo-ITG)

कुमार अभिषेक / कुबूल अहमद

  • लखनऊ/नई दिल्ली,
  • 09 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 12:44 PM IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भले ही एक साल के बाद है, लेकिन सियासी बिसात अभी से बिछाई जाने लगी है. सूबे के बदले हुए सियासी समीकरण में योगी सरकार के मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने अपनी परंपरागत जहूराबाद सीट को छोड़ने का मन बना लिया है. राजभर की नजर अब निषाद पार्टी के सियासी प्रभाव वाली सीटों पर है, लेकिन यह बात संजय निषाद को पसंद नहीं आ रही है. 

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ओम प्रकाश राजभर ने गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट छोड़कर आजमगढ़ की अतरौलिया सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, जहां से पिछले चुनाव में निषाद पार्टी लड़ी थी. इतना ही नहीं राजभर ने निषाद पार्टी की जीती हुई जौनपुर की शाहगंज सीट पर भी अपना दावा ठोक दिया है.

सवाल उठता है कि ओम प्रकाश राजभर जिस तरह से एक के बाद एक निषाद पार्टी के प्रभाव वाली सीटों पर अपना दावा ठोक रहे हैं, क्या संजय निषाद इन सीटों को छोड़ने के लिए तैयार होंगे? आखिर जिस जहूराबाद सीट से दो बार विधायक रहे राजभर अब उस सीट को छोड़कर अतरैलिया से क्यों चुनाव लड़ना चाहते हैं? 

निषाद की सीट पर राजभर की नजर
गाजीपुर की जहूराबाद विधानसभा सीट से ओम प्रकाश राजभर लगातार दूसरी बार विधायक हैं. 2017 में बीजेपी के समर्थन से जीते थे तो 2022 में सपा के सहयोगी से जीतने में सफल रहे हैं. इस तरह से जहूराबाद सीट राजभर की परंपरागत सीट बन गई, लेकिन अब 2027 के विधानसभा चुनाव में आजमगढ़ जिले की अतरौलिया सीट से अपनी दावेदारी ठोक दी है.
 
अतरौलिया सीट से 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ रहते हुए निषाद पार्टी ने अपना प्रत्याशी उतारा था. सपा के संग्राम यादव विधायक चुने गए थे जबकि दूसरे नंबर पर निषाद पार्टी के प्रशांत सिंह रहे, जिन्हें 74255 वोट मिले थे. राजभर सिर्फ इसी ही सीट पर नहीं बल्कि जौनपुर की शाहगंज विधानसभा सीट पर अपना दावा ठोक रहे हैं जबकि 2022 में इस सीट से निषाद पार्टी के रमेश सिंह विधायक चुने गए थे. इस तरह निषाद पार्टी की सीटों पर राजभर की नजर लगी हुई है. 

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राजभर अपने बेटे की सीट भी बदल रहे
ओम प्रकाश राजभर सिर्फ अपनी ही सीट नहीं बदल रहे हैं बल्कि अपने बेटे की सीट को भी बदलना चाहते हैं. राजभर के बेटे अरविंद राजभर 2024 लोकसभा चुनाव में घोसी सीट से मैदान में उतरे थे, लेकिन सपा के राजीव राय से चुनाव हार गए थे. इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में अरविंद राजभर वाराणसी की शिवपुर विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे थे, सपा का उन्हें समर्थन हासिल था. इसके बाद भी अरविंद राजभर को बीजेपी प्रत्याशी अनिल राजभर से करारी मात मिली थी. 

2027 के विधानसभा चुनाव में ओम प्रकाश राजभर अपने बेटे अरविंद राजभर को वाराणसी और मऊ के बजाय आजमगढ़ जिले की दीदारगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाना चाहते हैं. दीदारगंज सीट पर सपा का कब्जा है. सपा के कमलकांत ने बीजेपी की कृष्णमुरारी 14 हजार वोटों से हराकर विधायक चुने गए थे. यह सीट राजभर बहुल मानी जाती है. यही वजह है कि ओम प्रकाश राजभर अपने बेटे को इस सीट से चुनाव लड़ाना चाहते हैं, क्योंकि शिवपुर सीट बीजेपी छोड़ेगी नहीं. ऐसे में उन्हें दीदारगंज सीट ही सेफ लग रही है. 

राजभर की डिमांड से एनडीए में दरार
ओम प्रकाश राजभर के द्वारा एक के बाद एक सीट पर दावेदारी जताने के बाद एनडीए के भीतर सियासी संग्राम छिड़ सकता है. निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने राजभर के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है.उन्होंने कहा कि गठबंधन में रहकर इस तरह की घोषणाएं करना सही नहीं है और राजभर को अपनी मर्यादा में रहना चाहिए. संजय निषाद ने यह भी साफ किया कि उनसे इस बारे में कोई बातचीत नहीं हुई है. ऐसे में उन्हें सीटों की दावेदारी नहीं करनी चाहिए 

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वहीं, राजभर का कहना है कि उन्होंने निषाद से बात कर ली. इस तरह दोनों नेताओं के बयानों में यह टकराव साफ दिखाता है कि एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग को लेकर स्थिति सहज नहीं है. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह विवाद आने वाले चुनाव से पहले और भी बढ़ सकता है, क्योंकि पूर्वांचल में सीटों का बंटवारा सभी दलों के लिए बेहद अहम है. ऐसे में सीट शेयरिंग को लेकर जिस तरह से अभी से संग्राम छिड़ गया है, उससे साधने आसान नहीं होगा? 

राजभर के सीट बदलने के पीछे चार बड़े कारण माने जा रहे है...
राजभर अपनी परंपरागट सीट क्यों छोड़कर आजमगढ़ की अतौरलिया सीट से क्यों चुनाव लड़ना चाहते हैं राजभर का यह कदम सिर्फ सीट बदलने का मामला नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे कई राजनीतिक संकेत और समीकरण छिपे हुए हैं. इसमें अंसारी परिवार का प्रभाव, जातीय गणित और भविष्य के गठबंधन की संभावनाएं अहम मानी जा रही हैं.

1.अंसारी परिवार से डरे राजभर- ओम प्रकाश राजभर अपनी मजबूत मानी जाने वाली जहूराबाद सीट क्यों छोड़ना चाहते हैं. इसके पीछे अंसारी परिवार का बढ़ता हुआ सियासी वर्चस्व तो नहीं है. गाजीपुर और मऊ क्षेत्र में अंसारी परिवार का बढ़ता प्रभाव एक बड़ी वजह माना जा रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. उस समय उन्हें अंसारी परिवार का समर्थन मिला था, जिसकी वजह से जहूराबाद सीट पर यादव और मुस्लिम वोटों का उन्हें फायदा मिला और वह चुनाव जीतने में सफल रहे. 

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पूर्वांचल का सियासी समीकरण बदल चुका है. राजभर अब बीजेपी के साथ हैं तो  अंसारी परिवार पूरी तरह समाजवादी पार्टी के साथ खड़ा है. जहूराबाद से राजभर चुनाव लड़ते हैं तो उनका जीतना आसान नहीं है. बीजेपी के साथ गठबंधन होने के चलते राजभर को मुस्लिम और यादव वोट मिलना मुश्किल है. बीजेपी के साथ होते हुए भी सिर्फ राजभर वोटों का ही सहारा है. 

2. सवर्ण वोटों की नाराजगी का खतरा-ओम प्रकाश राजभर लगातार बयानबाजी करते रहते हैं और अक्सर उनके निशाने पर सवर्ण जातियां ही रहती है. राजभर के सियासी तेवर के चलते  सवर्ण समाज, जिसमें ठाकुर, ब्राह्मण और भूमिहार जैसे जातियों का वोट मिलना मुश्किल है. घोसी लोकसभा सीट पर उनके अरविंद राजभर को सवर्णों का समर्थन नहीं मिला, जिसके चलते हार गए थे. यही खतरा ओम प्रकाश राजभर को भी सता रहा है. 

3. बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा- जहूराबाद विधानसभा सीट पर बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा बना हुआ है. राजभर मूलरूप से बलिया के रहने वाले हैं और वाराणसी में रहते हैं. दस साल से विधायक हैं, जिसे लेकर सत्ता विरोधी लहर भी उनके खिलाफ है. जहूराबाद में जबरदस्त नाराजगी भी है, जिसे देखते हुए सीट बदलकर नई सीट से किस्मत आजमाना चाहता हैं. 

4. सुरक्षित सीट की तलाश-ओम प्रकाश राजभर यूपी के बदले हुए सियासी समीकरण में अपने लिए और अपने बेटे अरविंद राजभर के लिए  सुरक्षित सीट की तलाश में हैं. इसी वजह से उन्होंने अपने लिए अतरौलिया सीट को चुना है तो बेटे अरविंद राजभर के लिए दीदारगंज सीट चाहते हैं. ऐसे में देखना है कि अतरौलिया सीट उनके लिए निषाद पार्टी क्या छोड़ सकती है और दीदारगंज सीट क्या बीजेपी उन्हें देगी. अब देखना है कि कैसे अपने लिए सुरक्षित ठिकाना तलाश पाते हैं? 

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