कोलकाता की इन 17 सीटों पर होगा असली खेल, मुस्लिम फैक्टर किसके आएगा काम?

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की 17 विधानसभा सीटें सत्ता का खेल बनाने और बिगाड़ने की ताकत रखती हैं, ममता बनर्जी ने 2021 में कोलकाता की इन्हीं सीटों के जरिए बीजेपी का गेम बदल दिया था, लेकिन इस बार क्या टीएमसी पहली की तरह नतीजे दोहरा पाएगी या फिर बीजेपी करेगी खेला?

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पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी कैसे मुस्लिमों को साध रही (Photo-TMC) पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी कैसे मुस्लिमों को साध रही (Photo-TMC)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 1:55 PM IST

कोलकाता की 17 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका इस चुनाव में अहम मानी जा रही है. अलग-अलग सीटों पर उनकी हिस्सेदारी और प्रभाव में फर्क दिखता है, जिससे हर सीट का चुनावी समीकरण अलग बनता है. 2021 के नतीजों के बाद 2026 में बदलते राजनीतिक परिदृश्य के बीच यह फैक्टर कई सीटों पर मुकाबले की दिशा तय कर सकता है.

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कोलकाता की सियासत में इस बार एक शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में है, ‘M फैक्टर’, यानी मुस्लिम वोट बैंक. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता की 17 विधानसभा सीटों पर यह एक अहम मुद्दा है. 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने इन सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. लेकिन 2026 का चुनाव नए समीकरणों और चुनौतियों के साथ सामने है.

शहर की चुनावी तस्वीर यह दिखाती है कि मुस्लिम मतदाता हर सीट पर एक जैसे नहीं हैं. मेटियाब्रूज, कोलकाता पोर्ट, बालीगंज और एंटाली जैसी सीटों पर इनका प्रभाव सीधे तौर पर जीत-हार तय करने की स्थिति में रहता है, जबकि भवानीपुर, चौरंगी, बेलियाघाटा, जोरासांको और काशीपुर-बेलगछिया में यह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

वहीं टॉलीगंज, जादवपुर, कस्बा, मानिकतला, रशबेहारी, बेहाला पूर्व और बेहाला पश्चिम जैसी सीटों पर इनका असर अपेक्षाकृत सीमित माना जाता है. 

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कहां कितना असर: 17 सीटों पर ‘M फैक्टर’ का गणित
कोलकाता की 17 विधानसभा सीटों में मुस्लिम आबादी का प्रतिशत अलग-अलग है, और इसी आधार पर विभिन्न सीटों पर उनका चुनावी प्रभाव भी कुछ अलग दिखाई देता है. मेटियाब्रूज सीट पर करीब 60% मुस्लिम आबादी है, जिससे यहां ‘M फैक्टर’ पूरी तरह हावी रहता है.

कोलकाता पोर्ट में लगभग 51% और बालीगंज में करीब 50% मुस्लिम मतदाता हैं, जो इन सीटों पर सीधे तौर पर जीत-हार तय करने की स्थिति में रहते हैं. इसके अलावा एंटाली और चौरंगी जैसी सीटों पर मुस्लिम आबादी करीब 40% के आसपास है, जबकि बेलियाघाटा में यह लगभग 25% और जोरासांको और काशीपुर-बेलगछिया में करीब 20% है.

इन सीटों पर मुस्लिम मतदाता ‘स्विंग फैक्टर’ की भूमिका निभाते हैं, यानी उनका झुकाव किसी भी पक्ष में जाकर मुकाबले का रुख बदल सकता है. वहीं टॉलीगंज, जादवपुर, कस्बा, बेहाला पूर्व, बेहाला पश्चिम और मानिकतला जैसी सीटों पर मुस्लिम आबादी 10% से भी कम है. यहां मुस्लमानों का प्रभाव काफी सीमित रहता है.

कोलकाता में 2021 चुनाव में टीएमसी की बढ़त
विधानसभा चुनाव 2021 में कोलकाता की सभी 17 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, जिससे शहर में उसका मजबूत राजनीतिक आधार साफ दिखाई देता है. चुनावी आंकड़ों के हिसाब से यह भी सामने आता है कि जिन सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां टीएमसी को किसी अन्य की तुलना में बड़ी बढ़त मिली.

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मेटियाब्रूज, कोलकाता पोर्ट और बालीगंज जैसी सीटों पर टीएमसी को लगभग 65 से 75% वोटर मिले. वहीं दूसरी ओर, कई शहरी सीटों पर बीजेपी को 25 से 35% तक वोट हासिल कर मुकाबले को चुनौतीपूर्ण बनाए रखा. ममता ने कोलकाता के सीटों के दम पर ही सत्ता की हैट्रिक लगाने में कामयाब रही हैं. 

भवानीपुर सीट पर मुस्लिम वोटर कितने असरदार
भवानीपुर सीट इस बार कोलकाता की सबसे चर्चित सीटों में शामिल है, जहां मुकाबला सीधे तौर पर बड़े नेताओं के बीच नजर आ रहा है. तृणमूल कांग्रेस की ओर से ममता बनर्जी मैदान में हैं, जबकि बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को उतारा है. इसके अलावा सीपीआईएम से श्रीजीब बिस्वास, कांग्रेस से प्रदीप प्रसाद और हुमायूं कबीर की पार्टी JUP से पूनम बेगम भी चुनाव लड़ रही हैं.

2021 के उपचुनाव में ममता बनर्जी ने इस सीट से 85,263 वोट हासिल करते हुए 71.90 प्रतिशत मतों के साथ जीत दर्ज की थी और बीजेपी की उम्मीदवार प्रियंका टिबरेवाल को हराया था। वहीं 2021 के आम विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को 57.71 प्रतिशत और बीजेपी को 35.16 प्रतिशत वोट मिले थे.

भवानीपुर का सामाजिक ढांचा इसे एक विशिष्ट शहरी सीट बनाता है. यहां लगभग 76 प्रतिशत मतदाता हिंदू हैं, जिनमें 42 प्रतिशत बंगाली और 34 प्रतिशत गैर-बंगाली शामिल हैं. वहीं करीब 24 प्रतिशत मतदाता मुस्लिम समुदाय से आते हैं. 

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कोलकाता पोर्ट में सियासी संग्राम, गर्माया माहौल
कोलकाता पोर्ट विधानसभा सीट पर मुस्लिम आबादी करीब 51% है. यहां तृणमूल कांग्रेस के नेता और कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम लगातार मजबूत स्थिति में रहे हैं. 2011 से इस सीट पर हकीम जीत दर्ज करते आ रहे हैं. 2026 के चुनाव में इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस से फिरहाद हकीम, सीपीआईएम से फैयाज खान, कांग्रेस से आकिब गुलजार और JUP से रफीक हसन मैदान में हैं. लेकिन इस सीट पर अभी तक बीजेपी ने अपने उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है.

2021 के विधानसभा चुनाव में फिरहाद हकीम को 1,05,543 (69.23%) वोट मिले थे. वहीं बीजेपी को 24.26% वोट प्राप्त हुए थे. हालांकि, इस बार चुनाव के दौरान 2016 में दिया गया ‘मिनी पाकिस्तान’ बयान फिर से चर्चा में है. इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिल रहे हैं. 

कोलकाता की इस सीट पर चुनाव क्यों खास? 
मेटियाब्रूज विधानसभा सीट कोलकाता की सबसे प्रमुख मुस्लिम बहुल सीटों में गिनी जाती है, जहां करीब 60% आबादी मुस्लिम समुदाय से आती है. इसी वजह से यह सीट चुनावी दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है. 2026 के चुनाव में यहां तृणमूल कांग्रेस से अब्दुल खालिक मोल्ला, भारतीय जनता पार्टी से वीर बहादुर सिंह, सीपीआईएम से मोनिरुल इस्लाम, कांग्रेस और JUP के उम्मीदवार मैदान में हैं.

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2011 से लगातार तृणमूल कांग्रेस इस सीट पर जीत दर्ज करती रही है. हालांकि इस बार स्थानीय स्तर पर कुछ असंतोष की चर्चा भी सामने आ रही है. 81 साल के अब्दुल खालिक मोल्ला को फिर से उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर पार्टी के भीतर और कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में युवा चेहरे की मांग उठी थी. इसे विपक्ष अपने पक्ष में माहौल बनाने के तौर पर देख रहा है.

बीजेपी उम्मीदवार वीर बहादुर सिंह का नाम भी इस बार चर्चा में है. पेशे से शिक्षक रहे वीर बहादुर सिंह आरएसएस से जुड़े रहे हैं और 2019 में इसी इलाके में उन पर फायरिंग की घटना हुई थी, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हुए थे. उस समय उन्होंने स्थानीय टीएमसी नेताओं पर आरोप लगाए थे, हालांकि टीएमसी ने इन आरोपों को खारिज किया था.

बालीगंज में मुस्लिम वोट बनेगा बड़ा फैक्टर
बालीगंज विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 50% है. यह सीट चुनावी रूप से काफी अहम मानी जाती है. 2011 से यहां तृणमूल कांग्रेस लगातार जीत दर्ज करती आ रही है. 2026 के चुनाव में इस सीट पर मुकाबला बहुकोणीय नजर आ रहा है.

तृणमूल कांग्रेस ने सोवंदेब चट्टोपाध्याय को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने शतारूपा को मैदान में उतारा है. सीपीआईएम की ओर से अफरीन बेगम (शिल्पी), कांग्रेस से रोहन मित्रा और JUP से सौनक भट्टाचार्य चुनाव लड़ रहे हैं. 

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हिंदी भाषी मुस्लिम वोटर्स बन रहे अहम फैक्टर
कोलकाता की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पहलू हिंदी भाषी मुस्लिम मतदाताओं की मौजूदगी भी है. शहर के कई इलाकों में उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड से आकर बसे मुस्लिम परिवारों की अच्छी-खासी संख्या है, जिनकी सामाजिक और राजनीतिक प्राथमिकताएं स्थानीय बंगाली मुस्लिम मतदाताओं से कुछ हद तक अलग मानी जाती हैं. ऐसे मतदाता खास तौर पर मेटियाब्रूज, कोलकाता पोर्ट और भवानीपुर जैसी सीटों पर प्रभाव डालते हैं.

कोलकाता की अलग-अलग सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं की हिस्सेदारी और प्रभाव भिन्न है, जो चुनावी मुकाबले की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकता है. 2021 के नतीजों के बाद 2026 में बदलते समीकरणों के बीच इन सीटों पर मुकाबला किस दिशा में जाएगा, यह परिणाम आने के बाद ही स्पष्ट होगा. 

(इनपुट- रजनीश कुमार सिंह)

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