असम के मोरीगांव जिले में स्थित जगीरोड, एक समृद्ध इतिहास वाला औद्योगिक कस्बा है. यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है और नगांव लोकसभा सीट के आठ हिस्सों में से एक है.
1978 में स्थापित जगीरोड में अब तक 10 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. कांग्रेस और AGP ने यह सीट चार-चार बार जीती है, जबकि BJP ने हाल ही में लगातार दो जीत दर्ज की
हैं. कांग्रेस की जीत का सिलसिला 1985 और 2001 के बीच AGP की लगातार चार जीतों से टूट गया था.
2006 में जीत हासिल करने के बाद, कांग्रेस के बिबेकानंद दलाई ने 2011 में भी यह सीट बरकरार रखी. उन्होंने AGP के बुलबुल दास को 34,448 वोटों से हराया. बुलबुल दास ने 1991 और 2001 के बीच लगातार तीन बार यह सीट जीती थी. BJP, जो 2011 में तीसरे स्थान पर रही थी, ने अपने उम्मीदवार को बदलकर पीयूष हजारिका को अपना उम्मीदवार बनाया. यह दांव सफल रहा, क्योंकि हजारिका ने 2016 में मौजूदा कांग्रेस विधायक विवेकानंद दलाई को 28,326 वोटों से हराकर यह सीट जीत ली. हजारिका ने 2021 में भी यह सीट बरकरार रखी, और इस बार उन्होंने कांग्रेस पार्टी के स्वपन कुमार मंडल को 29,404 वोटों के बड़े अंतर से हराया. विधानसभा चुनावों के विपरीत, जहाँ BJP को 2016 में आखिरकार सीट जीतने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था, वहीं 2009 से जगीरोड विधानसभा क्षेत्र में हुए चारों लोकसभा चुनावों में उसका दबदबा रहा है. उसने 2009 में कांग्रेस पार्टी को 9,000 वोटों से, 2014 में 29,389 वोटों से, 2019 में 29,214 वोटों से और 2024 में 76,800 वोटों से पीछे छोड़ा. जहां 2024 में जगीरोड क्षेत्र में BJP को 134,665 वोट मिले, वहीं कांग्रेस को 57,865 वोट प्राप्त हुए.
2026 के विधानसभा चुनावों के लिए जगीरोड सीट की अंतिम मतदाता सूची में 250,427 पात्र मतदाता थे. 2024 के 238,981 मतदाताओं की तुलना में SIR 2025 के बाद इसमें 11,446 मतदाताओं की वृद्धि हुई. इससे पहले के आंकड़े 2021 में 238,391, 2019 में 222,739, 2016 में 201,287, 2014 में 188,088 और 2011 में 177,875 थे. मतदाताओं की भागीदारी काफ़ी ऊंची रही है- 2011 में 79.24 प्रतिशत, 2014 में 80.82 प्रतिशत, 2016 में 85.33 प्रतिशत, 2019 में 81.87 प्रतिशत, 2021 में 83.33 प्रतिशत और 2024 में 84.91 प्रतिशत. 2026 के चुनावों में मतदाताओं की भागीदारी 87.05 प्रतिशत रही (चुनाव आयोग द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों के अनुसार).
उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित जनसांख्यिकी, जो मुख्य रूप से 2011 की जनगणना के अनुपातों पर आधारित है और जिसमें क्षेत्र तथा परिसीमन परिवर्तनों के अनुसार समायोजन किया गया है, यह दर्शाती है कि इस आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की तुलना में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक थी. वोटरों में मुसलमानों की हिस्सेदारी 31.10 प्रतिशत थी, जबकि अनुसूचित जातियों की 24.01 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों की 13.86 प्रतिशत थी. यह मुख्य रूप से एक ग्रामीण सीट है, जहाँ 91.67 प्रतिशत वोटर गांवों में रहते हैं, जबकि 8.33 प्रतिशत वोटर शहरी इलाकों में रहते हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र में असमिया हिंदू और अन्य समुदायों का मिला-जुला रूप देखने को मिलता है, साथ ही यहां कुछ औद्योगिक और अर्ध-शहरी इलाके भी हैं.
जगीरोड निर्वाचन क्षेत्र मध्य असम के मोरीगांव जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है, जहां कोलोंग नदी (ब्रह्मपुत्र की एक सहायक नदी) के किनारे समतल जलोढ़ मैदान हैं. यहां की जमीन धान की खेती और कृषि के लिए उपयुक्त है, लेकिन यहां मौसमी बाढ़ का खतरा बना रहता है. लोगों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि, छोटे-मोटे व्यापार और औद्योगिक रोजगार पर निर्भर है. इस इलाके का चाय की खेती का एक लंबा इतिहास रहा है, जो औपनिवेशिक काल से चला आ रहा है. यहां आस-पास कई चाय बागान और एस्टेट हैं जो स्थानीय अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं. जागीरोड अपने बड़े उद्योगों के लिए भी जाना जाता है, जिनमें नगांव पेपर मिल (असम के प्रमुख कागज उद्योगों में से एक) और एशिया का सबसे बड़ा सूखी मछली बाजार शामिल हैं. यहां रेशम इकाइयों की भी अच्छी-खासी मौजूदगी है, खासकर वे इकाइयां जो एरी और मूगा रेशम के उत्पादन और बुनाई के काम में लगी हुई हैं. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर बारिश कृषि को बढ़ावा देती है, जबकि औद्योगिक इकाइयां अतिरिक्त रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं. यहां के बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय राजमार्ग और राज्य राजमार्गों के जरिए सड़क संपर्क शामिल है, साथ ही ग्रामीण सड़कों और स्थानीय बाजारों के विकास का काम भी लगातार चल रहा है.
जगीरोड गुवाहाटी से लगभग 55 किलोमीटर पूर्व और मोरीगांव शहर (जिला मुख्यालय) से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित है. राज्य की राजधानी, दिसपुर, यहां से लगभग 55 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है. जगीरोड का अपना रेलवे स्टेशन है जो पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे की गुवाहाटी-लुमडिंग लाइन पर स्थित है, जिससे यहां अच्छी कनेक्टिविटी मिलती है. स्थानीय स्तर पर आवागमन मुख्य रूप से सड़क परिवहन के जरिए होता है, जिसके लिए बसें, ऑटो और निजी वाहन उपलब्ध हैं.
जगीरोड की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है जो ब्रह्मपुत्र घाटी से जुड़ी हुई है. औपनिवेशिक काल के दौरान, यह चाय की खेती और व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा था. 1970 और 1980 के दशक में हुए असम आंदोलन में भी इस इलाके ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यहां असमिया परंपराओं, औद्योगिक विकास और सामुदायिक संस्थाओं का एक अनूठा मेल देखने को मिलता है. BJP ने जगीरोड सीट के लिए अपने मौजूदा विधायक पीयूष हजारिका को फिर से उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने बुलबुल दास को अपना उम्मीदवार बनाया है. दास एक जाने-माने दलबदलू नेता हैं. उन्होंने AGP के टिकट पर लगातार तीन बार चुनाव जीता. फिर 2006 का चुनाव AGP (प्रगतिशील) के उम्मीदवार के तौर पर लड़ा. 2011 में अपनी मूल पार्टी AGP में वापस लौटकर उसके उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा. 2021 का चुनाव असम जातीय परिषद (AJP) के उम्मीदवार के तौर पर लड़ा. और अब कांग्रेस के उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में हैं.
ऐसा लगता है कि कांग्रेस पार्टी का यह एक हताशा भरा कदम है कि उसने ऐसे व्यक्ति को अपना टिकट दिया है, जिसे अतीत में तीन बार जीत हासिल करने के बाद, मतदाताओं ने लगातार तीन बार नकार दिया है. यह BJP और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, जिसमें केवल दो ही उम्मीदवार मैदान में हैं, और 2026 के विधानसभा चुनावों में जागीरोड सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए BJP ही सबसे प्रबल दावेदार मानी जा रही है.
(अजय झा)