पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ऐलान के साथ ही सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. सीएम ममता बनर्जी को उनके ही सीट भवानीपुर में घेरने के लिए बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को उतारा है. टीएमसी से बर्खास्त किए गए हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी से ममता के खिलाफ मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है. इस तरह ममता बनर्जी के खिलाफ विपक्ष ने जबरदस्त तरीक से चक्रव्यूह रचा है, लेकिन हुमायूं का मुस्लिम दांव क्या कामयाब हो पाएगा?
बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने को लेकर सुर्खियों में आए हुमायूं कबीर को टीएमसी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इसके बाद हुमायूं ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी बना ली. बुधवार को उन्होंने अपनी नवगठित आम जनता उन्नयन पार्टी के 15 उम्मीदवारों की पहली सूची की घोषणा करते हुए कहा कि उनकी पार्टी बंगाल विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर विधानसभा सीट पर पूनम बेगम को प्रत्याशी बनाया है. भवानीपुर में ममता के खिलाफ बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी के जरिए पहले ही घेराबंदी कर रखी है और हुमायूं कबीर ने मुस्लिम दांव खेलकर क्या ममता बनर्जी की टेंशन बढ़ा दी है?
ममता के खिलाफ विपक्षी घेराबंदी
पश्चिम बंगाल की 291 सीटों पर मंगलवार को टीएमसी ने अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया. टीएमसी ने ममता बनर्जी सिर्फ भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ रही है. पिछले चुनावों में ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद वो भवानीपुर सीट से उपचुनाव लड़कर विधायक बनी थी. इस बार ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक सीट भवानीपुर से ही चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
ममता बनर्जी ने सुरक्षित सीट माने जाने वाली भवानीपुर से मैदान में उतरी हैं, लेकिन विपक्ष ने उनके खिलाफ जबरदस्त तरीके से घेराबंदी कर रही है. बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट पर उतारकर सिर्फ चुनौती ही नहीं दी है, बल्कि उन्हें उनके ही घर में घेरने का दांव चला है. ऐसे में हुमायूं कबीर ने भवानीपुर सीट पर ममता के खिलाफ मुस्लिम कैंडिडेट को उतारकर उनकी डबल टेंशन बढ़ा दी है.
ममता के खिलाफ सियासी चक्रव्यूह
2021 के विधानसभा चुनाव की तरह ही बीजेपी ने ममता बनर्जी के खिलाफ सियासी 'चक्रव्यूह' में फंसाने रणनीति बनाई है. बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारीको दो सीटों नंदीग्राम और भवानीपुर से उम्मीदवार बनाया है. बीजेपी की रणनीति है कि ममता बनर्जी को भवानीपुर में ही सीमित कर दिया जाए ताकि वे पूरे राज्य में आक्रामक प्रचार न कर सकें.
ममता बनर्जी के लिए भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी से ही नहीं बल्कि हुमायूं कबीर की पार्टी की मुस्लिम महिला से भी दो-दो हाथ करना होगा. हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद के जरिए बंगाल के मुस्लिमों के बीच अपनी सियासी पैठ जमाने की कवायद की है. भवानीपुर सीट पर हुमायूं का मुस्लिम दांव चलता है तो फिर ममता के लिए अपने किले को बचाए रखना आसान नहीं होगा?
भवानीपुर सीट पर सियासी बिसात
भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच शह-मात का खेल शुरू हो गया है. 2021 में ममता बनर्जी ने 58835 वोटों से जीत दर्ज की थी. बीजेपी की उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल को सिर्फ 26428 वोट मिले थे. बीजेपी को टीएमसी ने 50 प्रतिशत के वोट शेयर के अंतर से हराया था. इस बार बीजेपी ने जिस तरह प्रियंका की जगह शुभेंदु अधिकारी पर दांव लगाया तो हुमायूं कबीर ने मस्लिम कार्ड खेला.
भवानीपुर में एक तरफ ममता बनर्जी के पास अपनी साख बचाने की चुनौती है, जिसमें उन्हें मुस्लिम वोटों को जोड़े रखने की टेंशन है तो दूसरी तरफ बीजेपी की आक्रामक घेराबंदी. ऐसे में भवानीपुर का मुकबाला काफी रोचक हो गया है, लेकिन सवाल यही है कि हुमायूं का दांव कितना सफल रहेगा.
हुमायूं का मुस्लिम कार्ड होगा सफल
भवानीपुर विधानसभा सीट एक शहरी क्षेत्र है, जहां गैर-बंगाली मतदाताओं की संख्या अच्छी है. यहां गुजराती, मारवाड़ी, सिख वोटर्स भी हैं. बीजेपी की रणनीति इन्हीं वोटर्स के सहारे ममता को मात देने की रणनीति बनाई है, लेकिन सीएम ममता बनर्जी का भरोसा अपने पारंपरिक बंगाली और मुस्लिम वोट बैंक पर टिका है.
भवानीपुर में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या लगभग 20 फीसदी से 25 फीसी के बीच मानी जाती है. इस तरह मुस्लिम वोटर टीएमसी के लिए काफी अहम माने जाते हैं. एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भवानीपुर सीट से लगभग 44,000 से ज्यादा मतदाताओं के नाम डिलीट किए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 21.7 फीसदी है. हटाए गए नामों में बड़ी संख्या में मुस्लिम वोटर बताए जा रहे हैं, जिससे ममता बनर्जी की सियासी टेंशन बढ़ गई है.
बीजेपी इसे फर्जी वोटरों की सफाई बता रही है, जबकि टीएमसी ने इसे चुनाव आयोग की जानबूझकर की गई कार्रवाई बताया है. यह बदलाव हार-जीत के अंतर को काफी प्रभावित कर सकता है. ऐसे में हुमायूं का पूनम बेगम के उतारे जाने से साफ है कि मुस्लिम वोट में बटवारा हो सकता है. मुस्लिम वोट अगर बंटे तो ममता बनर्जी के लिए अपने किले को बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा?
कुबूल अहमद