Exit Poll: केरलम में कांग्रेस को सलाम, वाम का काम तमाम, जानें किसे मिल रही कितनी सीटें

दक्षिण भारत में केरल देश का एकलौता राज्य हैं, जहां पर लेफ्ट की सरकार दस साल से चली आ रही थी. एग्जिट पोल के मुताबिक लेफ्ट को हार और यूडीएफ की सत्ता में वापसी होती दिख रही है. एग्जिट पोल अगर नतीजे में भी तब्दील होते हैं तो लेफ्ट मुक्त भारत बन जाएगा?

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केरल में एलडीएफ बनाम यूडीएफ (Photo-ITG) केरल में एलडीएफ बनाम यूडीएफ (Photo-ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:53 PM IST

केरल विधानसभा चुनाव के एग्जिट पोल सामने आने लगे हैं. भारत में केरल ही लेफ्ट का एकलौता गढ़ बचा हुआ था, जो दस साल बाद ढहता हुआ नजर आ रहा. एग्जिट पोल के मुताबिक पिनराई विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ को तगड़ा झटका लगा है तो कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ की दस साल बाद सत्ता में वापसी होती दिख रही है. 

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राज्य की 140 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 9 अप्रैल को वोट डाले गए थे और सरकार बनाने के लिए 71 सीटों की जरूरत है. एग्जिट पोल सर्वे के मुताबिक लेफ्ट की सत्ता से विदाई तो कांग्रेस की वापसी के अनुमान है. दस साल साल के सत्ता का वनवास झेल रही यूडीएफ पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाती दिख रही है. 

एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक यूडीएफ को 78 से 90 विधानसभा सीटें मिलती दिख रही हैं तो एलडीएफ को 55 सीटों ही मिलने का अनुमान है. य़ूडीएफ को 44 फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान है तो यूडीएफ के खाते में 39 फीसदी वोट शेयर जा सकता है. इस बार बीजेपी सहित 14 फीसदी वोट शेयर मिल सकते हैं. 

किसे कितनी सीटें मिलने का अनुमान
यूडीएफ- 78 से 90 सीटें
एलडीएफ- 49 से 55 सीटें
बीजेपी-0 से 3 सीटें

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किसे कितने वोट शेयर का अनुमान?

यूडीएफ- 44 फीसदी
एलडीएफ- 39 फीसदी
बीजेपी अन्य- 14 फीसदी

केरल की हार से 'लेफ्ट मुक्त भारत' 
एग्जिट पोल के अनुमान अगर 4 मई को नतीजे में बदलते हैं तो केरल की सत्ता से लेफ्ट की विदाई सिर्फ एक हार नहीं बल्कि सियासी तौर पर बड़ा झटका होगा.  73 साल में पहली बार ऐसा होगा जब भारत के किसी भी राज्य में वाम मोर्चे की सरकार नहीं होगी. संयोग देखिए कि देश को'लेफ्ट मुक्त' करने का काम कांग्रेस ने करके दिखाया है, जो बरसों तक और केंद्र में लेफ्ट के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलती रही है. 

आजादी के बाद लेफ्ट ने सबसे पहले केरल में 1957 में सरकार बनाई थी, उसके 1977 में बंगाल और फिर त्रिपुरा में लेफ्ट की सरकार बनी. लेफ्ट 2011 में बंगाल की सत्ता से बाहर हुआ और उसके बाद 2018 में त्रिपुरा में लेफ्ट बाहर हुई थी.

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