रंगिया असम के कामरूप जिले में स्थित एक सामान्य (अनारक्षित) निर्वाचन क्षेत्र है और यह दरांग-उदलगुरी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के 11 हिस्सों में से एक है. रंगिया कस्बा इस निर्वाचन क्षेत्र का मुख्य शहरी केंद्र है, और इसमें आस-पास के कई गांव भी शामिल हैं, जिससे इस निर्वाचन क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण हो जाता है. 2023 के परिसीमन अभ्यास के
दौरान इस निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं में कुछ बदलाव किए गए. इसके तहत दक्षिण की ओर के कुछ क्षेत्र, जो पहले हाजो विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा थे, इसमें शामिल कर लिए गए, जबकि उत्तर की ओर के कुछ क्षेत्र, जो अब गोरेस्वर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा बन गए हैं, इससे अलग हो गए.
1951 में स्थापित रंगिया में अब तक 15 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र के इतिहास के अधिकांश समय में कांग्रेस ही प्रमुख पार्टी रही है, इसने 1951, 1962, 1972, 2001 और 2011 में, कुल पांच बार जीत हासिल की है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 1967 में एक बार जीत दर्ज की, जबकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने तीन बार जीत हासिल की, 1978 और 1983 में लगातार दो बार, और फिर 2006 में एक बार. थानेश्वर बोरो, जिन्होंने पहली बार 1985 में एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत हासिल की थी, उन्होंने 1991 और 1996 में असम गण परिषद के सदस्य के रूप में लगातार दो बार जीत दर्ज की.
हाल के चुनावों में, भाजपा के भाबेश कलिता, जो 2021 से 2025 तक भाजपा की असम प्रदेश इकाई के अध्यक्ष भी रहे, ने 2016 में यह सीट जीती. उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को 32,067 वोटों के भारी अंतर से हराया. उन्हें कुल 58,353 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार घनश्याम कटली को 26,286 वोट प्राप्त हुए. AIUDF और CPM क्रमशः चौथे और पाँचवें स्थान पर रहीं, जिन्हें 14,411 और 12,261 वोट मिले. 2021 में, भाजपा के भाबेश कलिता ने एक बार फिर यह सीट अपने नाम की. उन्होंने CPI(M) के उम्मीदवार भगवान देव मिश्रा को 20,220 वोटों के आरामदायक अंतर से हराया. भाबेश कलिता को 84,844 वोट मिले, जबकि CPM उम्मीदवार को 64,624 वोट मिले. इससे पहले 2011 में, कांग्रेस पार्टी के घनश्याम कलिता ने AGP के थानेश्वर बोरो को 10,074 वोटों से हराकर जीत हासिल की थी.
लोकसभा चुनावों के दौरान रंगिया विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग का पैटर्न वैसा ही रहा जैसा विधानसभा चुनावों में देखने को मिला था. हाल के चुनावों में BJP लगातार बढ़त बनाए हुए है. 2009 में, BJP ने कांग्रेस के मुकाबले 15,936 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में, BJP ने कांग्रेस के खिलाफ अपनी बढ़त और बढ़ाई, और 29,437 वोटों के अंतर से आगे रही. 2019 में, BJP ने कांग्रेस पर अपनी बढ़त 27,599 वोटों पर बनाए रखी. 2024 में, BJP ने एक बार फिर कांग्रेस के खिलाफ बढ़त बनाई. इस बार तो और भी बड़े अंतर से, यानी 40,250 वोटों से. इसमें BJP के दिलीप सैकिया को 99,469 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के माधव राजबंशी को 59,219 वोट मिले. रंगिया विधानसभा क्षेत्र की 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए जारी अंतिम मतदाता सूची में 201,572 योग्य मतदाता थे. SIR 2025 के बाद, 2024 में पंजीकृत 209,851 मतदाताओं की तुलना में इसमें 8,279 वोटों की कमी देखी गई. इससे पहले के आंकड़े 2021 में 195,439, 2019 में 188,753, 2016 में 169,500, 2014 में 163,904 और 2011 में 156,270 थे.
मतदान प्रतिशत लगातार उच्च रहा है- 2011 में 75.78 प्रतिशत, 2014 में 77.27 प्रतिशत, 2016 में 84.47 प्रतिशत, 2019 में 81.55 प्रतिशत, 2021 में 82.66 प्रतिशत और 2024 में 81.82 प्रतिशत.
2023 के परिसीमन से पहले, मुस्लिम सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समूह थे, जिनकी मतदाताओं में हिस्सेदारी 28.40 प्रतिशत थी. इसके बाद अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 5.95 प्रतिशत और अनुसूचित जनजातियों की हिस्सेदारी लगभग 20.25 प्रतिशत थी. रंगिया विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण था, जहां 84.45 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण इलाकों में रहते थे, जबकि शहरी मतदाताओं की हिस्सेदारी लगभग 14.55 प्रतिशत थी.
इस विधानसभा क्षेत्र में असमिया भाषी हिंदू, मुस्लिम, चाय बागान समुदायों (आदिवासियों) और स्थानीय समूहों का मिला-जुला स्वरूप देखने को मिलता है, जो यहां के विविध ग्रामीण मतदाता वर्ग का निर्माण करते हैं.
रंगिया विधानसभा क्षेत्र मध्य असम के कामरूप जिले के कुछ हिस्सों को कवर करता है. यहां ब्रह्मपुत्र नदी के दक्षिणी तट पर समतल जलोढ़ मैदान हैं, जिनके बीच-बीच में आर्द्रभूमियां, 'बील' (झीलें) और दक्षिण की ओर हल्की ऊंची-नीची जमीनें (टीले) मौजूद हैं. यहां की जमीन धान की खेती, आर्द्रभूमियों में मछली पालन और कुछ हद तक बागवानी के लिए उपयुक्त है. हालांकि, ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों के कारण यहाँ मौसमी बाढ़ का खतरा बना रहता है. रंगिया में लोगों की आजीविका मुख्य रूप से धान की खेती, मछली पकड़ने, छोटे-मोटे व्यापार, खेती से जुड़ी गतिविधियों और पर्यटन से जुड़ी कुछ सेवाओं पर निर्भर करती है. यहां की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी और भरपूर बारिश इन गतिविधियों को बनाए रखने में मदद करती है.
बुनियादी ढांचे में राष्ट्रीय राजमार्ग 15 और राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के जरिए सड़क संपर्क शामिल है, साथ ही कई राज्य राजमार्ग भी हैं जो आस-पास के इलाकों को जोड़ते हैं. रंगिया रेलवे स्टेशन पर रेल सुविधा उपलब्ध है, जो इस निर्वाचन क्षेत्र के भीतर स्थित एक प्रमुख जंक्शन है. बुनियादी सुविधाओं में ग्रामीण सड़कों, सिंचाई और स्थानीय बाजारों में चल रहे विकास कार्य शामिल हैं.
आस-पास के शहरों में दक्षिण में गुवाहाटी (लगभग 50-60 किमी दूर) और पश्चिम में नलबाड़ी (लगभग 20-25 किमी दूर) शामिल हैं. राज्य की राजधानी, दिसपुर, यहां से लगभग 50-60 किमी दक्षिण में स्थित है.
रंगिया की एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत है जो ब्रह्मपुत्र घाटी से जुड़ी है, इसमें असमिया और बंगाली परंपराओं का मेल, प्राचीन मंदिर और औपनिवेशिक काल से चले आ रहे चाय बागानों की विरासत शामिल है. आज यहां स्थानीय बाजार, सामुदायिक उत्सव देखने को मिलते हैं, और साथ ही आधुनिक कृषि तथा छोटे उद्योगों की ओर झुकाव भी देखा जा रहा है.
मौजूदा BJP विधायक, भाबेश कलिता, लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी ने प्रांजित चौधरी को अपना उम्मीदवार बनाया है. रंगिया में शायद उम्मीदवारों की सूची सबसे छोटी होगी, जिसमें मैदान में सिर्फ ये दो नेता ही होंगे. कांग्रेस यहां कोई मजबूत ताकत नहीं रही है, उसकी जीत-हार का सिलसिला अनियमित रहा है, और अब उसे यहां एक कमजोर ताकत के तौर पर देखा जाता है. इसकी वजह है हाल के चुनावों में BJP का जबरदस्त दबदबा, विधानसभा चुनावों में लगातार दो जीत और संसदीय चुनावों में लगातार चार बार बढ़त. यही बात BJP को 2026 के विधानसभा चुनावों में रंगिया सीट जीतने का सबसे मजबूत दावेदार बनाती है.
(अजय झा)