देश में चुनावी सरगर्मी के बीच ईडी ने राजनीतिक सलाहकार फर्म I-PAC के खिलाफ अपनी जांच तेज कर दी है. ईडी ने हवाला लेनदेन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में I-PAC के निदेशक ऋषि राज सिंह को पूछताछ के लिए तलब किया है.
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विधानसभा चुनावों की तैयारियां जोरों पर हैं. इस बीच ऋषि राज सिंह को 20 अप्रैल को दिल्ली स्थित ईडी दफ्तर में पेश होने के लिए समन भेजा गया है.
I-PAC पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दलों- तृणमूल कांग्रेस और DMK के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम कर रही है.
ऋषि राज सिंह के ठिकानों पर छापा
I-PAC की स्थापना 2015 में हुई थी और इसके तीन संस्थापक निदेशकों में ऋषि राज सिंह, विनेश चंदेल और प्रतीक जैन शामिल हैं. ईडी ने हाल ही में विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया था, जो वर्तमान में एजेंसी की हिरासत में है. ऋषि राज सिंह का बयान प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दर्ज किया जाएगा. इससे पहले 2 अप्रैल को ईडी ने बेंगलुरु में उनके ठिकानों पर छापेमारी भी की थी.
ये पूरी जांच दिल्ली पुलिस की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें I-PAC पर खातों में हेरफेर करने और निदेशकों के जरिए बेहिसाब धन के लेन-देन का आरोप लगाया गया है.
ईडी का दावा है कि I-PAC ने लगभग 50 करोड़ रुपये की 'अपराध की कमाई' को ठिकाने लगाने में भूमिका निभाई है. जांच एजेंसी ने वित्तीय गड़बड़ियों के कई तरीके उजागर किए हैं, जिनमें राजनीतिक दलों और दूसरी संस्थाओं से बेहिसाब धन लेना शामिल है. इसके अलावा बिना किसी व्यावसायिक साख के असुरक्षित लोन लेना, फर्जी बिल और चालान जारी करना, हवाला चैनलों के जरिए नकद राशि का इधर-उधर ट्रांजेक्शन भी इमें शामिल हैं.
हवाला और कोयला घोटाले से जुड़ा है मामला
ये मामला पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाला जांच से भी जुड़ा हुआ है. 8 जनवरी को जब ईडी ने कोलकाता में I-PAC के दफ्तर पर छापा मारा था, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंच गई थीं और कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गई थीं. इस घटना को लेकर काफी विवाद हुआ था और अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है.
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I-PAC को लेकर TMC की प्रतिक्रिया
ऐसी खबरें भी थीं कि I-PAC ने अपने कर्मचारियों को 20 दिनों की छुट्टी पर जाने और काम रोकने का ईमेल भेजा है. लेकिन अब TMC ने I-PAC के पश्चिम बंगाल में अपना कामकाज बंद करने की खबरों को बेबुनियाद बताया है. पार्टी ने रविवार को आरोप लगाया कि बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार डरा-धमकाकर टीएमसी की चुनावी मशीनरी को पंगु बनाने की साजिश रच रही है.
टीएमसी ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि I-PAC पार्टी के अभियान से पीछे नहीं हटा है. इस तरह की खबरें जमीन पर भ्रम पैदा करने की कोशिश है.
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